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आधार में बड़े बदलाव की तैयारी: फिंगरप्रिंट के जगह चेहरे से होगी पहचान, एआई से रुकेगा फ्रॉड
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 26 Jan 2026 04:30 PM IST
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सार
Aadhar Vision 2032: आधार सिस्टम अब एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। सरकार फिंगरप्रिंट आधारित पहचान से आगे बढ़कर चेहरे से पहचान की व्यवस्था पर काम कर रही है। ‘आधार विजन 2032’ के तहत तकनीक को ज्यादा सुरक्षित, तेज और धोखाधड़ी से मुक्त बनाने की योजना है।
आधार में बड़े बदलाव की तैयारी
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
भारत सरकार ने आधार में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। देश में रोजाना करोड़ों लोग आधार के जरिए पहचान सत्यापन कराते हैं। ऐसे में बढ़ती आबादी, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और साइबर फ्रॉड के खतरे को देखते हुए आधार के तकनीकी ढांचे में बड़ा बदलाव किया जाएगा। सरकार ने ‘आधार विजन 2032’ नाम का अहम दस्तावेज पेश किया है, जिसमें एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई है।
आधार में होंगे तीन प्रमुख बदलाव
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आधार में होंगे तीन प्रमुख बदलाव
- नई योजना के तहत आधार में फिंगरप्रिंट की जगह फेशियल रिकग्निशन को प्राथमिक पहचान माध्यम बनाने की तैयारी है।
- रोजाना करीब 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन होते हैं, जिनमें से लगभग 1 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए पूरे किए जाते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर महीने 100 करोड़ ऑथेंटिकेशन चेहरे की पहचान से किए जाएं।
- AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से सरकार आधार को भविष्य के लिए तैयार करना चाहती है। उद्देश्य साफ है एक ऐसा पहचान सिस्टम जो तेज हो, सुरक्षित हो और फ्रॉड की गुंजाइश न्यूनतम हो।
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आधार कार्ड
- फोटो : AI
AI से होगा ऑथेंटिकेशन ज्यादा आसान
आधार के सीईओ भुवनेश कुमार के मुताबिक, विजन 2032 को ध्यान में रखते हुए तैयारी की जा रही है, लेकिन तकनीकी सोच उससे भी आगे की है। इस विजन के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से फेशियल डेटा के जरिए आधार वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिससे लोगों को बार-बार फिंगरप्रिट से वेरिफिकेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे सिस्टम न सिर्फ तेज होगा, बल्कि पहचान में आने वाली दिक्कतें भी कम होंगी।
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बच्चों और किशोरों के लिए मुफ्त अपडेट
सरकार पहले ही 5 करोड़ बच्चों और किशोरों के बायोमैट्रिक अपडेट कर चुकी है। यह प्रक्रिया सितंबर 2026 तक पूरी तरह मुफ्त जारी रहेगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उम्र के साथ बदलने वाले बायोमैट्रिक डेटा में किसी तरह की गड़बड़ी न हो और भविष्य में पहचान से जुड़ी समस्याएं न आएं।
अगले पांच साल का तकनीकी रोडमैप तैयार
आधार के नए तकनीकी ढांचे को लेकर बनी समिति अगले महीने अपने प्रारूप को अंतिम रूप देगी। इसके बाद मार्च में यह रिपोर्ट यूआईडीएआई (UIDAI) को सौंपी जाएगी। इसी आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए आधार की टेक्नोलॉजी संरचना तय की जाएगी। मौजूदा तकनीकी अनुबंध 2027 में खत्म हो रहा है, जिसके बाद 2032 तक के लिए नया अनुबंध किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: Bharat Sapce Station: भारत का स्पेस स्टेशन हकीकत के करीब, 2028 में पहला मॉड्यूल लॉन्च करने की तैयारी में ISRO
इस अहम दस्तावेज को तैयार करने के लिए अक्टूबर में यूआईडीएआई चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी। इसमें सर्वम् AI के सह-संस्थापक विवेक राघवन, न्यूटनिक्स के संस्थापक धीरज पांडेय, अमृता यूनिवर्सिटी के डॉ. पी. पूर्णचंद्रन, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अनिल जैन और आईआईटी जोधपुर के मयंक वत्स शामिल हैं।
आधार के सीईओ भुवनेश कुमार के मुताबिक, विजन 2032 को ध्यान में रखते हुए तैयारी की जा रही है, लेकिन तकनीकी सोच उससे भी आगे की है। इस विजन के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से फेशियल डेटा के जरिए आधार वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिससे लोगों को बार-बार फिंगरप्रिट से वेरिफिकेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे सिस्टम न सिर्फ तेज होगा, बल्कि पहचान में आने वाली दिक्कतें भी कम होंगी।
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बच्चों और किशोरों के लिए मुफ्त अपडेट
सरकार पहले ही 5 करोड़ बच्चों और किशोरों के बायोमैट्रिक अपडेट कर चुकी है। यह प्रक्रिया सितंबर 2026 तक पूरी तरह मुफ्त जारी रहेगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उम्र के साथ बदलने वाले बायोमैट्रिक डेटा में किसी तरह की गड़बड़ी न हो और भविष्य में पहचान से जुड़ी समस्याएं न आएं।
अगले पांच साल का तकनीकी रोडमैप तैयार
आधार के नए तकनीकी ढांचे को लेकर बनी समिति अगले महीने अपने प्रारूप को अंतिम रूप देगी। इसके बाद मार्च में यह रिपोर्ट यूआईडीएआई (UIDAI) को सौंपी जाएगी। इसी आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए आधार की टेक्नोलॉजी संरचना तय की जाएगी। मौजूदा तकनीकी अनुबंध 2027 में खत्म हो रहा है, जिसके बाद 2032 तक के लिए नया अनुबंध किया जाएगा।
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इस अहम दस्तावेज को तैयार करने के लिए अक्टूबर में यूआईडीएआई चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी। इसमें सर्वम् AI के सह-संस्थापक विवेक राघवन, न्यूटनिक्स के संस्थापक धीरज पांडेय, अमृता यूनिवर्सिटी के डॉ. पी. पूर्णचंद्रन, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अनिल जैन और आईआईटी जोधपुर के मयंक वत्स शामिल हैं।