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अद्भुत संयोग: आज एक साथ हो रहा मां पार्वती, भगवान भोलेनाथ और विघ्नहर्ता गणेश का पूजन, 70 साल बाद ऐसा संयोग
Mon, 14 Sep 2026 10:57 AM IST
Nivedita
नीरज कुमार, संवाद, चंडीगढ़
नीरज कुमार, संवाद, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 14 Sep 2026 10:57 AM IST
सार
गणेश चतुर्थी पर स्वाति नक्षत्र, सोमवार, चतुर्थी तिथि, ब्रह्म योग और रवि सिद्धि योग के संयोग से महाजयंती योग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूजन से दांपत्य सुख, विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
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कालीबाड़ी से गणपति की मूर्ति ले जाते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आज का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। करीब 70 वर्षों बाद हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन हैं। यानी आज मां पार्वती, भगवान शिव और उनके पुत्र भगवान गणेश की पूजा एक साथ होगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार स्वाति नक्षत्र, सोमवार, चतुर्थी तिथि, ब्रह्म योग और रवि सिद्धि योग के संयोग से महाजयंती योग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूजन से दांपत्य सुख, विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
सुबह 7:07 बजे शुरू हुई चतुर्थी तिथि
सेक्टर-30 के ज्योतिषी एवं कर्मकांडी पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि 14 सितंबर को सुबह 7:07 बजे तृतीया तिथि समाप्त होकर चतुर्थी शुरू हो गई। 15 सितंबर को सुबह 7:45 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त होगी। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार तृतीया के बाद सायंकाल में चतुर्थी होने पर उसी दिन हरतालिका व्रत किया जाता है।
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सुहागिनों के लिए अखंड सौभाग्य, कन्याओं को मनचाहे वर की कामना
हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं का प्रमुख व्रत है। महिलाएं पति की दीर्घायु, आरोग्य और सुखी दांपत्य की कामना से मां पार्वती और भगवान शिव का पूजन करती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। मान्यता है कि मां पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए यह व्रत किया था। श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि महाजयंती योग में गौरी पूजन करने से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होने की मान्यता है। विशेष रूप से अविवाहित कन्याओं के लिए यह संयोग शुभ माना गया है।
गणेश पूजन से सुख-समृद्धि की कामना
14 सितंबर को गणेश चतुर्थी भी मनाई जा रही है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और सभी सिद्धियों का दाता माना गया है। गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल में पूजन की परंपरा है। आज पूजन का शुभ समय सुबह 11:45 बजे के बाद बताया गया है। भगवान गणेश को मोदक का भोग अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है।
शाम 6:35 बजे से हरतालिका पूजन
पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार हरतालिका पूजन के लिए प्रदोष काल और गोधूलि बेला विशेष शुभ मानी जाती है। इस दिन शाम 6:35 बजे से पूजन किया जा सकता है। शाम 7:26 बजे से भद्रा शुरू होगी। उन्होंने बताया कि तुला राशि में होने के कारण यह भद्रा पाताल लोक में मानी जाती है और धार्मिक पूजन को लेकर विशेष दोष नहीं माना जाता।
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार स्वाति नक्षत्र, सोमवार, चतुर्थी तिथि, ब्रह्म योग और रवि सिद्धि योग के संयोग से महाजयंती योग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूजन से दांपत्य सुख, विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
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सुबह 7:07 बजे शुरू हुई चतुर्थी तिथि
सेक्टर-30 के ज्योतिषी एवं कर्मकांडी पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि 14 सितंबर को सुबह 7:07 बजे तृतीया तिथि समाप्त होकर चतुर्थी शुरू हो गई। 15 सितंबर को सुबह 7:45 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त होगी। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार तृतीया के बाद सायंकाल में चतुर्थी होने पर उसी दिन हरतालिका व्रत किया जाता है।
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सुहागिनों के लिए अखंड सौभाग्य, कन्याओं को मनचाहे वर की कामना
हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं का प्रमुख व्रत है। महिलाएं पति की दीर्घायु, आरोग्य और सुखी दांपत्य की कामना से मां पार्वती और भगवान शिव का पूजन करती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। मान्यता है कि मां पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए यह व्रत किया था। श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि महाजयंती योग में गौरी पूजन करने से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होने की मान्यता है। विशेष रूप से अविवाहित कन्याओं के लिए यह संयोग शुभ माना गया है।
गणेश पूजन से सुख-समृद्धि की कामना
14 सितंबर को गणेश चतुर्थी भी मनाई जा रही है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और सभी सिद्धियों का दाता माना गया है। गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल में पूजन की परंपरा है। आज पूजन का शुभ समय सुबह 11:45 बजे के बाद बताया गया है। भगवान गणेश को मोदक का भोग अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है।
शाम 6:35 बजे से हरतालिका पूजन
पंडित वीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार हरतालिका पूजन के लिए प्रदोष काल और गोधूलि बेला विशेष शुभ मानी जाती है। इस दिन शाम 6:35 बजे से पूजन किया जा सकता है। शाम 7:26 बजे से भद्रा शुरू होगी। उन्होंने बताया कि तुला राशि में होने के कारण यह भद्रा पाताल लोक में मानी जाती है और धार्मिक पूजन को लेकर विशेष दोष नहीं माना जाता।