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फरारी की तैयारी में था विक्रम वाधवा: चंडीगढ़ पुलिस की छत्रछाया में बना था प्लान, इस देश के रास्ते भागना था

Thu, 06 Aug 2026 04:09 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 06 Aug 2026 04:09 PM IST
सार

बुड़ैल जेल से विक्रम वाधवा को जीएमएसएच-16 में मेडिकल जांच के लिए लाया गया। जांच के बाद उसे सीधे जेल ले जाया जाना था लेकिन ड्यूटी पर तैनात एसआई जगमेहर सिंह और एएसआई सुरेंद्र सिंह उसे निजी कार में सेक्टर-17 के होटल सिटी हार्ट ले गए।

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preparations made to smuggle Vikram Wadhwa out of country while he was in police custody
पुलिस के साथ विक्रम वाधवा - फोटो : संवाद

विस्तार

645 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, हरियाणा सरकार, नगर निगम चंडीगढ़ और क्रेस्ट फंड घोटाले के मुख्य आरोपी विक्रम वाधवा को पुलिस हिरासत से विदेश भगाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। 

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शुरुआती जांच में सामने आया है कि मेडिकल जांच के बहाने जेल से बाहर निकाले गए वाधवा को अस्पताल से सीधे सेक्टर-17 के होटल पहुंचाया गया, जहां उसके दोनों बेटे पहले से मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार फरारी के बाद उसे नेपाल के रास्ते विदेश भेजने की योजना बनाई गई थी और इसके लिए काठमांडू में एक एजेंट से भी संपर्क किया जा चुका था।
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मामले में ड्यूटी पर तैनात एसआई जगमेहर सिंह, एएसआई सुरेंद्र सिंह, विक्रम वाधवा के बेटे करण वाधवा और कुनाल वाधवा को बुधवार को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने चारों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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बीते मंगलवार को बुड़ैल जेल से विक्रम वाधवा को जीएमएसएच-16 में मेडिकल जांच के लिए लाया गया। जांच पूरी होने के बाद उसे सीधे जेल लौटाया जाना था लेकिन ड्यूटी पर तैनात एसआई जगमेहर सिंह और एएसआई सुरेंद्र सिंह उसे सरकारी वाहन से वापस ले जाने के बजाय निजी कार में सेक्टर-17 के होटल सिटी हार्ट ले गए। होटल के कमरे में पहले से उसके बेटे करण और कुनाल मौजूद थे। वहां भोजन की व्यवस्था भी की गई थी और कुछ रिश्तेदारों के पहुंचने की भी सूचना है।

इसी दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की भनक लगी। सूचना मिलते ही डीएसपी पूनम दिलावरी ने रिजर्व इंस्पेक्टर सतिंदर सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ होटल में दबिश दी। पुलिस जब कमरे तक पहुंची तो दोनों पुलिसकर्मी बाहर पहरा देते मिले जबकि विक्रम वाधवा अंदर बेटों के साथ बैठा मिला। इसके बाद होटल से ही विक्रम वाधवा, उसके बेटे करण और कुनाल, एसआई जगमेहर सिंह तथा एएसआई सुरेंद्र सिंह को हिरासत में ले लिया गया।

नेपाल के रास्ते विदेश भागने की थी तैयारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच में सामने आया है कि विक्रम वाधवा की फरारी का पूरा खाका पहले से तैयार था। बेटों ने काठमांडू में मौजूद एक एजेंट से संपर्क किया था ताकि पुलिस हिरासत से निकलने के बाद उसे नेपाल के रास्ते किसी अन्य देश भेजा जा सके। यही कारण माना जा रहा है कि मेडिकल जांच के बाद उसे सीधे जेल ले जाने के बजाय होटल पहुंचाया गया। जांच एजेंसियां अब एजेंट, कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और होटल में हुई मुलाकातों की कड़ियां जोड़ रही हैं।

दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार एसआई जगमेहर सिंह सेवानिवृत्ति के करीब है जबकि एएसआई सुरेंद्र सिंह की भी सेवा अवधि ज्यादा नहीं बची है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या दोनों ने मोटी रकम लेकर आरोपी को भगाने की साजिश में साथ दिया था या फिर किसी बड़े नेटवर्क के निर्देश पर काम कर रहे थे। रिश्वत के एंगल, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

डीजीपी ने बैठाई विभागीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को डीएसपी पूनम दिलावरी और डीएसपी एसपीएस सौंधी से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। जांच का दायरा केवल गिरफ्तार पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रखा गया है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में किसी अन्य पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका तो नहीं थी।

पहले भी सुरक्षा व्यवस्था पर उठ चुके हैं सवाल
विक्रम वाधवा का नाम पहली बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवादों में नहीं आया है। अप्रैल 2026 में अदालत में पेशी के दौरान वह पुलिस हिरासत में मोबाइल फोन पर बात करता कैमरे में कैद हुआ था।

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