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Bharat Sapce Station: भारत का स्पेस स्टेशन हकीकत के करीब, 2028 में पहला मॉड्यूल लॉन्च करने की तैयारी में ISRO
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:31 PM IST
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सार
ISRO Space Station: भारत अंतरिक्ष में अपना स्पेस स्टेशन बनाने की ओर कदम बढ़ा चुका है। अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इसपर काम शुरू कर दिया है। संगठन स्पेस स्टेशन का पहला मॉड्यूल वर्ष 2028 में लॉन्च करेगी। वहीं, 2035 तक यह प्रोजेक्ट ऑपरेशनल हो जाएगा।
2035 तक पूरी तरह स्थापित होगा स्पेस स्टेशन (सांकेतिक)
- फोटो : AI
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विस्तार
भारत अब बहुत जल्द स्पेस स्टेशन वाले देशों के एलीट क्लब में शामिल हो सकता है। इस क्षेत्र में एतिहासिक कदम बढ़ाते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत स्पेस स्टेशन (Bharat Space Station – BAS) के कोर स्ट्रक्चर पर काम शुरू कर दिया है। यह स्पेस स्टेशन लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा, जहां भारतीय अंतरिक्ष यात्री और वैज्ञानिक लंबे समय तक रहकर शोध कर सकेंगे। यह परियोजना भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
2028 में लॉन्च होगा पहला मॉड्यूल
ISRO के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने भारत स्पेस स्टेशन के पहले मॉड्यूल के निर्माण के लिए देश की एयरोस्पेस कंपनियों से संपर्क किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BAS-01 नाम का यह पहला मॉड्यूल वर्ष 2028 में लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ ही भारत का अंतरिक्ष में स्थायी प्रयोगशाला स्थापित करने का सपना औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा।
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2028 में लॉन्च होगा पहला मॉड्यूल
ISRO के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने भारत स्पेस स्टेशन के पहले मॉड्यूल के निर्माण के लिए देश की एयरोस्पेस कंपनियों से संपर्क किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BAS-01 नाम का यह पहला मॉड्यूल वर्ष 2028 में लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ ही भारत का अंतरिक्ष में स्थायी प्रयोगशाला स्थापित करने का सपना औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा।
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गगनयान मिशन के बाद तेज होगी तैयारी
- फोटो : AI
गगनयान मिशन के बाद तेज होगी तैयारी
भारत स्पेस स्टेशन की योजना 'गगनयान' कार्यक्रम के बाद तेज गति से आगे बढ़ेगी। ISRO का मानना है कि यह स्टेशन लंबी अवधि के वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए बेहद अहम होगा। इसके जरिए भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं और नई तकनीकों के विकास में भी मदद मिलेगी। बता दें कि 'गगनयान' भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन होगा, जिसे 2027 तक लॉन्च करने की तैयारी है। इसरो प्रमुख वी नारायणन के मुताबिक, भारत 2040 तक अपना पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन भेज सकता है, जिसके लिए इसरो ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
2035 तक पूरा होगा स्टेशन का निर्माण
ISRO की योजना के अनुसार, स्पेस स्टेशन को एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा। पहले मॉड्यूल के बाद अन्य मॉड्यूल अलग-अलग लॉन्च किए जाएंगे और अंतरिक्ष में ही जोड़े जाएंगे। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक भारत स्पेस स्टेशन पूरी तरह कार्यशील हो जाएगा। हर मॉड्यूल का व्यास लगभग 3.8 मीटर और ऊंचाई 8 मीटर होगी। इन्हें AA-2219 एल्यूमिनियम एलॉय से बनाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल पहले भी मानव अंतरिक्ष कार्यक्रमों में किया जा चुका है।
भारत स्पेस स्टेशन की योजना 'गगनयान' कार्यक्रम के बाद तेज गति से आगे बढ़ेगी। ISRO का मानना है कि यह स्टेशन लंबी अवधि के वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए बेहद अहम होगा। इसके जरिए भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं और नई तकनीकों के विकास में भी मदद मिलेगी। बता दें कि 'गगनयान' भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन होगा, जिसे 2027 तक लॉन्च करने की तैयारी है। इसरो प्रमुख वी नारायणन के मुताबिक, भारत 2040 तक अपना पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन भेज सकता है, जिसके लिए इसरो ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
2035 तक पूरा होगा स्टेशन का निर्माण
ISRO की योजना के अनुसार, स्पेस स्टेशन को एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा। पहले मॉड्यूल के बाद अन्य मॉड्यूल अलग-अलग लॉन्च किए जाएंगे और अंतरिक्ष में ही जोड़े जाएंगे। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक भारत स्पेस स्टेशन पूरी तरह कार्यशील हो जाएगा। हर मॉड्यूल का व्यास लगभग 3.8 मीटर और ऊंचाई 8 मीटर होगी। इन्हें AA-2219 एल्यूमिनियम एलॉय से बनाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल पहले भी मानव अंतरिक्ष कार्यक्रमों में किया जा चुका है।
चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल होगा भारत
- फोटो : Adobe Stock
पूरी तरह स्वदेशी होगा भारत स्पेस स्टेशन
भारत स्पेस स्टेशन पूरी तरह देश में ही विकसित किया जाएगा और इसमें किसी भी विदेशी एजेंसी की भागीदारी नहीं होगी। सभी मॉड्यूल मानव उपयोग के लिए सुरक्षित मानकों पर खरे उतरेंगे। ISRO ने भारतीय कंपनियों से एक से अधिक कोर मॉड्यूल बनाने की संभावना पर भी काम शुरू किया है, ताकि मिशन लंबे समय तक सुचारु रूप से चल सके।
चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल होगा भारत
जैसे ही भारत स्पेस स्टेशन का पहला मॉड्यूल कक्षा में स्थापित होगा, भारत उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपना स्पेस स्टेशन है। इस सूची में अमेरिका, रूस, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी, जापान, कनाडा और चीन जैसे देश शामिल हैं। यह उपलब्धि भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान और ऑर्बिटल रिसर्च क्षमता को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करेगी।
भारत स्पेस स्टेशन पूरी तरह देश में ही विकसित किया जाएगा और इसमें किसी भी विदेशी एजेंसी की भागीदारी नहीं होगी। सभी मॉड्यूल मानव उपयोग के लिए सुरक्षित मानकों पर खरे उतरेंगे। ISRO ने भारतीय कंपनियों से एक से अधिक कोर मॉड्यूल बनाने की संभावना पर भी काम शुरू किया है, ताकि मिशन लंबे समय तक सुचारु रूप से चल सके।
चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल होगा भारत
जैसे ही भारत स्पेस स्टेशन का पहला मॉड्यूल कक्षा में स्थापित होगा, भारत उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपना स्पेस स्टेशन है। इस सूची में अमेरिका, रूस, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी, जापान, कनाडा और चीन जैसे देश शामिल हैं। यह उपलब्धि भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान और ऑर्बिटल रिसर्च क्षमता को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करेगी।