कांग्रेस में अब स्लीपर सैल पर रार: बागियों का उफान संभालना हाईकमान के लिए चुनौती, छह दिन बाद वापस लौटे बघेल
विधायक राणा गुरजीत के घर बघेल की बैठक में चन्नी शक्ति प्रदर्शन करने वाले हैं। यह सूचना बैठक से पहले कांग्रेस के दूसरे धड़े को लग गई थी। यह धड़ा नहीं चाहता था कि अधिकतर नेता चन्नी के समर्थन में पहुंचे।
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रूठों को मनाने आए पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल छह दिन के दौरे के बाद वापस चले गए हैं। नाराज नेताओं के साथ उनकी ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर डिप्लोमेसी बेअसर साबित हुई। बघेल नाराज कांग्रेसियों को एकजुट करने में विफल रहे बल्कि इस सारे प्रकरण में 92 हलकों के नेताओं के साथ शक्ति प्रदर्शन कर बागी नेताओं का गुट मजबूत होकर उभरा।
बघेल बागियों के आश्वस्त कर गए हैं कि वे उनकी बात हाईकमान तक पहुंचा दी जाएगी, ऐसे में अब बागी धड़े को अपनी नाराजगी पर हाईकमान के फैसले या बुलावे का इंतजार है। उधर विधायक परगट सिंह कहते हैं कि हमें उम्मीद है कि हाईकमान नेताओं के मतभेदों को समझते हुए जल्द फैसला लेगा क्योंकि हम पंजाब में जीत के लिए ताकत झोंकने से पहले इस तरह के मतभेदों को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं।
कांग्रेसी भाजपा, आप के संपर्क में
कांग्रेस में कई नेता पंजाब, यूपी और हरियाणा भाजपा व आम आदमी पार्टी के नेताओं के संपर्क में हैं और वे उन्हीं के एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं। यह मसला कई दिनों से पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ था जो कि शनिवार को बघेल की बैठक में उठ गया। पूर्व डिप्टी सीएम एवं सांसद रंधावा ने इस मुद्दे को हवा दी, जिसके बाद सियासत पूरी तरह गरमा गई। प्रदेशाध्यक्ष राजा वड़िंग को सफाई देते हुए यह कहना पड़ा कि रंधावा ठीक कह रहे हैं, उन्हें भी ऐसी सूचना है कि कुछ नेता भाजपा और आप नेताओं के इशारे पर काम कर रहे हैं। इस पर प्रभारी बघेल को भी दावा करना पड़ा कि ऐसे स्लीपर सैल के नेताओं को वे पार्टी में रहने नहीं देंगे। पार्टी सूत्र बताते हैं कि हाईकमान भी पार्टी की काली भेड़ों को चुनाव से पहले चिह्नित कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना चाहता है।
इसलिए बघेल को भेजा विद्रोह थामने
पंजाब कांग्रेस में इस बगावत को शांत करने की जिम्मेदारी प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल को इसलिए दी गई थी क्योंकि चुनावी तैयारी से पहले प्रदेशाध्यक्ष के संदर्भ में हाईकमान ने बघेल के फॉर्मूले पर ही मुहर लगाई थी। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के पंजाब में किए एक सर्वे के बाद यह बात राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन के सामने उठी थी कि चुनाव से पहले प्रदेश नेतृत्व को बदल देना चाहिए। इस पर बघेल ने हाईकमान को साल 2022 का उदाहरण देते हुए ऐसा करने से इन्कार करते हुए सलाह दी थी कि मौजूदा नेतृत्व बदलने के बजाय उसके साथ तीन कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त कर दिए जाए। हाईकमान ने उनकी बात मानकर सूची जारी की, जिसके बाद पंजाब कांग्रेस में बवाल मच गया। इसलिए हाईकमान ने विद्रोह थामने के लिए बघेल को भेजा।
नेता गैरहाजिर रहें, घनघनाए फोन
विधायक राणा गुरजीत के घर बघेल की बैठक में चन्नी शक्ति प्रदर्शन करने वाले हैं। यह सूचना बैठक से पहले कांग्रेस के दूसरे धड़े को लग गई थी। यह धड़ा नहीं चाहता था कि अधिकतर नेता चन्नी के समर्थन में पहुंचे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इसी के चलते एक धड़े के कुछ नेताओं ने चन्नी धड़े के कई नेताओं को फोन कर उन्हें बैठक में ने जाने का आग्रह किया। इसके बावजूद काफी संख्या में नेता बघेल की बैठक में पहुंचकर चन्नी के साथ दिखे।
