फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Chandigarh-Punjab News ›   High Court denies bail to accused in murder case

पिता के सामने बेटी की हत्या: आरोपी को हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इंकार, साल 2023 का मामला

Wed, 05 Aug 2026 08:57 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Wed, 05 Aug 2026 08:57 PM IST
सार

 78 वर्षीय पिता के सामने उनकी बेटी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। आरोपी पिछले करीब तीन वर्ष से न्यायिक हिरासत में है।

विज्ञापन
High Court denies bail to accused in murder case
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

78 वर्षीय पिता के सामने बेटी की हत्या के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि जांच या अभियोजन पक्ष से कोई चूक हुई है तो उसका लाभ आरोपी को जमानत के रूप में नहीं दिया जा सकता। ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए कि मामले की सुनवाई में तेजी लाकर दो से तीन माह के भीतर पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ की पीठ लुधियाना के फोकल प्वाइंट थाना क्षेत्र में नौ अप्रैल 2023 को हुई बबलजीत कौर की हत्या के मामले में आरोपी हर्षदीप सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। घटना में 78 वर्षीय पिता के सामने उनकी बेटी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। आरोपी पिछले करीब तीन वर्ष से न्यायिक हिरासत में है।
विज्ञापन


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था केवल आरोपी के अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि पीड़ित और उसके परिवार को न्याय दिलाना भी उतना ही जरूरी है। यदि अभियोजन पक्ष से कोई लापरवाही हुई है तो उसका खामियाजा पीड़ित परिवार को नहीं भुगतना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी चूक आरोपी को जमानत देने का आधार नहीं बन सकती।

विज्ञापन
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि घटना के समय मौजूद शिकायतकर्ता की पोती को शुरुआत में गवाह के रूप में शामिल नहीं किया गया। अदालत ने पूछा कि इतने महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी को बाद में पेश करने का कोई ठोस कारण अभियोजन क्यों नहीं बता सका। अदालत ने कहा कि इस तरह की लापरवाही न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती है और जांच एजेंसियों को भविष्य में ऐसी गलतियों से बचना चाहिए।

दो से तीन माह में ट्रायल पूरा करने के निर्देश
पीठ ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सभी लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा किया जाए। यदि अतिरिक्त गवाह को पेश करने की अनुमति दी जाती है तो अभियोजन पक्ष भी उसमें अनावश्यक देरी न करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूरे मुकदमे की सुनवाई अगले दो से तीन माह के भीतर पूरी की जाए।

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालत का दायित्व है कि एक ओर पीड़ित परिवार को समय पर न्याय मिले और दूसरी ओर आरोपी के कानूनी अधिकार भी सुरक्षित रहें। न्याय प्रक्रिया में संतुलन और समयबद्ध सुनवाई ही कानून के शासन की सबसे बड़ी कसौटी है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed