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Highcourt: चेक बाउंस मामले में अहम फैसला, सिक्योरिटी चेक कह देने से जिम्मेदारी से नहीं बच सकता आरोपी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:19 AM IST
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सार
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति हस्ताक्षर किया हुआ खाली चेक किसी को सौंपता है तो यह माना जाएगा कि उसने सामने वाले को विवरण भरने की अनुमति दी थी। बाद में केवल यह कहना कि चेक में राशि या अन्य विवरण उसके द्वारा नहीं भरे गए, पर्याप्त बचाव नहीं है।
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि केवल यह दावा करने से कि विवादित चेक खाली या सिक्योरिटी चेक था, आरोपी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी चेक पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार करता है तो कानून यह मानकर चलता है कि चेक किसी वैध देनदारी या भुगतान के लिए जारी किया गया था।
जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने इस मामले में अहम टिप्पणी की कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 118 और 139 के तहत शिकायतकर्ता के पक्ष में एक कानूनी अनुमान मौजूद होता है। ऐसे में आरोपी को ठोस साक्ष्यों के जरिये यह साबित करना होगा कि वास्तव में कोई देनदारी नहीं थी। उसे यह भी सिद्ध करना होगा कि चेक का गलत इस्तेमाल किया गया था।
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लुधियाना के एक मामले में आरोपी ने अदालत में दलील दी थी कि उसने चेक केवल सुरक्षा के तौर पर दिया था। उसका दावा था कि चेक का दुरुपयोग किया गया। हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपी अपने इस दावे के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी चेक पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार करता है तो कानून यह मानकर चलता है कि चेक किसी वैध देनदारी या भुगतान के लिए जारी किया गया था।
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जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने इस मामले में अहम टिप्पणी की कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 118 और 139 के तहत शिकायतकर्ता के पक्ष में एक कानूनी अनुमान मौजूद होता है। ऐसे में आरोपी को ठोस साक्ष्यों के जरिये यह साबित करना होगा कि वास्तव में कोई देनदारी नहीं थी। उसे यह भी सिद्ध करना होगा कि चेक का गलत इस्तेमाल किया गया था।
लुधियाना के एक मामले में आरोपी ने अदालत में दलील दी थी कि उसने चेक केवल सुरक्षा के तौर पर दिया था। उसका दावा था कि चेक का दुरुपयोग किया गया। हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपी अपने इस दावे के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका।