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राजस्थान-पंजाब पानी विवाद: सीएम मान के कोर्ट जाने की बात पर भड़के राजस्थान के मंत्री, कहा- रॉयल्टी मांगना गलत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 21 Mar 2026 10:26 AM IST
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सार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले दिनों राजस्थान सरकार पर पानी की एवज में 1.44 लाख करोड़ रुपये बकाया होने का दावा किया था। उनका कहना था कि यह बकाया वसूला जाएगा या फिर राजस्थान पानी लेना बंद कर दे।

Rajasthan Punjab Water Dispute bhagwant Mann Demand for Royalty
सीएम भगवंत मान - फोटो : X @BhagwantMann
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विस्तार

पानी के एवज में बकाया राशि को लेकर राजस्थान और पंजाब सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। पंजाब सरकार द्वारा राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की मांग को राजस्थान के सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत ने सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ किया कि बकाया उनका हक है और वे इसके लिए कोर्ट जाएंगे।

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पंजाब कोर्ट में लड़ेगा केस

सीएम मान ने तीखे शब्दों में कहा, चोरी पकड़े जाने पर पहले हर कोई विरोध करता है। चोरी करने के बाद चोर कभी नहीं कहता कि उसने चोरी की है, मगर बाद में मान जाता है। उन्होंने कहा कि पंजाब अपने हक के लिए कोर्ट में केस लड़ेगा और राजस्थान जो भी कहना चाहता है, वह कोर्ट में कहे।

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रॉयल्टी देने का सवाल ही नहीं 

राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने पंजाब के दावे को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि पंजाब में चुनाव नजदीक हैं, इसलिए यह मुद्दा उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सतलुज नदी के पानी पर किसी भी तरह की रॉयल्टी देने का सवाल ही नहीं उठता।


मंत्री रावत ने कहा कि सतलुज नदी को लेकर शुरुआती समझौते 1920 के दशक में बीकानेर रियासत और पंजाब के बीच ब्रिटिश शासन के तहत किए गए थे। 1947 के बाद केंद्र सरकार की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच कई दौर की वार्ताएं और समझौते हुए, लेकिन इनमें कहीं भी पानी पर रॉयल्टी का जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना की लागत साझा करनी हो तो वह समझ में आता है, लेकिन पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन पर रॉयल्टी मांगना तर्कसंगत नहीं है।

यह है मामला

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले दिनों राजस्थान सरकार पर पानी की एवज में 1.44 लाख करोड़ रुपये बकाया होने का दावा किया था। उनका कहना था कि यह बकाया वसूला जाएगा या फिर राजस्थान पानी लेना बंद कर दे। सीएम के मुताबिक, पिछली सरकारों ने 1960 के नए सिंधु जलसंधि समझौते में पैसे का जिक्र नहीं किया और 1920 के समझौते को रद्द भी नहीं किया। राजस्थान पानी तो 1920 के समझौते के मुताबिक ले रहा, लेकिन बकाया मांगने पर 1960 के समझौते का सहारा ले लेता है। पंजाब सरकार बकाया लेने के लिए 1920 के समझौते की समीक्षा चाहती है।

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