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बधाई हो बेटा हुआ है: बाद में थमा दी बच्ची... बठिंडा में हरियाणा की महिला की डिलीवरी, अब सच्चाई से उठेगा पर्दा
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब)
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Wed, 07 Jan 2026 04:07 PM IST
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सार
पंजाब के बठिंडा में महिला की डिलीवरी के बाद बच्चा बदलने के आरोप लगा है। महिला की डिलीवरी प्राइवेट अस्पताल में हुई थी। पीड़ित परिवार के आरोपों में कितनी सच्चाई है, इस बात का पता लगाया जा रहा है और जल्द ही सच्चाई से पर्दा उठेगा।
नवजात शिशु, new born baby
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब के बठिंडा में हरियाणा की महिला की डिलीवरी का मामला चर्चा में है। महिला के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनका बच्चा बदला गया है। क्योंकि महिला ने बेटे को जन्म दिया था, लेकिन बाद में उन्हें बच्ची सौंप दी गई। अब सच्चाई का पता लगाने के लिए बच्ची का डीएनए टेस्ट कराया गया है। बच्चा बदलने के गंभीर आरोपों के बीच बठिंडा में ढाई महीने की बच्ची का डीएनए टेस्ट सरकारी डॉक्टरों के बोर्ड की निगरानी में कराया गया है। महिला की डिलीवरी प्राइवेट अस्पताल में हुई थी। निजी अस्पताल की महिला डॉक्टर पर पीड़ित परिवार ने एफआईआर कराई है, जिसके बाद अब बच्ची का डीएनए टेस्ट कराया गया है।
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पीड़ित परिवार का आरोप है कि डिलीवरी के समय उन्हें बेटा होने की जानकारी दी, जबकि बाद में बच्ची सौंप दी गई। अब डीएनए रिपोर्ट से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। पुलिस के अनुसार रिपोर्ट आने में करीब तीन महीने लगेंगे। यह मामला पिछले दो महीनों से चर्चा में है। परिवार निजी अस्पताल पर बच्चा बदलने का आरोप लगा रहा है, जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह केवल डिस्चार्ज स्लिप में हुई एक लिपिकीय त्रुटि है। जांच के लिए अदालत के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की है। हरियाणा के सिरसा जिले के गांव जोगेवाला निवासी शिवराज सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी जीतो कौर को 13 अक्तूबर की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। वह अपनी सास अमरजीत कौर और आशा वर्कर अमरीक कौर के साथ पत्नी को बठिंडा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां से आशा वर्कर उन्हें अपनी जान-पहचान की डॉक्टर आशा गोयल के निजी अस्पताल ले गईं।
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सुबह करीब 7 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर आशा गोयल ने ऑपरेशन की बात कही और सहमति के बाद जीतो कौर को भर्ती कर लिया गया। शिवराज सिंह के अनुसार उन्होंने अस्पताल में 3 हजार रुपये गूगल-पे और 7 हजार रुपये नकद जमा कराए। सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर ने ऑपरेशन थियेटर से बाहर आकर बताया कि बेटा हुआ है और उसकी हालत गंभीर है, इसलिए उसे बच्चों के अस्पताल में भर्ती कराना होगा। इसके बाद बच्चे को एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाया गया। परिवार का कहना है कि उसी दौरान बच्चा बदले जाने का शक पैदा हुआ।
परिवार के मुताबिक, निजी अस्पताल में बच्चे का वजन 2.6 किलोग्राम दर्ज किया गया था, जबकि दूसरे अस्पताल में वही वजन 3.2 किलोग्राम बताया गया। इतना ही नहीं, पहले जहां बच्चे को लड़का बताया गया, वहीं दूसरे अस्पताल के रिकॉर्ड में उसे लड़की दर्ज किया गया। इन विरोधाभासों से परिवार का संदेह और गहरा हो गया।
परिजनों ने पहले सिविल लाइन थाना बठिंडा में शिकायत दर्ज कराई लेकिन कार्रवाई में देरी होने पर अदालत का सहारा लिया। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की जांच कर रहे सिविल लाइन थाना के जांच अधिकारी जसकरण सिंह ने बताया कि डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट करीब तीन महीने बाद आएगी। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब पूरे मामले की सच्चाई डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।