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पंजाब में सड़कों पर पैदल चलना खतरनाक: रोज 2 मौतें, तीन साल में 22% उछाल, अब सरकार को याद आए फुटपाथ
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 20 Mar 2026 04:05 PM IST
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सार
पंजाब में अधिकतर सड़कों पर पैदल चलने के लिए सुरक्षित फुटपाथ उपलब्ध नहीं हैं। जहां फुटपाथ बने भी हैं, वहां अतिक्रमण के कारण उनका उपयोग नहीं हो पाता। ऐसे में लोगों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे हादसों का जोखिम बढ़ जाता है।
पंजाब में सड़क हादसे
- फोटो : FreePik
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विस्तार
पंजाब की सड़कों पर पैदल चलना लगातार खतरनाक होता जा रहा है। हालात यह हैं कि प्रदेश में औसतन रोज दो पैदल यात्रियों की सड़क हादसों में मौत हो रही है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले तीन वर्षों में पैदल यात्रियों की मौतों की दर में 22 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़े राज्य में पैदल चलने के लिए सुरक्षित ढांचागत सुविधाओं की कमी को उजागर करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में 608 पैदल यात्रियों की हादसों में मौत हुई थी, जो 2023 में बढ़कर 716 हो गई। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 746 तक पहुंच गया।
लगातार बढ़ती यह संख्या संकेत देती है कि सड़क सुरक्षा उपायों में गंभीर खामियां बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों के डिजाइन में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता न देना और फुटपाथों का अभाव इन हादसों का बड़ा कारण है।
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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले तीन वर्षों में पैदल यात्रियों की मौतों की दर में 22 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़े राज्य में पैदल चलने के लिए सुरक्षित ढांचागत सुविधाओं की कमी को उजागर करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में 608 पैदल यात्रियों की हादसों में मौत हुई थी, जो 2023 में बढ़कर 716 हो गई। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 746 तक पहुंच गया।
लगातार बढ़ती यह संख्या संकेत देती है कि सड़क सुरक्षा उपायों में गंभीर खामियां बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों के डिजाइन में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता न देना और फुटपाथों का अभाव इन हादसों का बड़ा कारण है।
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सुरक्षित फुटपाथ उपलब्ध नहीं
प्रदेश में अधिकतर सड़कों पर पैदल चलने के लिए सुरक्षित फुटपाथ उपलब्ध नहीं हैं। जहां फुटपाथ बने भी हैं, वहां अतिक्रमण के कारण उनका उपयोग नहीं हो पाता। ऐसे में लोगों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे हादसों का जोखिम बढ़ जाता है। अराइव सेफ संस्था के प्रधान हरमन सिद्धू का कहना है कि सरकार को पहले अतिक्रमण हटाने और सभी प्रमुख सड़कों पर पैदल पथ विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।चार प्रमुख शहरों में बेहतर होंगे सड़कों के ढांचे
हादसों को देखते हुए पंजाब सरकार अब सक्रिय हुई है। राज्य के चार प्रमुख शहरों—लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और मोहाली—में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सड़कें विकसित करने की योजना बनाई गई है। इन परियोजनाओं के तहत न केवल सड़क ढांचे को बेहतर किया जाएगा, बल्कि पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए अलग से सुरक्षित ट्रैक भी बनाए जाएंगे।ब्लैक स्पाॅट की पहचान कर होंगे सुधार
योजना के अनुसार प्रमुख मार्गों को अंदरूनी सड़कों से व्यवस्थित तरीके से जोड़ा जाएगा और एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स को वैज्ञानिक ढंग से डिजाइन किया जाएगा। साथ ही ब्लैक स्पॉट की पहचान कर सुधार, पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करना और चौराहों पर यातायात प्रबंधन को मजबूत करना भी शामिल है। मोहाली और लुधियाना से इस पहल की शुरुआत की जा रही है।तमिलनाडु में सबसे ज्यादा माैत
पड़ोसी राज्यों की स्थिति भी चिंताजनक है। हरियाणा में वर्ष 2024 में 866 पैदल यात्रियों की मौत हुई, हालांकि यह 2023 के मुकाबले कम है। वहीं तमिलनाडु में सबसे अधिक 4712 मौतें दर्ज की गईं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।पंजाब में अधिकतर सड़कों पर लोगों के चलने के लिए उचित पैदल रास्ते नहीं हैं क्योंकि सड़कों को सिर्फ पैदल यात्रियों को अनुकूल नहीं बनाया जा रहा है। जिन सड़कों पर फुटपाथ बने भी हुए हैं उन पर लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है जिस कारण लोग सड़कों पर चलने के लिए मजबूर होते हैं। पहले तो सरकार को सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाना चाहिए और दूसरा सभी सड़कों पर पैदल पथ बनाए जाने चाहिए। -हरमन सिद्धू, प्रधान, अराइव सेफ