What Are The Legal Rights Of Tenant : भारत में लाखों लोग किराए के मकान में रहते हैं, लेकिन अधिकतर किरायदार अपने कानूनी अधिकारों से अनजान होते हैं। कई बार मकान मालिक मनमानी शर्तें थोप देते हैं, अचानक घर खाली करने को कहते हैं या बिना सूचना किराया बढ़ा देते हैं। ऐसे में किरायदारों के लिए अपने हक जानना बेहद जरूरी हो जाता है।
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Legal Rights Of Tenants: क्या हैं किरायदारों के हक ? हर किसी के लिए जानना जरूरी
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Wed, 14 Jan 2026 04:30 PM IST
सार
Tenant Legal Rights: अगर आप भी किराए पर रहते हैं तो ये लेख आपके काम का है। यहां हम आपको आपके अधिकारों के बारे में जानकारी देंगे।
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क्या हैं किरायदारों के हक ?
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क्या हैं किरायदारों के हक ?
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रेंट एग्रीमेंट का अधिकार
- किरायदार और मकान मालिक के बीच लिखित रेंट एग्रीमेंट होना कानूनी रूप से बेहद जरूरी है।
- इसमें किराया, अवधि, नियम-शर्तें, डिपॉजिट और नोटिस पीरियड साफ-साफ लिखा होना चाहिए।
- रजिस्टर्ड एग्रीमेंट होने से भविष्य में विवाद की स्थिति में किरायदार को कानूनी सुरक्षा मिलती है।
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क्या हैं किरायदारों के हक ?
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नोटिस पीरियड
- मकान मालिक बिना पूर्व सूचना के किरायदार को घर खाली करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
- आमतौर पर 1 से 3 महीने का नोटिस देना जरूरी होता है, जैसा कि रेंट एग्रीमेंट में तय होता है।
- नोटिस पीरियड के बिना घर खाली कराना गैरकानूनी माना जाता है।
क्या हैं किरायदारों के हक ?
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डिपॉजिट की वापसी
- अगर किरायदार मकान को बिना किसी नुकसान के खाली करता है, तो मकान मालिक को पूरी सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटानी होती है।
- केवल वैध कारणों और लिखित खर्चों के आधार पर ही कटौती की जा सकती है।
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क्या हैं किरायदारों के हक ?
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प्राइवेसी का अधिकार
- किरायदार की अनुमति के बिना मकान मालिक घर में प्रवेश नहीं कर सकता।
- ये किरायदार की निजता का उल्लंघन माना जाता है और कानून इसके खिलाफ सुरक्षा देता है।