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ये पांच गैजेट, जिनसे कर सकते हैं आप किसी की भी जासूसी
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 14 Aug 2016 06:16 PM IST
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जासूसी गैजेट से दुनिया का कोई हिस्सा अछूता नहीं है। इंटरनेशनल म्यूजियम के इतिहासकार थॉम्स बॉग्हार्ट के मुताबिक द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ऐसे जासूस गैजेट जब्त किए जिसकी वजह से रूस ने कई प्रकार के खुफिया कदम उठाए थे।
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लिपस्टिक पिस्टल
लिपस्टिक पिस्टल
जासूसी में इस्तेमाल की गई यह लिपस्टिक पिस्टल 4.5 मिली/मीटर सिंगल शॉट हथियार है। म्यूजियम में इसे 'किस ऑफ डेथ' के नाम से जाने जानी वाली पिस्टल को केजीबी के एजेंट से 1960 में लिया गया था।
इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल कुछ ऐसे किया जाता था कि टारगेट को पता भी नहीं चलता।
इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल कुछ ऐसे किया जाता था कि टारगेट को पता भी नहीं चलता।
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कोट कैमरा
कोट कैमरा
म्यूजियम में रखे गए इस कैमरे की खासियत थी कि इसे कोट की जेब में रखकर जासूसी की जा सकती थी। दरअसल यह एक छोटा कैमरा है जिसका मॉडल नंबर F-21 है जो कि केजीबी ने 1970 में जारी किया था।
इस तरह के पॉर्टेबल कैमरे का इस्तेमाल खासतौर पर राजनीतिक रैलियों में किया जाता था ताकि किसी को शक न हो सके।
स्पाइ म्यूजियम के डायरेक्टर पीटर अरनेस्ट जिन्होंने सीआईए की इन्टेलिजेन्स एजेंसी के लिए काम किया है, ने भी इसका इस्तेमाल किया था।
इस तरह के पॉर्टेबल कैमरे का इस्तेमाल खासतौर पर राजनीतिक रैलियों में किया जाता था ताकि किसी को शक न हो सके।
स्पाइ म्यूजियम के डायरेक्टर पीटर अरनेस्ट जिन्होंने सीआईए की इन्टेलिजेन्स एजेंसी के लिए काम किया है, ने भी इसका इस्तेमाल किया था।
माइक्रोडॉट कैमरा
सन् 1960 में द इस्टर्न जर्मन इंटेलिजेन्स सर्विस एचवीए ने इस कैमरे को जारी किया था। जो कि टैक्स की फोटो ले सकता है और कैमिकल योग्यता की वजह से उस टैक्स को छोटा कर देता था।
इसकी खास बात यह है कि इसकी मदद से जासूस जरूरी जानकारी को छुपा सकते थे। दूसर विश्व युद्ध के दौरान एजेंट डुस्को पोपोव ने यह कैमरा एफबीआई को दिया था।
इसकी खास बात यह है कि इसकी मदद से जासूस जरूरी जानकारी को छुपा सकते थे। दूसर विश्व युद्ध के दौरान एजेंट डुस्को पोपोव ने यह कैमरा एफबीआई को दिया था।
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जूते में छुपने वाला ट्रांसमीटर
जूते में छुपने वाला ट्रांसमीटर
रूमानिया में इस तरह के जूतों का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जाता था. बोगहार्ट का कहना है कि यह सिग्नल पर चलने वाला यंत्र था और इसमें रिकॉर्ड होने वाली बातों की किसी को खबर भी नहीं लग पाती थी।