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बजट फोन्स पर महंगाई की मार: 15,000 रुपये से कम वाले फोन्स में सबसे ज्यादा इजाफा, जानें क्यों बढ़ रहे दाम

टेक डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Thu, 23 Apr 2026 05:28 PM IST
सार

Smartphone Price: अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने जरूर आपको मायूस कर दिया होगा। अब सिर्फ नए मॉडल ही नहीं, बल्कि पहले लॉन्च हो चुके पुराने फोन भी महंगे हो रहे हैं। आइए जानते हैं स्मार्टफोन की कीमतों में आग क्यों लगी हुई है।

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स्मार्टफोन की कीमत लगातार बढ़ रही है - फोटो : एआई जनरेटेड
स्मार्टफोन बाजार में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जहां पहले लॉन्च के बाद फोन सस्ते होते थे, अब उल्टा हो रहा है। कई ब्रांड्स ने लॉन्च के कुछ ही महीनों बाद अपने डिवाइस की कीमतें बढ़ा दी हैं। उदाहरण के तौर पर OnePlus का OnePlus 15R, जो दिसंबर 2025 में 47,999 रुपये में लॉन्च हुआ था, अब 50,499 रुपये में बिक रहा है। इसी तरह OnePlus Pad Go 2 की कीमत भी 26,999 रुपये से बढ़कर 27,999 रुपये हो गई है।


Samsung ने भी कई मॉडल्स की कीमतें बढ़ाई हैं। Galaxy M36 5G, जो 17,499 रुपये में लॉन्च हुआ था, अब 20,999 रुपये का हो गया है। इसके अलावा Galaxy M06, Galaxy F06 और Galaxy M17 5G जैसे मॉडल्स भी महंगे हो गए हैं। Vivo के Vivo V70 की कीमत 45,999 रुपये से बढ़कर 49,999 रुपये हो गई है, जबकि Vivo V70 Elite अब 55,999 रुपये में मिल रहा है। वहीं Nothing के Nothing Phone 3a Lite की कीमत भी लॉन्च के बाद बढ़ चुकी है।
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स्मार्टफोन - फोटो : AI जनरेटेड
नए स्मार्टफोन भी हो रहे महंगे
सिर्फ पुराने मॉडल ही नहीं, नए लॉन्च होने वाले स्मार्टफोन भी पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत पर आ रहे हैं। Samsung के Galaxy A56 की शुरुआती कीमत 41,999 रुपये थी, लेकिन इसके नए वर्जन Galaxy A57 की कीमत 56,999 रुपये से शुरू हो रही है। इसी तरह Galaxy A36 और A37 के बीच भी कीमतों में बड़ा अंतर देखा गया है।

हालांकि, इन बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद हार्डवेयर में बहुत बड़े बदलाव नहीं देखने को मिलते, ज्यादातर अपग्रेड्स चिपसेट और AI फीचर्स तक सीमित रहते हैं। हालांकि Apple ने iPhone 17e को 64,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया, जो iPhone 16e से थोड़ा सस्ता है, लेकिन पुराने मॉडल में कम स्टोरेज का विकल्प भी मौजूद था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
मेमोरी पार्ट्स का महंगा होना है असली वजह
कीमतों में हो रही इस लगातार बढ़ोतरी के केंद्र में मेमोरी पार्ट्स का महंगा होना है। फोन में इस्तेमाल होने वाले DRAM और NAND जैसे कंपोनेंट्स की कीमतों में भारी उछाल आया है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, बाजार में इस समय ग्राहकों की खरीदने की क्षमता पर भारी दबाव देखने को मिल रहा है। मेमोरी की लगातार बढ़ती महंगाई और करेंसी (मुद्रा) के दबाव के कारण मोबाइल कंपनियों को अपने प्रमुख मॉडल्स की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 

स्मार्टफोन्स की औसत कीमतों में 1,500 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिसका सबसे बुरा असर 15,000 रुपये से कम वाले बजट सेगमेंट पर पड़ा है। इस महंगाई का सीधा असर बाजार के प्रदर्शन पर भी दिख रहा है। काउंटरपॉइंट के आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट में सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो पिछले छह वर्षों की सबसे कमजोर तिमाही रही है।
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AI के कारण बढ़ी मेमोरी की मांग - फोटो : एआई जनरेटेड
AI के कारण बढ़ी मेमोरी की मांग
मेमोरी की कीमत बढ़ने का एक बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। अब मेमोरी कंपनियां हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, जिसका इस्तेमाल AI इंफ्रास्ट्रक्चर में होता है और इससे ज्यादा मुनाफा मिलता है। इस वजह से स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली सामान्य मेमोरी की सप्लाई कम हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह संकट 2027 तक जारी रह सकता है। 

दुनिया के कुल DRAM बाजार के 90 प्रतिशत हिस्से पर सैमसंग, एसके हाइनिक्स और माइक्रोन का कब्जा है और वे इतनी जल्दी अपना उत्पादन नहीं बढ़ा पा रहे हैं। नई फैक्टरियां बन रही हैं, लेकिन उनका भी सही आउटपुट 2027 के बाद ही मिलेगा। नतीजतन, 2026 की शुरुआत में मेमोरी की कीमतों में तिमाही आधार पर लगभग 90 प्रतिशत का उछाल आया है। आज एक बजट फोन की कुल लागत में 20 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ मेमोरी का है, जो 2026 के मध्य तक बढ़कर 40 प्रतिशत तक जा सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
सिर्फ फोन्स ही नहीं, अन्य गैजेट्स पर भी पड़ रहा असर
सप्लाई की इस भारी कमी का असर सिर्फ स्मार्टफोन्स तक ही सीमित नहीं है। एप्पल ने अपने कुछ मैक (Mac) कंप्यूटर्स के हाई-मेमोरी वाले विकल्पों को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है या उन्हें अनुपलब्ध (अनअवेलेबल) कर दिया है। इससे यह साफ पता चलता है कि पार्ट्स की कमी के चलते कंपनियां अब कम मेमोरी वाले वेरिएंट्स को प्राथमिकता दे रही हैं। इसके अलावा, सोनी ने भी अपने कुछ मेमोरी कार्ड लाइनअप के ऑर्डर्स लेने बंद कर दिए हैं और बयान दिया है कि आने वाले समय में डिमांड के हिसाब से सप्लाई पूरी होने की कोई उम्मीद नहीं है।
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