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पंजाब कांग्रेस में फिर रार: वरिष्ठों को रास नहीं आ रहा हाईकमान का फैसला, चन्नी ने बुलाई समर्थकों की बैठक
Fri, 03 Jul 2026 08:43 AM IST
Nivedita
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 03 Jul 2026 08:43 AM IST
सार
पंजाब में नेतृत्व बदलाव की अटकलों पर विराम लगाते हुए हाईकमान ने तीन कार्यवाहक प्रधानों के फाॅर्मूले के तहत आगे बढ़ने का निर्णय लिया मगर यही फाॅर्मूला सूबे के कुछ अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को पसंद नहीं आया, जिस वजह से वे दबी जुबान में इसका विरोध कर रहे हैं।
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चरणजीत चन्नी ने बुलाई बैठक
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेसियों को चुनावी तैयारियों के लिए गठित की गईं कमेटियों की कमान सौंपी है। हालांकि एकजुट करने का फॉर्मूला कुछ नेताओं को रास नहीं आ रहा है।
अपने ही नेता जहां इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कार्यकताओं में संशय की स्थिति बन गई है। कई नेताओं ने इन नियुक्तियों पर न तो अपनी कोई प्रतिक्रिया दी है और न ही उत्साह दिखाया है बल्कि चुप्पी साध ली है। आला कांग्रेसी नेताओं की यही चुप्पी कार्यकर्ताओं व पार्टी में हलचल की बड़ी वजह बना हुआ है।
कार्यकर्ताओं को अब यह समझ नहीं आ रहा है कि हाईकमान के इन आदेशों के बाद वे क्या करें। अपने-अपने नेताओं के साथ चलें या हाईकमान के द्वारा किए गए बदलावों को सहज स्वीकार कर पार्टी के लिए काम करें। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी इस बात स्वीकार करते हैं कि इस फैसले के बाद कार्यकर्ता व नेताओं के समर्थकों के खेमों में काफी संशय व मायूसी का माहौल है।
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हाईकमान ने काफी कशमकश के बाद पंजाब के वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न कमेटियों की जिम्मेदारियों के दायरे में बांधने का प्रयास किया है। जिससे जातीय समीकरण भी सध जाएं और सभी नेता मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भी एकजुट होकर डट जाएं।
सूबे में नेतृत्व बदलाव की अटकलों पर विराम लगाते हुए हाईकमान ने तीन कार्यवाहक प्रधानों के फाॅर्मूले के तहत आगे बढ़ने का निर्णय लिया मगर यही फाॅर्मूला सूबे के कुछ अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को पसंद नहीं आया, जिस वजह से वे दबी जुबान में इसका विरोध कर रहे हैं।
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अपने ही नेता जहां इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कार्यकताओं में संशय की स्थिति बन गई है। कई नेताओं ने इन नियुक्तियों पर न तो अपनी कोई प्रतिक्रिया दी है और न ही उत्साह दिखाया है बल्कि चुप्पी साध ली है। आला कांग्रेसी नेताओं की यही चुप्पी कार्यकर्ताओं व पार्टी में हलचल की बड़ी वजह बना हुआ है।
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कार्यकर्ताओं को अब यह समझ नहीं आ रहा है कि हाईकमान के इन आदेशों के बाद वे क्या करें। अपने-अपने नेताओं के साथ चलें या हाईकमान के द्वारा किए गए बदलावों को सहज स्वीकार कर पार्टी के लिए काम करें। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी इस बात स्वीकार करते हैं कि इस फैसले के बाद कार्यकर्ता व नेताओं के समर्थकों के खेमों में काफी संशय व मायूसी का माहौल है।
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हाईकमान ने काफी कशमकश के बाद पंजाब के वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न कमेटियों की जिम्मेदारियों के दायरे में बांधने का प्रयास किया है। जिससे जातीय समीकरण भी सध जाएं और सभी नेता मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भी एकजुट होकर डट जाएं।
सूबे में नेतृत्व बदलाव की अटकलों पर विराम लगाते हुए हाईकमान ने तीन कार्यवाहक प्रधानों के फाॅर्मूले के तहत आगे बढ़ने का निर्णय लिया मगर यही फाॅर्मूला सूबे के कुछ अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को पसंद नहीं आया, जिस वजह से वे दबी जुबान में इसका विरोध कर रहे हैं।