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पंजाब में एनकाउंटर पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार को नोटिस जारी, डीजीपी गाैरव यादव गुरदासपुर मामले में रखेंगे पक्ष

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 05 Mar 2026 02:57 PM IST
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सार

22 फरवरी को गुरदासपुर में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास आदियां गांव की पुलिस चेक पोस्ट पर एएसआई गुरनाम सिंह और होमगार्ड कांस्टेबल अशोक कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में गांव के ही रणजीत सिंह को एनकाउंटर में मार दिया गया था।

Punjab Haryana High Court on Gurdaspur encounter DGP Gaurav Yadav summoned
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब में पुलिस द्वारा किए जा रहे एनकाउंटर और हिरासत में हुई मौतों के मामले की सीबीआई जांच को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है। एडवोकेट निखिल सराफ ने यह जनहित याचिका दायर की है। याचिका में गुरदासपुर में युवक की पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। मुख्य न्यायधीश पर आधारित खंडपीठ ने इस याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है। 

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गुरदासपुर के आदियां पुलिस चौकी में दो पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी रणजीत सिंह के एनकाउंटर मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने डीजीपी गौरव यादव को मामले में जवाब देने के लिए तलब किया है। वे कुछ देर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।
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इसी दौरान गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल इंटरव्यू से जुड़े मामले की सुनवाई भी अदालत में होगी। हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में अपना जवाब तैयार रखें।

रणजीत सिंह के परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया था। परिवार का कहना है कि अभी तक युवक का अंतिम संस्कार भी नहीं किया गया है। इसी विवाद के बीच हाईकोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया है।

यह दूसरा मौका है जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने किसी चर्चित आपराधिक मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। इससे पहले मोहाली में कबड्डी प्रमोटर राणा बलाचौरिया हत्याकांड में भी अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया था। 

22 फरवरी को गुरदासपुर में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास आदियां गांव की पुलिस चेक पोस्ट पर दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतकों में एएसआई गुरनाम सिंह और होमगार्ड कांस्टेबल अशोक कुमार शामिल थे।

पुलिस के अनुसार यह हमला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर करवाया गया था। आरोप है कि तीन युवकों को करीब 20 हजार रुपये देने का लालच देकर इस वारदात को अंजाम दिलाया गया।
 मामले में मुख्य आरोपी 19 वर्षीय रणजीत सिंह, जो आदियां गांव का रहने वाला था, को 25 फरवरी को पुरानाशाला इलाके में पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया। पुलिस का कहना है कि वह हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था और उसने फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने गोली चलाई।

पुलिस ने दूसरे आरोपी दिलावर सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि तीसरे आरोपी इंदरजीत सिंह को बाद में अमृतसर से पकड़ा गया। हालांकि रणजीत सिंह के एनकाउंटर को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है, जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए पंजाब डीजीपी से जवाब मांगा है।

सुखपाल खैरा ने की सीबीआई जांच की मांग

कांग्रेस नेता सुखपाल खैरा ने कहा कि मैं पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा रणजीत सिंह की एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग पर खुद संज्ञान लेने का स्वागत करता हूं, जिन्होंने आज ही डीजीपी को तलब किया है। यह पिछले कुछ महीनों में भगवंत मान सरकार के तहत पुलिस द्वारा बनाई गई 42वीं फेक एनकाउंटर की कहानी है। हम अपील करते हैं कि हाई कोर्ट की निगरानी में सीबीआई द्वारा समय पर जांच हो ताकि सच्चाई सामने आए और उन सभी दोषी पुलिस अधिकारियों और ताकतवर नेताओं को सज़ा मिले जो लोगों को बेरहमी से मारने के ऐसे गैर-कानूनी आदेश देने में शामिल थे।
 
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