RBI Rules For Locker Compensation: अक्सर लोग अपनी मेहनत की कमाई, सोने के जेवर और जरूरी दस्तावेज सुरक्षा के लिहाज से बैंक लॉकर में रखते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि आरबीआई के नियमों के अनुसार, प्राकृतिक आपदा या चोरी की स्थिति में बैंक की जिम्मेदारी सीमित होती है?
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Bank Locker Rules: बैंक के लॉकर में रखे कीमती सामान का बीमा कराना क्यों जरूरी? जानें इससे जुड़ी सारी जानकारी
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Sun, 22 Mar 2026 11:12 AM IST
सार
Bank Locker Insurance Process: हमारे देश में आम आदमी अपनी कीमती सामानों को बैंक के लॉकर में रखता है। बहुत से लोगों को ये नहीं मालूम है कि अगर लॉकर से सामान गायब होने की स्थिति में बैंक सिर्फ लॉकर के वार्षिक किराए का 100 गुना तक ही मुआवजा देता है। ऐसे में आइए जानते हैं लॉकर में रखे सामान इंश्योरेंस कैसे करते हैं।
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बैंक लॉकर का इंश्योरेंश
- फोटो : Adobe Stock
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बैंक लॉकर का इंश्योरेंश
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कैसे काम करता है बैंक लॉकर इंश्योरेंस?
- लॉकर बीमा कोई बैंक नहीं, बल्कि सामान्य बीमा कंपनियां प्रदान करती हैं।
- आप इसे 'होम इंश्योरेंस' के ऐड-ऑन कवर के रूप में या एक अलग 'स्टैंडअलोन' पॉलिसी के रूप में ले सकते हैं।
- इसमें आपको अपने गहनों या सामान की सूची और उनकी अनुमानित कीमत की घोषणा करनी होती है। अच्छी बात यह है कि ₹10 लाख तक के बीमे के लिए अक्सर किसी कठिन 'वैल्यूएशन सर्टिफिकेट' की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे प्रक्रिया काफी सरल हो जाती है।
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बीमा कराने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- सबसे पहले अपनी पसंद की बीमा कंपनी की वेबसाइट या ऐप पर जाकर 'Locker Protector' प्लान चुनें।
- अपने सामान का विवरण भरें और जरूरी प्रीमियम का भुगतान करें। प्रीमियम राशि आमतौर पर आपके सामान की कुल कीमत का बहुत छोटा हिस्सा (लगभग 0.1% से 0.2%) होती है।
- पॉलिसी जारी होने के बाद, अपने लॉकर एग्रीमेंट की कॉपी और सामान की फोटो सुरक्षित रखें।
- ध्यान रखें बीमा का क्लेम सिर्फ उन्हीं सामानों मिलता है जिनका उल्लेख आपने पॉलिसी लेते समय किया था।
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किन-किन स्थितियों में मिलता है क्लेम का लाभ?
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- यह पॉलिसी आग, विस्फोट, चोरी, डकैती और इमारत गिरने जैसी स्थितियों को कवर करती है।
- आरबीआई के नए नियमों के तहत, अगर बैंक की लापरवाही (जैसे शॉर्ट सर्किट या सुरक्षा में चूक) से नुकसान होता है, तो बैंक मुआवजा देता है।
- लेकिन अगर घटना 'एक्ट ऑफ गॉड' (प्राकृतिक आपदा) है, तो बैंक की कोई कानूनी देनदारी नहीं होती। ऐसी स्थिति में सिर्फ आपका निजी बीमा ही आपको वित्तीय नुकसान से बचा सकता है।
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सुरक्षा के लिए उठाएं कदम
- बैंक लॉकर सुरक्षित हैं, लेकिन वे अभेद्य नहीं हैं।
- आज के समय में बढ़ते साइबर और फिजिकल रिस्क को देखते हुए, अपने कीमती सामान का बीमा कराना एक निवेश की तरह हो चुका है।
- यह आपको मानसिक शांति देता है कि अगर अनहोनी होती भी है, तो आपकी जीवनभर की जमापूंजी सुरक्षित रहेगी।
- इसलिए आज ही अपने बैंक लॉकर के सामान का मूल्यांकन करें और एक उपयुक्त बीमा पॉलिसी लेकर अपनी वित्तिय सुरक्षा को पुख्ता करें।