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सरकारी डॉक्टर बर्खास्त: एमएस, एसएमओ सहित तीन चिकित्सक सस्पेंड, जालंधर में ऑक्सीजन की कमी से हुई थी तीन मौतें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Wed, 30 Jul 2025 04:30 PM IST
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सार
जालंधर सिविल अस्पताल में रविवार रात को ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से ट्रामा सेंटर में भर्ती अर्चना (15), अवतार लाल (32) और राजू (30) की मौत हो गई थी।
जालंधर सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में हादसा
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पंजाब के जालंधर सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से तीन मरीजों की मौत के मामले में मान सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में सिविल अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही सामने आने पर पंजाब सरकार ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राज कुमार, एसएमओ डॉ. सुरजीत सिंह और डॉ. सोनाक्षी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसी तरह हाउस सर्जन डॉक्टर शमिंदर सिंह को नौकरी बर्खास्त किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने कहा कि अगर विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर यदि दोष साबित हुआ तो निलंबित चिकित्सक अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। साथ ही इनके नौकरी के सभी लाभ भी नहीं दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर तीन डॉक्टरों को जवाब के लिए तलब किया जाएगा, ताकि फाइनल रिपोर्ट में आगे की कार्रवाई की जाए। अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं थी, लेकिन बावजूद इसके ऑक्सीजन कमी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही है, जिस कारण यह कार्रवाई की गई है।
जालंधर सिविल अस्पताल में रविवार रात को ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से ट्रामा सेंटर में भर्ती अर्चना (15), अवतार लाल (32) और राजू (30) की मौत हो गई थी। अर्चना को 17 जुलाई को सांप के काटने के बाद भर्ती किया गया था, अवतार लाल को 27 जुलाई को नशे की ओवरडोज के चलते और राजू को 24 जुलाई को टीबी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।
टेक्निकल स्टाफ की रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सीजन प्लांट बंद होने पर जब प्रेशर कम हुआ तो मरीजों के बेड पर लगे सेंसर की आवाज ही नहीं आई। सेंसर फेल होने की वजह से ऑक्सीजन लेवल कम होने की जानकारी ही नहीं मिल पाई तीन मरीजों की मौत हो गई। ट्रॉमा सेंटर में भर्ती अन्य दो मरीजों की हालत भी गंभीर बन गई थी लेकिन उन्हें बचा लिया गया।
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स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने कहा कि अगर विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर यदि दोष साबित हुआ तो निलंबित चिकित्सक अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। साथ ही इनके नौकरी के सभी लाभ भी नहीं दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर तीन डॉक्टरों को जवाब के लिए तलब किया जाएगा, ताकि फाइनल रिपोर्ट में आगे की कार्रवाई की जाए। अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं थी, लेकिन बावजूद इसके ऑक्सीजन कमी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही है, जिस कारण यह कार्रवाई की गई है।
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जालंधर सिविल अस्पताल में रविवार रात को ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से ट्रामा सेंटर में भर्ती अर्चना (15), अवतार लाल (32) और राजू (30) की मौत हो गई थी। अर्चना को 17 जुलाई को सांप के काटने के बाद भर्ती किया गया था, अवतार लाल को 27 जुलाई को नशे की ओवरडोज के चलते और राजू को 24 जुलाई को टीबी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।
टेक्निकल स्टाफ की रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सीजन प्लांट बंद होने पर जब प्रेशर कम हुआ तो मरीजों के बेड पर लगे सेंसर की आवाज ही नहीं आई। सेंसर फेल होने की वजह से ऑक्सीजन लेवल कम होने की जानकारी ही नहीं मिल पाई तीन मरीजों की मौत हो गई। ट्रॉमा सेंटर में भर्ती अन्य दो मरीजों की हालत भी गंभीर बन गई थी लेकिन उन्हें बचा लिया गया।