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28 साल बाद न्याय: रेल हादसे में पोती की मौत पर दादा को मुआवजा बरकरार, HC ने कहा-निर्भरता केवल आर्थिक नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 04 Jun 2026 09:30 AM IST
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सार
26 नवंबर 1998 को खन्ना-लुधियाना रेलखंड पर भीषण हादसा हुआ था। इसे देश के सबसे भयावह रेल हादसों में गिना जाता है। इस दुर्घटना में दावेदार की पोती सहित परिवार के कई सदस्य मारे गए थे।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वर्ष 1998 के खन्ना रेल दुर्घटना मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। करीब 28 वर्ष बाद पोती की मौत पर उसके दादा को दिए गए चार लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की निर्भरता का आकलन केवल आर्थिक आधार पर नहीं किया जा सकता। परिवार के भीतर मिलने वाला प्रेम, स्नेह, देखभाल और भावनात्मक सहारा भी निर्भरता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जस्टिस पंकज जैन ने केंद्र सरकार और उत्तरी रेलवे की अपील खारिज कर दी। उन्होंने रेलवे दावा अधिकरण के आदेश को सही ठहराया। 26 नवंबर 1998 को खन्ना-लुधियाना रेलखंड पर भीषण हादसा हुआ था। इसे देश के सबसे भयावह रेल हादसों में गिना जाता है। इस दुर्घटना में दावेदार की पोती सहित परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। कोलकाता जा रही सियालदह एक्सप्रेस पटरी से उतरे अमृतसर जाने वाली ट्रेन के छह डिब्बों से टकरा गई थी। दोनों ट्रेनों में करीब 2500 यात्री सवार थे। हादसे में करीब 212 लोगों की मौत हुई थी।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की निर्भरता का आकलन केवल आर्थिक आधार पर नहीं किया जा सकता। परिवार के भीतर मिलने वाला प्रेम, स्नेह, देखभाल और भावनात्मक सहारा भी निर्भरता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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जस्टिस पंकज जैन ने केंद्र सरकार और उत्तरी रेलवे की अपील खारिज कर दी। उन्होंने रेलवे दावा अधिकरण के आदेश को सही ठहराया। 26 नवंबर 1998 को खन्ना-लुधियाना रेलखंड पर भीषण हादसा हुआ था। इसे देश के सबसे भयावह रेल हादसों में गिना जाता है। इस दुर्घटना में दावेदार की पोती सहित परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। कोलकाता जा रही सियालदह एक्सप्रेस पटरी से उतरे अमृतसर जाने वाली ट्रेन के छह डिब्बों से टकरा गई थी। दोनों ट्रेनों में करीब 2500 यात्री सवार थे। हादसे में करीब 212 लोगों की मौत हुई थी।
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