अमेरिका में राष्ट्रपति पद पर चुनाव के लिए तीन नवंबर को मतदान होना है। इस चुनावी मैदान में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर जो बिडेन को उम्मीदवार बनाया गया है। बहरहाल, सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका में आखिर राष्ट्रपति कैसे चुने जाते हैं? इसकी पूरी प्रकिया क्या है? कब कैसे मतदान होता है? उम्मीदवार को जीतने के लिए कितने वोट की जरूरत होती है? यहां आपके ऐसे ही सवालों के जवाब मौजूद हैं...
US Elections 2020: जानें कैसे होता है अमेरिका में चुनाव और हर सवाल का जवाब
सबसे पहले ये जानिए
साल 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी क्लिंटन को करीब 29 लाख से अधिक लोगों ने वोट किया, फिर भी वो चुनाव हार गईं और डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ट्रंप के पक्ष में इलेक्टोरल कॉलेज रहा। इलेक्टोरल कॉलेज की व्यवस्था अमेरिका के संविधान में है।
इलेक्टोरल कॉलेज के 270 वोट का जादुई अंक काफी अहम है और राष्ट्रपति बनने के लिए इसे हासिल करना जरूरी होता है। अगर इस बार भी यह डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में जाता है तो जो बिडेन के लिए यह बात निराशाजनक होगी। ट्रंप 270 के जादुई अंक तक कई रास्तों से पहुंच सकते हैं।
ऐसा हुआ तो ट्रंप फिर से जीत सकते हैं..
यदि ट्रंप फ्लोरिडा, पेंसिल्वेनिया जीत जाते हैं और उत्तरी कैरोलीना के साथ अरिजोना, जॉर्जिया, ओहायो को भी अपने नियंत्रण में रखते हैं तो उनकी राह 2016 की तरह ही आसान हो जाएगी। लेकिन इस बार कहा जा रहा है कि लड़ाई आसान नहीं है। फ्लोरिडा में 29 इलेक्टोरल वोट हैं और इसे ट्रंप के लिए सबसे मुश्किल बताया जा रहा है। अगर ट्रंप यहां हारते हैं तो दोबारा राष्ट्रपति बनना संभव नहीं होगा।
अमेरिका की कमान डोनाल्ड ट्रंप के पास ही रहेगी या जो बिडेन के पास ये कुछ ही हफ्तों में पता चल जाएगा। लेकिन इस नतीजे तक पहुंचने की प्रक्रिया बेहद थकाऊ और जटिल है। इसके लिए प्रचार अभियान भी बहुत महंगा साबित होता है।
अब जानते हैं अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?
जब अमेरिका राष्ट्रपति का चुनाव करता है तो वह शख्स केवल स्टेट प्रमुख ही नहीं होता बल्कि वह सरकार का भी मुखिया होता है और दुनिया की सबसे बड़ी सेना का कमांडर-इन-चीफ भी होता है। अगर आप भारत के आम चुनाव की तर्ज पर अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव को समझने की कोशिश कर रहे हैं तो गच्चा खा जाएंगे।
भारत में बड़ी पार्टियां जैसे कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी या तो प्रधानमंत्री उम्मीदवार की घोषणा कर देती हैं या चुनावी नतीजे आने के बाद इस पर फैसला होता है। अमेरिका में ठीक इसके उलट है। यहां की दोनों प्रमुख पार्टियां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति उम्मीदवार के चयन को लेकर भी जनता के बीच जाती हैं।
दोनों पार्टियों में उम्मीदवार बनने की चाहत रखने वाले लोग हर स्टेट में प्राइमरी और कॉकस इलेक्शन में हिस्सा लेते हैं। प्राइमरी और कॉकस चुनाव में जो जीतता है वह दोनों पार्टियों की ओर से औपचारिक उम्मीदवार बनता है।
कैसे बना जा सकता है अमेरिका का राष्ट्रपति?
अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए नियम के मुताबिक जन्म से अमेरिका का नागरिक होना होता है। उम्र भी कम से कम 35 साल होनी चाहिए और 14 साल से वहां का निवासी होना चाहिए।
यह बड़े ही साधारण से नियम जान पड़ते हैं, परंतु सच यह है कि 1933 से अब तक अमेरिका का हर राष्ट्रपति एक गवर्नर, सीनेटर या फाइव स्टार सैन्य जनरल रहा है। जैसे ही किसी शख्स के नाम पर उम्मीदवार बनाने को लेकर विचार किया जाता है, वैसे ही उसे मीडिया की खबरों में जगह मिलनी शुरू हो जाती है।
2016 के चुनाव में एक समय तक 10 गवर्नर और पूर्व गवर्नर के अलावा 10 सीनेटर और पूर्व सीनेटर उम्मीदवारी हासिल करने उतरे थे। हालांकि आखिर में दोनों पार्टियों की तरफ से एक-एक उम्मीदवार मैदान में होते हैं।
चुनाव में राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन प्रक्रिया भी सबसे जटिल, लंबी और महंगी मानी जाती है। हर चार साल बाद डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने की चाहत रखने वाले लोग सर्दियों और वसंत ऋतु के दौरान आम चुनाव से पहले सभी राज्यों में प्राइमरी और कॉकस चुनाव का सामना करते हैं।
