सख्त वीजा नियमों से पंजाब में रिवर्स माइग्रेशन: 2027 के चुनाव पर पड़ेगा असर, घरेलू कॉलेजों में लौटी रौनक
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारें युवाओं में रोजगार और पारदर्शी शासन को लेकर भरोसा जगा पाती हैं, तो इस बार राज्य के मतदान प्रतिशत में बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है।
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कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका के सख्त आव्रजन नियमों के कारण पंजाब के हजारों युवा अब विदेश में पढ़ाई का सपना छोड़कर घरेलू कॉलेजों में लौट रहे हैं। इस रिवर्स माइग्रेशन से राज्य के शिक्षण संस्थानों में रौनक बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का सीधा असर 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा। बड़ी संख्या में पहली बार मतदान करने वाले युवा अब राज्य में ही रहेंगे।
जीएचजी खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल इंदरजीत सिंह और माइग्रेशन विशेषज्ञ प्रगट सिंह ने बताया कि कनाडा के पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट नियमों में सख्ती, ब्रिटेन में पोस्ट-स्टडी वीजा की सीमित अवधि और अमेरिका में अवैध प्रवासियों व कमर्शियल ड्राइवर्स पर शिकंजा कसने से पंजाबी छात्र प्रभावित हुए हैं। कई छात्र गैर-क्रेडिट डिप्लोमा कोर्स में फंसकर वर्क परमिट से वंचित रह गए। इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के समय में हजारों भारतीयों को इन देशों से वापस भेजा गया है। लाखों युवाओं का भविष्य अभी भी अधर में लटका है। एजेंटों की ठगी के कारण परिवारों द्वारा लाखों रुपये का निवेश डूबने की कगार पर है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 18-19 वर्ष के कई युवा विदेश चले जाने के कारण मतदान नहीं कर पाए थे। अब जेन-जी और पहली बार मतदान करने वाले युवा राज्य में ही रहकर पढ़ाई करेंगे।
इस बदलाव के कई फायदे और नुकसान हैं। स्थानीय शिक्षा का स्तर सुधरेगा और एजेंटों की ठगी से बचाव होगा। परिवारों पर कर्ज का बोझ भी घटेगा। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि, विदेश बसने का सपना टूटने से युवाओं में मानसिक तनाव और अवसाद बढ़ रहा है। वर्क परमिट न मिलने से गंभीर आर्थिक संकट भी पैदा हो रहा है।
2027 चुनाव में फर्स्ट टाइम वोटर्स की भूमिका
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारें युवाओं में रोजगार और पारदर्शी शासन को लेकर भरोसा जगा पाती हैं, तो इस बार राज्य के मतदान प्रतिशत में बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है। युवाओं का राज्य में रुकना चुनाव में बेरोजगारी, शिक्षा, उद्योग और नशा मुक्ति जैसे बुनियादी मुद्दों को केंद्र में लाएगा। यह राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी। उन्हें युवाओं को राज्य में रोकने के लिए ठोस नीतियां बनानी होंगी। कई युवा ऑस्ट्रेलिया या खाड़ी देशों का विकल्प भी चुन सकते हैं, जिससे चुनाव पर वास्तविक असर नीतियों पर निर्भर करेगा।
भावनाओं में बहकर निर्णय नहीं लेना चाहिए
विशेषज्ञ सतवंत सिंह तलवंडी, राजेश गर्ग, डिंपल खालसा और करमजीत सिंह ने छात्रों को महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि विदेश जाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट्स से ही मान्यता और वर्क परमिट की पात्रता जांचें। छात्रों को केवल भावनाओं में बहकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें वास्तविक बजट और रोजगार की संभावनाओं को देखकर ही फैसला करना चाहिए। यह उन्हें भविष्य में होने वाली परेशानियों से बचाएगा।