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दांव पर बचपन: बॉर्डर पर किशोर बन रहे सस्ते कुरिअर; हथियार-ड्रग्स की डिलीवरी, पंजाब सरकार का प्लान कितना कारगर

मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 18 Feb 2026 06:20 AM IST
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सार

मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हाल ही में उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। बैठक में नशा और हथियार तस्करी पर सख्ती बढ़ाने की रणनीति के साथ-साथ किशोरों को इस जाल से बचाने के उपायों पर भी विचार किया गया।

AAP govt conduct mapping of school dropout students in border districts in Punjab
Child - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

पंजाब के पाकिस्तान सीमा से सटे जिलों में तस्करी का चेहरा और भयावह होता जा रहा है। पुलिस इनपुट के अनुसार तस्कर अब किशोरों और स्कूली बच्चों को चंद रुपयों का लालच देकर नशीले पदार्थों और हथियारों की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल उनका बचपन प्रभावित हो रहा है, बल्कि वे कम उम्र में ही आपराधिक गतिविधियों की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं।

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सूत्रों के मुताबिक अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोजपुर और फाजिल्का के देहाती इलाकों में स्कूल ड्रॉपआउट की दर बढ़ने की चिंता सामने आई है। आशंका जताई जा रही है कि कुछ बच्चे पढ़ाई छोड़कर तस्करों के नेटवर्क में शामिल हो रहे हैं। इस गंभीर इनपुट के बाद राज्य सरकार ने बॉर्डर क्षेत्रों में स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की विस्तृत मैपिंग कराने का फैसला लिया है।
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हाल ही में मुख्यमंत्री और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में नशा और हथियार तस्करी पर सख्ती बढ़ाने की रणनीति के साथ-साथ किशोरों को इस जाल से बचाने के उपायों पर भी विचार किया गया। सरकार ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रॉपआउट विद्यार्थियों के आंकड़े जुटाए जाएं। यह पता लगाया जाएगा कि कितने बच्चों ने स्कूल छोड़ा, किन परिस्थितियों में छोड़ा और वे वर्तमान में क्या कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर अभिभावकों से भी संवाद किया जाएगा।

छोटी उम्र के बच्चों पर संदेह होता है कम

पुलिस के अनुसार तस्कर सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों और हथियारों की खेप की डिलीवरी के लिए किशोरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कम उम्र के कारण उन पर संदेह कम होता है, जिसका फायदा उठाकर गिरोह उन्हें आगे कर देते हैं। रुपयों का लालच और दबाव दोनों ही माध्यम अपनाए जा रहे हैं।


स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने बॉर्डर क्षेत्रों में किशोरों और युवाओं के लिए कॅरिअर काउंसलिंग कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग को इस संबंध में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए और उन्हें तस्करों के जाल में फंसने से रोका जाए।

असामाजिक तत्वों के बहकावे में न आएं

पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने भी किशोरों से अपील की है कि वे असामाजिक तत्वों के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि जो युवा इस दलदल में फंस चुके हैं, वे नजदीकी पुलिस थाने या चौकी में पहुंचकर सरेंडर करें। पुलिस उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए हरसंभव सहायता देगी। सरकार और पुलिस का मानना है कि समय रहते हस्तक्षेप कर इस बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकता है, ताकि सीमावर्ती इलाकों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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