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Chandigarh: सरकारी आवास खाली ना करना पूर्व डीजीपी को पड़ा भारी, प्रशासन ने कार्रवाई कर खाली करवाई कोठी
Sun, 26 Jul 2026 11:23 AM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 26 Jul 2026 11:23 AM IST
सार
पंजाब के पूर्व डीजीपी की कोठी को प्रशासन ने खाली करवाया है। बार-बार नोटिस मिलने के बाद भी पूर्व डीजीपी ने कोठी खाली नहीं की जिसके बाद ये कार्रवाई की गई है।
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एसके अस्थाना, पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
चंडीगढ़ प्रशासन ने शनिवार को सेक्टर-19 की सरकारी कोठी नंबर-3020 को खाली कराकर अपने कब्जे में ले लिया। यह कोठी पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसके अस्थाना के कब्जे में थी। प्रशासन के अनुसार बार-बार नोटिस जारी करने और हाउस अलॉटमेंट कमेटी के निर्देशों के बावजूद सरकारी आवास खाली नहीं किया गया था।
इसके बाद एस्टेट ऑफिस ने नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई की। शनिवार को एस्टेट ऑफिस की टीम पुलिस बल और अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कोठी का कब्जा प्रशासन ने अपने हाथ में ले लिया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
अधिकारियों ने बताया कि पूर्व डीजीपी को समय-समय पर सरकारी आवास खाली करने के निर्देश दिए गए थे। पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद जब आवास खाली नहीं किया गया तो प्रशासन ने सख्त कदम उठाया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी आवासों का आवंटन निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर किया जाता है। पात्रता समाप्त होने या कार्यकाल पूरा होने के बाद निर्धारित अवधि में आवास खाली करना अनिवार्य होता है। तय समय सीमा के बाद भी कब्जा बनाए रखने पर नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई की जाती है।
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इसके बाद एस्टेट ऑफिस ने नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई की। शनिवार को एस्टेट ऑफिस की टीम पुलिस बल और अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कोठी का कब्जा प्रशासन ने अपने हाथ में ले लिया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
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अधिकारियों ने बताया कि पूर्व डीजीपी को समय-समय पर सरकारी आवास खाली करने के निर्देश दिए गए थे। पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद जब आवास खाली नहीं किया गया तो प्रशासन ने सख्त कदम उठाया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी आवासों का आवंटन निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर किया जाता है। पात्रता समाप्त होने या कार्यकाल पूरा होने के बाद निर्धारित अवधि में आवास खाली करना अनिवार्य होता है। तय समय सीमा के बाद भी कब्जा बनाए रखने पर नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई की जाती है।
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