Chandigarh: मास्टर प्लान 2031 के आगे थमी लैंड पूलिंग की राह, प्रशासन उपलब्ध भूमि को बता रहा सबसे बड़ी बाधा
शहर के 22 गांवों में लैंड पूलिंग नीति लागू करने की मांग लंबे समय से उठा रहे पार्षद सतिंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि पंजाब कैबिनेट ने नई नीति के तहत प्रति एकड़ भूमि के बदले किसानों को 1,630 वर्ग गज का आवासीय और 210 वर्ग गज का व्यावसायिक प्लॉट देने का फैसला किया है।
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पंजाब सरकार ने लैंड पूलिंग नीति में संशोधन कर किसानों और भूमि मालिकों को मिलने वाले विकसित भूखंड का हिस्सा बढ़ाकर बड़ी राहत दी है। इसके बाद चंडीगढ़ के किसानों की भी उम्मीदें जगी हैं, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन फिलहाल शहर में ऐसी नीति लागू करने के पक्ष में नजर नहीं आ रहा।
प्रशासन का कहना है कि शहर के भविष्य के विकास और मास्टर प्लान के अनुसार उपलब्ध भूमि का उपयोग पहले ही तय किया जा चुका है। ऐसे में लैंड पूलिंग नीति लागू करने की संभावना फिलहाल कम है।
शहर के 22 गांवों में लैंड पूलिंग नीति लागू करने की मांग लंबे समय से उठा रहे पार्षद सतिंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि पंजाब कैबिनेट ने नई नीति के तहत प्रति एकड़ भूमि के बदले किसानों को 1,630 वर्ग गज का आवासीय और 210 वर्ग गज का व्यावसायिक प्लॉट देने का फैसला किया है। इससे किसानों को प्रति एकड़ तीन कनाल से अधिक विकसित भूमि का लाभ मिलेगा और योजनाओं में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। उनका कहना है कि चंडीगढ़ के किसानों और भूमि मालिकों को भी इसी तरह की किसान हितैषी नीति मिलनी चाहिए।
सिद्धू ने बताया कि प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने प्रत्येक गांव से एक-दो प्रतिनिधियों के नाम डीसी को भेजने और लैंड पूलिंग नीति पर विचार के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए थे, ताकि सभी गांवों के प्रतिनिधियों के साथ नीति के मानकों पर चर्चा हो सके। हालांकि अब तक प्रशासन इस संबंध में समिति का गठन नहीं कर पाया है।
उन्होंने कहा कि जिस उपजाऊ कृषि भूमि पर चंडीगढ़ शहर विकसित हुआ, उन्हीं गांवों के किसानों को विकास के लाभों से वंचित रखा गया है। डिरेगुलेशन 2.0 के तहत उद्योगों और संस्थानों को फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने जैसी सुविधाएं मिलीं, लेकिन गांवों के भूमि मालिकों को कोई राहत नहीं दी गई। इसलिए किसान लगातार प्रशासन और केंद्र सरकार से पंजाब की तर्ज पर लैंड पूलिंग नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं।
मास्टर प्लान का हवाला, लैंड पूलिंग पर ब्रेक
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद का कहना है कि चंडीगढ़ की अधिकांश 2,500 एकड़ भूमि का अधिग्रहण पहले ही हो चुका है। शेष भूमि में 700 से 800 एकड़ ग्रीन एरिया के रूप में सुरक्षित रखना अनिवार्य है। इसके अलावा 250 से 300 एकड़ में आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाने हैं, जबकि करीब 700 एकड़ भूमि संस्थानों, चिकित्सा सुविधाओं, व्यावसायिक परियोजनाओं और अन्य सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित है। ऐसे में प्रशासन का मानना है कि मौजूदा मास्टर प्लान के तहत लैंड पूलिंग नीति लागू करने की पर्याप्त संभावना नहीं बनती।
चंडीगढ़ में मास्टर प्लान की वजह से अटकी लैंड पूलिंग
अधिकतर भूमि पहले ही अधिग्रहित
700-800 एकड़ ग्रीन एरिया के लिए आरक्षित
250-300 एकड़ आवासीय विकास के लिए प्रस्तावित
700 एकड़ संस्थानों, मेडिकल और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए निर्धारित
प्रशासन का मानना है कि मास्टर प्लान के कारण लैंड पूलिंग लागू करना फिलहाल संभव नहीं
किसानों की प्रमुख मांगें
पंजाब की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी लैंड पूलिंग नीति लागू हो
गांवों के भूमि मालिकों को विकास में समान भागीदारी मिले
किसानों को विकसित भूमि और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए
विकास और किसानों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने वाली नीति बनाई जाए