Train Bedroll Changing Rules: ट्रेन में आप जनरल कोच से लेकर एसी क्लास तक में सफर कर सकते हैं। लोग अपनी-अपनी क्षमता के हिसाब से जनरल से लेकर एसी क्लास तक का टिकट खरीदते हैं। वहीं, एसी क्लास की बात करें, तो इसमें लोगों को अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं।
{"_id":"6a6462f77dded06f16048fe7","slug":"indian-railways-how-often-are-the-bedsheets-pillows-and-blankets-provided-on-trains-changed-2026-07-25","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Train Bedroll Rules: ट्रेन में मिलने वाले चादर-तकिया-कंबल को कितने दिन में बदला जाता है? खुद रेलवे ने बताया","category":{"title":"Utility","title_hn":"जरूरत की खबर","slug":"utility"}}
Train Bedroll Rules: ट्रेन में मिलने वाले चादर-तकिया-कंबल को कितने दिन में बदला जाता है? खुद रेलवे ने बताया
Sat, 25 Jul 2026 12:48 PM IST
प्रकाश चंद जोशी
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रकाश चंद जोशी
Updated Sat, 25 Jul 2026 12:48 PM IST
सार
Train Ke Bedroll Kitne Din Mein Change Hote Hain: क्या आप जानते हैं कि ट्रेन में आपको मिलने वाले चादर, तकिए और कंबल आदि को कितने दिनों में बदला जाता है? आप यहां जान सकते हैं।
विज्ञापन
ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले कंबल, तकिए और चादर को कितने समय में बदला जाता है?
- फोटो : Amar Ujala AI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
- फोटो : ANI
कितने दिन में बदले जाते हैं बेडरोल किट?
- रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय रेलवे की ट्रेनों के एसी क्लास के यात्रियों को हर यात्रा के दौरान दो बेडशीट, एक तकिया कवर और एक हैंड टॉवल दिया जाता है
- जहां पहली बेडशीट का इस्तेमाल बर्थ यानी सीट पर बिछाने के लिए किया जाता है, तो वहीं, दूसरी बेडशीट का इस्तेमाल कंबल के नीचे कवर के रूप में बिछाने के लिए किया जाता है
- इस कवर के बीच में होने से ऊनी कंबल सीधे यात्री के शरीर के संपर्क में नहीं आ पाता और इस कवर को हर यात्रा यानी सिंगल यूज के बाद धोया जाता है
ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले कंबल, तकिए और चादर को कितने समय में बदला जाता है?
- फोटो : AI Generated
- इसके अलावा रेलवे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर पश्चिम रेलवे और कामाख्या-हावड़ा के बीच चलने वाली नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों को स्पेशल कंबल कवर दे रहा है
- इनको हर ट्रिप यानी हर यात्रा के बाद धोया जाता है
विज्ञापन
विज्ञापन
ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले कंबल, तकिए और चादर को कितने समय में बदला जाता है?
- फोटो : AI Generated
AI कैमरों से नजर रखी जाती है
- कपड़ों की धुलाई पर नजर रखने के लिए रेलवे एडवांस टेक्नोलॉजी का सहारा यानी AI कैमरों का सहारा ले रहा है
- कपड़ों की सफाई और दाग-धब्बे का पता लगाने के लिए रेलवे के पुणे, जयपुर और जोधपुर डिवीजनों की लॉन्ड्री में AI-कैमरा स्टेन्स डिटैक्शन तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है
- साथ ही पूरी प्रक्रिया पर CCTV कैमरों से निगरानी भी की जा रही है
विज्ञापन
ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले कंबल, तकिए और चादर को कितने समय में बदला जाता है?
- फोटो : AI Generated
क्या है तकिए, कंबल और चादर को बदलने का नियम?
- रेलवे नियमों के अनुसार, ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाले तकिए, कंबल और चादर को बदलने का समय तय है
- ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाली सूती या हैंडलूम बेडशीट की लाइफ 12 महीने यानी 1 साल होती है
- पॉलिवस्त्र बेडशीट की 24 महीने यानी 2 साल लाइफ होती है
- तकिया कवर और फेस टॉवल की लाइफ 9 महीने तय की गई है
- तकिया और ऊनी कम्बल की लाइफ 24 महीने यानी 2 साल होती है यानी इस तय समय के बाद इन्हें बदल दिया जाता है
नोट:- रेलवे के मुताबिक, जो सामान इस्तेमाल के योग्य नहीं रहते या खराब हो जाते हैं, उन्हें तय नियमों के तहत हटा दिया जाता है और उनकी जगह नया सामान लाया जाता है।