संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से हथियारों के व्यापार को लेकर ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध बीती 18 अक्तूबर को स्वत: ही समाप्त हो गए हैं। यह प्रतिबंध करीब 10 साल पहले साल 2015 में हुई एक संधि की शर्त में शामिल थे। ईरान ने दुनिया के छह बड़े देशों से यह समझौता किया था, हालांकि अमेरिका साल 2018 इससे पीछे हट गया था।
ईरान ने हथियार प्रतिबंध हटते ही जाहिर किए इरादे, अपनी जंगी ताकत को ऐसे करेगा इस्तेमाल
इंस्टीट्यूट फॉर पीस रिसर्च एंड सिक्योरिटी पॉलिसी के बर्लिन कार्यालय में कार्यरत एक वरिष्ठ शोधकर्ता ओलिवर मीयर कहते हैं कि भले ही हथियारों की खरीद-बिक्री पर से प्रतिबंध हट गए हैं। परंतु वास्तविक तौर पर देखा जाए तो इनका आंशिक प्रभाव ही पड़ेगा। क्योंकि ईरान के लिए हथियारों के अधिकांश आपूर्तिकर्ता अपनी प्रतिबंधात्मक हथियार-निर्यात नीतियों को जारी रखेंगे।
बता दें कि ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने 14 अक्तूबर को कहा था कि ईरान अब अपने हथियार किसी भी देश को बेचने में सक्षम हो जाएगा, साथ ही किसी भी देश से हथियार खरीदन सकेगा। उन्होंने कहा कि हम चार साल तक इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ लड़े। जबकि अमेरिका चाहता था कि यह दिन कभी ना आए।
इसके लिए उसने एड़ी चोटी का जोर तक लगाया हुआ था। परंतु हमारे राजनयिकों के प्रयासों के लिए धन्यवाद, जिन्होंने अमेरिका के प्रयासों को विफल कर दिया। ईरानी विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने ट्विटर पर लिखा कि आज का दिन ईरान के लिए दुनिया के साथ रक्षा सहयोग, बहुपक्षवाद और शांति और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक तरह की जीत वाला दिन है।
19 अक्तूबर को ईरानी रक्षा मंत्री आमिर हातमी ने एस-400 प्रणाली, टी-90 टैंक, उन्नत एसयू-57 स्टील्थ फाइटर-जेट और कई मिसाइल प्रणालियों की खरीद पर चर्चा करने के लिए मास्को के लिए उड़ान भरी थी।
हालांकि हातमी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान जितने हथियार खरीदेगा उससे अधिक हथियार बेचने का इरादा रखता है। ईरानी सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि कम समय में अधिक हथियार खरीदने की उसकी कोई योजना नहीं है।
ईरान अब वह सैद्धांतिक रूप से हथियार खरीद सकता है तो सबसे पहले 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले के सैन्य हथियारों की डेटिंग करेगा। इसके साथ ही अपने स्वयं के बनाए गए हथियारों को दूसरे देशों को बेचने पर जोर देगा।
