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Highcourt: केंद्र के समान डीए बढ़ोतरी लागू करने के लिए हम बाध्यकारी नहीं, पंजाब सरकार का HC में जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 02 Apr 2026 10:22 AM IST
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सार
पंजाब सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) के हलफनामे के माध्यम से अदालत को बताया कि डीए जारी करना राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है, इसे केंद्र सरकार के बराबर लागू करना अनिवार्य नहीं है।
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित महंगाई भत्ते से जुड़े मामले में पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य कैबिनेट केंद्र सरकार के समान दरों पर डीए बढ़ोतरी लागू करने के लिए बाध्य नहीं है।
सरकार ने कहा कि डीए की किस्तें जारी करना राज्य की नीतिगत निर्णय का विषय है जो समय-समय पर राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए लिया जाता है।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि 1 जुलाई 2023 से लागू होने वाली डीए किस्तें राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को अब तक जारी नहीं की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पंजाब में कार्यरत अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को केंद्र के पैटर्न पर समय पर डीए मिल रहा है जबकि राज्य के अन्य कर्मचारी और पेंशनर्स इससे वंचित हैं, जो यह भेदभावपूर्ण व्यवहार है।
पंजाब सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) के हलफनामे के माध्यम से अदालत को बताया कि डीए जारी करना राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है, इसे केंद्र सरकार के बराबर लागू करना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, राज्य ने संभव प्रयास करने की नीति अपनाई है कि डीए को केंद्र के अनुरूप रखा जाए।
सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि 18 फरवरी 2025 को राज्य कैबिनेट की मंजूरी से बकाया भुगतान के लिए एक चरणबद्ध योजना लागू की गई। संशोधित वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन, डीए और लीव एनकैशमेंट सहित कुल वित्तीय बोझ करीब 14,191 करोड़ रुपये बताया गया। यह विवाद लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ा है। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला देती है तो राज्य सरकार पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
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सरकार ने कहा कि डीए की किस्तें जारी करना राज्य की नीतिगत निर्णय का विषय है जो समय-समय पर राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए लिया जाता है।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि 1 जुलाई 2023 से लागू होने वाली डीए किस्तें राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को अब तक जारी नहीं की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पंजाब में कार्यरत अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को केंद्र के पैटर्न पर समय पर डीए मिल रहा है जबकि राज्य के अन्य कर्मचारी और पेंशनर्स इससे वंचित हैं, जो यह भेदभावपूर्ण व्यवहार है।
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पंजाब सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) के हलफनामे के माध्यम से अदालत को बताया कि डीए जारी करना राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है, इसे केंद्र सरकार के बराबर लागू करना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, राज्य ने संभव प्रयास करने की नीति अपनाई है कि डीए को केंद्र के अनुरूप रखा जाए।
सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि 18 फरवरी 2025 को राज्य कैबिनेट की मंजूरी से बकाया भुगतान के लिए एक चरणबद्ध योजना लागू की गई। संशोधित वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन, डीए और लीव एनकैशमेंट सहित कुल वित्तीय बोझ करीब 14,191 करोड़ रुपये बताया गया। यह विवाद लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ा है। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला देती है तो राज्य सरकार पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है।