चंडीगढ़ की विरासत: जिस घर में 11 साल रहे पियरे जेनरे, अब आम लोग भी कर सकते हैं ठहराव; जानें एक रात का शुल्क
सुखना लेक के सामने बने हेरिटेज हाउस को अब म्यूजियम-कम-गेस्ट हाउस के रूप में विकसित किया गया है। यहां आम नागरिक भी मामूली शुल्क देकर एक रात ठहर सकते हैं और उस वातावरण का अनुभव कर सकते हैं।
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चंडीगढ़ की पहचान केवल चौड़ी सड़कों, हरियाली और नियोजित सेक्टरों तक सीमित नहीं है। यह शहर अपने विश्वप्रसिद्ध हेरिटेज वास्तुशिल्प के लिए भी जाना जाता है।
अगर आप इस विरासत को केवल देखना ही नहीं बल्कि उसे महसूस भी करना चाहते हैं तो सेक्टर-5 की हेरिटेज कोठी नंबर-57 आपके लिए खास ठिकाना बन सकती है। यही वह ऐतिहासिक आवास है, जहां चंडीगढ़ की रूपरेखा गढ़ने वाले महान वास्तुकार ली कार्बूजिए के कजिन और सहयोगी पियरे जेनरे ने अपने जीवन के 11 महत्वपूर्ण वर्ष बिताए थे।
मामूली शुल्क देकर रूक सकते हैं एक रात
सुखना लेक के सामने बने इस हेरिटेज हाउस को अब म्यूजियम-कम-गेस्ट हाउस के रूप में विकसित किया गया है। यहां आम नागरिक भी मामूली शुल्क देकर एक रात ठहर सकते हैं और उस वातावरण का अनुभव कर सकते हैं, जहां कभी चंडीगढ़ के लेआउट प्लान, प्रतिष्ठित इमारतों और विश्वविख्यात फर्नीचर डिजाइनों की कल्पना आकार लेती थी।
पियरे जेनरे दिसंबर 1954 से अगस्त 1965 तक इस घर में रहे। इस दौरान उन्होंने चंडीगढ़ की वास्तुकला और पहचान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शहर और सुखना झील से उनका लगाव इतना गहरा था कि उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में अस्थियों को सुखना झील में प्रवाहित करने की बात कही थी।
देश-विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद
स्पेन, फ्रांस, अमेरिका, इटली समेत कई देशों से हर साल हजारों पर्यटक इस हेरिटेज हाउस को देखने और यहां ठहरने पहुंचते हैं। विदेशी पर्यटकों के अलावा ट्राइसिटी और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोग भी इस ऐतिहासिक धरोहर में रात बिताने का अनुभव लेने के लिए उत्साहित रहते हैं। म्यूजियम के इंचार्ज प्रभजोत कलेर ने बताया कि हेरिटेज हाउस में कुल तीन कमरे हैं और पर्यटकों की लगातार मांग के कारण ये अधिकांश समय बुक रहते हैं। यहां ठहरने वालों को प्रशासन के पर्यटन विभाग की ओर से कॉम्प्लिमेंट्री ब्रेकफास्ट भी उपलब्ध कराया जाता है।
जानिए कितना है शुल्क
स्टेट गेस्ट या सरकारी अधिकारियों के लिए एक दिन का ठहराव शुल्क एक हजार रुपये निर्धारित है। रिसर्च स्कॉलर, आर्किटेक्ट या वास्तुकला के क्षेत्र में शोध कर रहे लोगों के लिए यह शुल्क 1500 रुपये है। वहीं आम नागरिक अपने परिवार के साथ 2500 रुपये देकर यहां एक रात बिता सकते हैं। इस शुल्क में कॉम्प्लिमेंट्री नाश्ता भी शामिल है।
बगीचे के फलों का भी उठा सकते हैं आनंद
हेरिटेज हाउस की एक और खासियत इसका हरा-भरा बगीचा है। परिसर में अमरूद, लीची, चिक्कू, नाशपाती, जामुन और आम समेत कई फलदार वृक्ष लगे हुए हैं। यहां ठहरने वाले पर्यटक अक्सर पेड़ों से ताजे फल तोड़कर उनका स्वाद लेते हैं, जो उनके अनुभव को और यादगार बना देता है। यदि कोई व्यक्ति केवल इस हेरिटेज हाउस का भ्रमण करना चाहता है तो उसके लिए प्रवेश शुल्क मात्र 10 रुपये है। वहीं घर के भीतर मौजूद हेरिटेज स्वरूप और पियरे जेनरे से जुड़ी यादों को कैमरे में कैद करने के लिए 30 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होता है। म्यूजियम प्रबंधन के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 60 से 70 पर्यटक इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने पहुंचते हैं।