बघेल की बैठक में प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को नहीं बुलाया गया था क्योंकि एजेंडा उन्हीं के खिलाफ था। बागी गुट के नेता भी उनकी मौजूदगी नहीं चाहते थे। इस पर वड़िंग ने कहा, उन्हें बैठक का कोई न्योता नहीं था, इसलिए वे नहीं गए मगर वे मीटिंग स्थल से कुछ दूरी पर अपनी कार में प्रदेश प्रभारी बघेल का इंतजार करते दिखे। बैठक खत्म कर जैसे ही बघेल बाहर आए, उन्होंने बघेल को अपनी कार में बैठाया और सीधे एयरपोर्ट की ओर निकल गए।
कांग्रेस में दलित नेताओं के साथ भेदभाव : चुघ
कांग्रेस में बगावत के बीच भाजपा नेता व राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ ने भी चुटकी ली। उन्होंने कहा, पंजाब में एकता और संगठन की बात करने से पहले, कांग्रेस को यह साफ करना चाहिए कि क्या पार्टी ने उन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है जिन्होंने अपने ही अनुसूचित जाति के नेताओं के साथ कथित तौर पर भेदभाव किया है। अगर सब ठीक है, तो अलग-अलग गुटों की लगातार मीटिंग और पावर प्ले का क्या कारण है? पंजाब कांग्रेस में हर दिन नई गुटबाजी और लीडरशिप की लड़ाइयां सामने आ रही हैं, जिससे साफ पता चलता है कि पार्टी जनता के मुद्दों से ज्यादा अंदरूनी सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है।
इन नेताओं ने चन्नी संग दिखाई ताकत
बघेल की बैठक में पंजाब के पूर्व सीएम और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के शक्ति प्रदर्शन के दाैरान पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधानसभा के नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू, विधायक परगट सिंह, विधायक तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवा, पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक, नरेश पुरी, विधायक अरुणा चौधरी, विधायक बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया, विधायक हरदेव सिंह लाड़ी शेरोवालिया, विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल, विधायक अवतार सिंह जूनियर, विधायक सुखविंदर सिंह कोटली, पूर्व मंत्री संगत सिंह गिलजियां, इंद्रबीर सिंह बुलारिया, पूर्व विधायक संतोख सिंह भलाईपुर, पूर्व विधायक राजिंदर बेरी, ओबीसी विभाग के चेयरमैन अंगद सिंह सैनी, परमिंदर सिंह पिंकी, सीनियर नेता रमिंदर सिंह आंमला, सीनियर नेता दबिंदर गुबाया, सीनियर नेता कुशलदीप सिंह किक्की ढिल्लों, युकां नेता वरिंदर ढिल्लों, सीनियर नेता गुरप्रीत सिंह कांगड़, बलकौर सिंह मूस्सेवाला, दलबीर सिंह गोल्डी, सीनियर नेता तरसेम सिंह डीसी, करणबीर सिंह बुर्ज और अन्य सीनियर कांग्रेसी नेता मौजूद रहे।
वड़िंग के समर्थन में जीरा बोले- शेर एक ही होता है
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक कुलबीर सिंह जीरा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर पंजाब की सियासत में हलचल तेज कर दी है। जीरा ने अपने पोस्ट में लिखा, जंगल में सियार और दूसरे जानवर चाहे कितने भी हों, लेकिन शेर एक ही होता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर शेर, प्रदेशाध्यक्ष राजा वड़िंग के साथ अपनी फोटो भी पोस्ट की। जीरा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है।
जाखड़ पर बिफरे बघेल और वड़िंग
भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और कभी कांग्रेस के भी प्रदेश प्रधान रहे सुनील जाखड़ ने तंज कसते हुए कहा, वे तो पहले ही कह रहे थे कि कांग्रेस में तो सब कंप्रोमाइज्ड हैं, यह कुर्सी की लड़ाई है। इस पर कांग्रेस नेताओं को पंजाब के कल्याण से कोई सरोकार नहीं है। यहां खेल का नाम ही समझौता है। इस पर कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल और प्रदेशाध्यक्ष राजा वड़िंग ने उन्हें पार्टी का गद्दार कहते हुए इस मसले से दूर रहने की सलाह दी है।