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मृत गवाह के बयान पर हाईकोर्ट सख्त: जांच करने वाले सभी अफसरों का ब्योरा मांगा, हत्या की चार्जशीट में था बयान
Wed, 22 Jul 2026 08:26 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 22 Jul 2026 08:26 AM IST
सार
पुलिस ने चालान में 19 सितंबर 2025 का बयान शामिल किया जबकि संबंधित व्यक्ति की मृत्यु 29 मई 2025 को हो चुकी थी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हत्या के एक मामले में कथित तौर पर मृत व्यक्ति का बयान चार्जशीट में शामिल किए जाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच की जवाबदेही और कड़ी कर दी है।
अदालत ने लुधियाना के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (आईपीएस) रूपिंदर सिंह को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि संबंधित एफआईआर की जांच और उसकी निगरानी किन-किन अधिकारियों ने की।
जस्टिस सुमीत गोयल की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद अतिरिक्त पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह शपथपत्र के साथ उन सभी अधिकारियों के नाम पेश करें जिन्होंने जांच की या उसकी निगरानी की। इससे पहले हाईकोर्ट ने पुलिस को उस गंभीर विसंगति पर फटकार लगाई थी जिसमें चार्जशीट में ऐसे व्यक्ति का बयान शामिल किया गया था जिसकी कथित बयान दर्ज होने की तारीख से कई महीने पहले ही मौत हो चुकी थी। अदालत ने इसे समझ से परे स्थिति बताया था।
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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने चालान में 19 सितंबर 2025 का बयान शामिल किया जबकि संबंधित व्यक्ति की मृत्यु 29 मई 2025 को हो चुकी थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य पुलिस संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहती है तो मामले की आगे की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने पर भी विचार किया जा सकता है। अदालत को यह भी बताया गया कि गंभीर विसंगतियों के बाद लुधियाना पुलिस आयुक्त ने 6 मई को डीआईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया है।
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अदालत ने लुधियाना के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (आईपीएस) रूपिंदर सिंह को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि संबंधित एफआईआर की जांच और उसकी निगरानी किन-किन अधिकारियों ने की।
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जस्टिस सुमीत गोयल की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद अतिरिक्त पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह शपथपत्र के साथ उन सभी अधिकारियों के नाम पेश करें जिन्होंने जांच की या उसकी निगरानी की। इससे पहले हाईकोर्ट ने पुलिस को उस गंभीर विसंगति पर फटकार लगाई थी जिसमें चार्जशीट में ऐसे व्यक्ति का बयान शामिल किया गया था जिसकी कथित बयान दर्ज होने की तारीख से कई महीने पहले ही मौत हो चुकी थी। अदालत ने इसे समझ से परे स्थिति बताया था।
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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने चालान में 19 सितंबर 2025 का बयान शामिल किया जबकि संबंधित व्यक्ति की मृत्यु 29 मई 2025 को हो चुकी थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य पुलिस संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहती है तो मामले की आगे की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने पर भी विचार किया जा सकता है। अदालत को यह भी बताया गया कि गंभीर विसंगतियों के बाद लुधियाना पुलिस आयुक्त ने 6 मई को डीआईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया है।