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'AI गॉडफादर' का मेटा से इस्तीफा: कहा- LLM की अंधी दौड़ में फंस चुकी है सिलिकन वैली, रोक रही है इनोवेशन

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Mon, 26 Jan 2026 11:28 AM IST
सार

AI Talent War: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में 'गॉडफादर' माने जाने वाले यान लेकन ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी 'मेटा' को अलविदा कह दिया है। उनके इस फैसले ने पूरी टेक इंडस्ट्री को चौंका दिया है। लेकन ने सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों पर 'एलएलएम' के पीछे अंधाधुंध भागने और इनोवेशन का गला घोंटने का गंभीर आरोप लगाया है।

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yann lecun leaves meta criticizes llm obsession ai talent war stifling ai innovation
सुपर इंटेलिजेंस के रास्ते में रुकावट बन रही एआई टैलेंट वॉर - फोटो : FREEPIK
कल्पना कीजिए कि दुनिया के सबसे बुद्धिमान लोग एक ही रास्ते पर दौड़ रहे हों, यह जानते हुए भी कि वह रास्ता शायद मंजिल तक न जाए। तकनीक की दुनिया में एक ऐसा ही तूफान खड़ा हो गया है जिसने सिलिकॉन वैली की नींव हिला दी है। एआई के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले और 'गॉडफादर' कहे जाने वाले यान लेकन ने एक ऐसी सच्चाई से पर्दा उठाया है, जिसे अब तक बड़ी टेक कंपनियां छिपाती आई थीं। मेटा जैसी दिग्गज कंपनी से उनके इस्तीफे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम जिस सुपर-इंटेलिजेंस का सपना देख रहे हैं, वह कभी हकीकत बन भी पाएगा या नहीं?

 
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एआई टैलेंट वॉर - फोटो : अमर उजाला
सिलिकॉन वैली में चल रहा एआई टैलेंट वॉर
यान लेकन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने एक संबोधन में पूरी टेक इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने वर्तमान दौर को "एलएलएम-पिल्ड" (LLM-pilled) करार दिया है। लेकन का मानना है कि सिलिकॉन वैली की तमाम कंपनियां एक ही तरह के 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल' (LLM) बनाने के पीछे पागल हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति वैसी ही है जैसे हर कोई एक ही गड्ढे को और गहरा खोदने में लगा हो, जबकि जरूरत कहीं और खुदाई करने की है। उन्होंने चेतावनी दी कि कंपनियां एक-दूसरे के इंजीनियरों को सिर्फ इसलिए तोड़ रही हैं ताकि प्रतिद्वंद्वी कुछ नया या अलग न कर सकें। यह 'टैलेंट वॉर' इनोवेशन को बढ़ावा देने के बजाय उसे खत्म करने का एक रणनीतिक हथियार बन गया है।
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सुपर-इंटेलिजेंस की राह में क्या है अड़चन? - फोटो : AI
सुपर-इंटेलिजेंस की राह में क्या है अड़चन?
लेकन ने इस बात पर जोर दिया कि केवल भाषा पर आधारित मॉडल (LLMs) कभी भी वास्तविक सुपर-इंटेलिजेंस नहीं बन सकते। उन्होंने समझाया कि भविष्य की एआई को 'एजेंटिक सिस्टम' होना चाहिए, यानी एक ऐसा तंत्र जो आपके लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सके। किसी भी एआई के लिए सही निर्णय लेना तब तक संभव नहीं है, जब तक उसमें भविष्य के परिणामों का अनुमान लगाने की क्षमता न हो। जैसे इंसान कोई भी कदम उठाने से पहले उसके नतीजे के बारे में सोचता है, वैसे ही एआई को भी 'प्रेडिक्टिव वर्ल्ड मॉडल्स' की जरूरत है। मौजूदा तकनीक शब्दों को जोड़कर वाक्य बनाना तो जानती है, लेकिन वह दुनिया की भौतिक कार्यप्रणाली और कार्यों के परिणामों को समझने में पूरी तरह विफल है।
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क्या राह से भटक गई है मेटा? - फोटो : X
क्या राह से भटक गई है मेटा?
मेटा के चीफ एआई साइंटिस्ट के पद से लेकन के हटने की कहानी काफी दिलचस्प है। जून 2025 में जब मार्क जुकरबर्ग ने 14.3 बिलियन डॉलर के भारी-भरकम निवेश के साथ 'मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स' की शुरुआत की, तो कंपनी का पूरा ध्यान एलएलएम की रेस जीतने पर टिक गया। इस नई लैब की कमान स्केल एआई के पूर्व सीईओ अलेक्जेंड्र वांग को सौंपी गई। लेकन ने स्पष्ट किया कि मेटा के भीतर भी शोध का दायरा सिमट कर केवल एलएलएम तक रह गया था। उन्होंने महसूस किया कि कंपनी अब उस पथ से भटक गई है जो एआई को वास्तव में इंटेलिजेंट बनाने के लिए जरूरी था। इसी वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने मेटा छोड़कर अपनी खुद की लैब स्थापित करने का निर्णय लिया, जो 'वर्ल्ड मॉडल्स' पर काम करेगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
भविष्य की राह और नई चुनौती
यान लेकन का जाना महज एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एआई अनुसंधान के एक नए अध्याय की शुरुआत है। वह अब ऐसे सिस्टम बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो इंसानों की तरह योजना बना सकें और परिस्थितियों को समझ सकें। लेकन का यह कदम उन युवा शोधकर्ताओं के लिए एक संदेश है जो केवल भीड़ का हिस्सा बने हुए हैं। उनका मानना है कि अगर हमें वास्तव में ऐसी मशीनें बनानी हैं जो मानव सभ्यता की मदद कर सकें, तो हमें भाषा की सीमाओं से बाहर निकलकर 'कारण और प्रभाव' (Cause and Effect) के सिद्धांतों को एआई की बुद्धिमत्ता में पिरोना होगा।
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