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SGPC के नोटिस पर ज्ञानी रघुबीर सिंह की दो टूक: कहा-मेरे सवालों का जवाब दो, नहीं तो सच संगत के सामने रखूंगा

संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 23 Feb 2026 07:36 AM IST
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सार

श्री हरिमंदिर साहिब के मौजूदा मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह ने18 फरवरी को जालंधर में एसजीपीसी में कथित भ्रष्टाचार और जमीनों के सौदों में पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके अगले दिन कार्यकारी बैठक में उन्हें 72 घंटे का नोटिस जारी कर दिया गया।

Giani Raghubir Singh response to SGPC notice
ज्ञानी रघबीर सिंह - फोटो : संवाद
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विस्तार

श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार और श्री हरिमंदिर साहिब के मौजूदा मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से जारी 72 घंटे के नोटिस का लिखित जवाब रविवार को संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया है। 

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उन्होंने साफ कहा कि पहले उनके उठाए गए सवालों का जवाब दिया जाए, अन्यथा वे अंदर की पूरी सच्चाई संगत के सामने सार्वजनिक करेंगे।

ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हमेशा पंथक मर्यादाओं और परंपराओं का पालन किया है। नोटिस के जवाब में उन्होंने अपना पक्ष विस्तार से रखा है और उन्हें विश्वास है कि सच सामने आएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्था के भीतर कथित तौर पर अनियमितताएं हो रही हैं, जिन मुद्दों पर एसजीपीसी प्रधान स्वयं संगत से माफी मांग चुके हैं। ऐसे में सवाल उठाने वालों को नोटिस देना न्यायसंगत नहीं है।

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एसजीपीसी पर लगाए थे गंभीर आरोप

उल्लेखनीय है कि 18 फरवरी को जालंधर में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने एसजीपीसी में कथित भ्रष्टाचार और जमीनों के सौदों में पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके अगले दिन कार्यकारी बैठक में उन्हें 72 घंटे का नोटिस जारी कर दिया गया। ज्ञानी रघुबीर सिंह का कहना है कि उन्हें नोटिस की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली, क्योंकि उस समय वे पंजाब से बाहर थे।


उन्होंने दावा किया कि उनके पास उठाए गए प्रत्येक मुद्दे से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण मौजूद हैं। यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पंथक संस्थाओं की पवित्रता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए है। उन्होंने दोहराया कि यदि एसजीपीसी उनके सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं देती, तो वे सभी तथ्य संगत के समक्ष रखेंगे। साथ ही संगत से अपील की कि भ्रम की स्थिति न बनने दें और धैर्य बनाए रखें।

दोनों पूर्व जत्थेदारों को अकाल तख्त पर तलब किया जाए: ज्ञानी गौहर

तख्त श्री पटना साहिब के पूर्व जत्थेदार और मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रणजीत सिंह गौहर ए मस्कीन ने ज्ञानी रघबीर सिंह और ज्ञानी हरप्रीत सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब पर बुलाकर स्पष्टीकरण लेने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में अकाल तख्त सचिवालय के इंचार्ज को मांग पत्र सौंपा है।

ज्ञानी गौहर ने कहा कि दोनों पूर्व जत्थेदारों की ओर से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर लगाए जा रहे आरोपों से पंथ में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उनके अनुसार, जब दोनों पद पर थे तब उन्हें प्रबंधन में कोई खामी नजर नहीं आई, लेकिन अब वे संस्था के ढांचे पर सवाल उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सिखों की सर्वोच्च प्रबंधकीय संस्था है और उसके अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक बयान देना शोभनीय नहीं है। ज्ञानी गौहर ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान पंथ को विभाजित करते हैं। उन्होंने मांग की कि दोनों को अकाल तख्त पर बुलाकर उनके आरोपों पर जवाब लिया जाए और तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय किया जाए, ताकि पंथ में स्पष्टता बनी रहे और संस्थाओं की गरिमा सुरक्षित रह सके।

पंथ आपका परिवार संभाले और आप विरोधियों की सेवा करें? 

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मांग की कि ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब कर उनसे जवाब लिया जाए। सरना ने कहा कि पंथ आपके परिवार का ख्याल रखे और आप विरोधी पंथ की सेवा करें, यह स्वीकार्य नहीं है।

सरना ने कहा कि शिरोमणि कमेटी में पाठी के रूप में सेवा शुरू करने के बाद संगठन ने उन्हें पंथ में मान-सम्मान दिया और कई अहम जिम्मेदारियां सौंपीं। इसके बावजूद वे अपनी भूमिकाओं को पूरी तरह नहीं निभा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण पंथक मामलों पर निर्णय लेने के बजाय संगठन को कमजोर करने की कोशिश की गई।

सरना ने यह भी आरोप लगाया कि एसजीपीसी पर गंभीर आरोप लगाने के बाद ज्ञानी रघबीर सिंह दिल्ली पहुंच गए और विरोधी खेमे के संपर्क में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वे दिल्ली में किन लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और किन बैठकों में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि यदि आरोप लगाए गए हैं तो उनके समर्थन में सबूत भी पेश किए जाएं। पंथ में भ्रम की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है। सरना ने दोहराया कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई अकाल तख्त पर होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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