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कैसे होगा विकास: 200 करोड़ के काम मंजूर तो हुए, ज्यादातर टेंडर-आवंटन में अटके; अब तय होगी जवाबदेही
Wed, 22 Jul 2026 09:19 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 22 Jul 2026 09:19 AM IST
सार
निगम हाउस की चार और वित्त एवं अनुबंध समिति की छह से अधिक बैठकों में 250 से ज्यादा एजेंडा मंजूर किए गए। अकेले 24 जून की वित्त एवं अनुबंध समिति की बैठक में 82 एजेंडा पारित हुए थे।
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मेयर साैरभ जोशी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
चंडीगढ़ नगर निगम में 30 जनवरी से 21 जुलाई के बीच निगम हाउस और वित्त एवं अनुबंध समिति की बैठकों में 200 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई लेकिन इनमें से अधिकतर परियोजनाएं अब भी टेंडर, आवंटन या निर्माण शुरू होने की प्रक्रिया में ही अटकी हैं।
लंबित परियोजनाओं को गति देने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए मेयर सौरभ जोशी ने मंजूर कार्यों की एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) की नियमित समीक्षा शुरू कर दी है।
इस अवधि में निगम हाउस की चार और वित्त एवं अनुबंध समिति की छह से अधिक बैठकें हुईं जिनमें 250 से ज्यादा एजेंडा मंजूर किए गए। अकेले 24 जून की वित्त एवं अनुबंध समिति की बैठक में 82 एजेंडा पारित हुए थे। अधिकांश मंजूर कार्य इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े हैं। नगर निगम के इंजीनियरिंग विंग ने अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों के टेंडर जारी किए हैं। इनमें सड़क, पब्लिक हेल्थ, इलेक्ट्रिकल और हॉर्टिकल्चर से जुड़े कार्य शामिल हैं।
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हालांकि अब तक केवल 40 से 50 छोटे और मध्यम कार्य, जैसे सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, पार्क और स्वच्छता से जुड़े काम पूरे हो सके हैं जबकि 150 से अधिक परियोजनाएं अभी टेंडर, आवंटन या निर्माणाधीन चरण में हैं। सूत्रों के अनुसार निगम में भुगतान में देरी और अन्य प्रशासनिक कारणों से कई परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई है। वहीं, मेयर का कहना है कि नियमित समीक्षा के जरिए लंबित विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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लंबित परियोजनाओं को गति देने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए मेयर सौरभ जोशी ने मंजूर कार्यों की एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) की नियमित समीक्षा शुरू कर दी है।
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इस अवधि में निगम हाउस की चार और वित्त एवं अनुबंध समिति की छह से अधिक बैठकें हुईं जिनमें 250 से ज्यादा एजेंडा मंजूर किए गए। अकेले 24 जून की वित्त एवं अनुबंध समिति की बैठक में 82 एजेंडा पारित हुए थे। अधिकांश मंजूर कार्य इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े हैं। नगर निगम के इंजीनियरिंग विंग ने अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों के टेंडर जारी किए हैं। इनमें सड़क, पब्लिक हेल्थ, इलेक्ट्रिकल और हॉर्टिकल्चर से जुड़े कार्य शामिल हैं।
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हालांकि अब तक केवल 40 से 50 छोटे और मध्यम कार्य, जैसे सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, पार्क और स्वच्छता से जुड़े काम पूरे हो सके हैं जबकि 150 से अधिक परियोजनाएं अभी टेंडर, आवंटन या निर्माणाधीन चरण में हैं। सूत्रों के अनुसार निगम में भुगतान में देरी और अन्य प्रशासनिक कारणों से कई परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई है। वहीं, मेयर का कहना है कि नियमित समीक्षा के जरिए लंबित विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
कागजों में फंसी बड़ीं परियोजनाएं
- 54 करोड़ रुपये की लागत से वी-4, वी-5 और वी-6 सड़कों की रिकार्पेटिंग का कार्य स्वीकृत है लेकिन अब तक केवल करीब 20 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है।
- 28 करोड़ रुपये के पेयजल और सीवरेज अपग्रेडेशन के टेंडर आवंटित हो चुके हैं लेकिन निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है।
- 20 करोड़ रुपये की स्टॉर्म वॉटर ड्रेन अपग्रेडेशन परियोजनाएं अब भी टेंडर प्रक्रिया में हैं।
- 10 करोड़ रुपये की लागत से सार्वजनिक शौचालयों के उन्नयन और टर्शरी वाटर लाइन से जुड़े कार्य लंबित हैं। इनमें हाल ही में 6 करोड़ रुपये का नया टेंडर आवंटित किया गया है।
- 9.39 करोड़ रुपये की लागत वाला सेक्टर-15 ''स्ट्रीट फॉर पीपल'' प्रोजेक्ट भी अभी आगे नहीं बढ़ पाया है।
शहर में विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार पर मेयर सौरभ जोशी ने नगर निगम के इंजीनियरिंग विंग को सख्त संदेश दिया है। सोमवार को करीब पांच घंटे चली समीक्षा बैठक में पहली बार जनरल हाउस और वित्त एवं अनुबंध समिति (फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी) से मंजूर सभी एजेंडों और एस्टीमेट की एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) की बिंदुवार समीक्षा की गई।
पांच महीने से लंबित परियोजनाओं पर नाराजगी जताते हुए मेयर ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सभी स्वीकृत, आवंटित और निर्माणाधीन विकास कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
बैठक में नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय अरोड़ा सहित इंजीनियरिंग विंग के सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विभिन्न सेक्टरों और वार्डों के विकास कार्यों, लंबित टेंडरों, आवंटन की प्रतीक्षा कर रही परियोजनाओं और नई योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
परियोजनाएं फाइलों में अटकीं तो अफसरों को देना होगा जवाब
मेयर ने दो टूक कहा कि जनरल हाउस और वित्त एवं अनुबंध समिति से मंजूरी मिलने के बाद भी यदि परियोजनाएं फाइलों में अटकी रहती हैं तो संबंधित अधिकारियों को जवाब देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सप्ताह में मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर हर परियोजना की स्थिति का आकलन किया जाएगा और जहां अनावश्यक देरी पाई गई, वहां जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में इन विकास कार्यों की भी समीक्षा
बैठक में सड़क, पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज, पार्क, सामुदायिक केंद्र भवन और मार्केट से जुड़े विकास कार्यों की भी समीक्षा हुई। मेयर ने सभी लंबित परियोजनाओं के लिए समयसीमा तय करने, टेंडर और आवंटन प्रक्रिया में तेजी लाने तथा नियमित फील्ड निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही और अनावश्यक देरी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।