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Jalandhar News: माॅस्को में फंसा मोगा का युवक युद्ध के मैदान में जख्मी
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
Updated Sat, 27 Sep 2025 06:27 PM IST
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सार
मोगा जिले के बूटा सिंह को रूसी सेना ने धोखे से रूस-यूक्रेन युद्ध में भेज दिया। ग्रेनेड हमले में सभी भारतीय युवक मारे गए, लेकिन बूटा सिंह घायल अवस्था में बच निकला। परिवार ने भारत सरकार से उसकी वापसी की अपील की है।
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विस्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
मोगा। मोगा जिले के गांव चक कनियां कलां का 25 वर्षीय युवक बूटा सिंह पिछले साल स्टूडेंट वीजा पर रूस के माॅस्को गया था। रूसी सेना ने उसे वहां धोखे से युद्ध के मैदान में भेज दिया।
बूटा सिंह के साथ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के 14 अन्य युवक भी थे। सभी युवकों को पैसों का लालच देकर बिना किसी सैन्य प्रशिक्षण के ही सेना में भर्ती कर लिया गया। बूटा सिंह 24 अक्तूबर 2024 को भारत से मास्को गया था। 18 अगस्त को उसे रूसी फौज ने पकड़ कर सेना के कैंप में बंदी बना लिया। कुछ दिन पहले सभी युवकों को रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में भेज दिया गया। इसी दौरान ग्रेनेड हमले में सभी युवक अपनी जान गंवा बैठे, जबकि बूटा सिंह किसी तरह 6 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। फिलहाल बूटा सिंह रूसी सेना के अस्पताल में भर्ती है। उसने शुक्रवार को वीडियो कॉल के जरिये अपने परिवार से बात कर पूरी घटना की जानकारी दी।
बूटा सिंह ने अपने परिवार के साथ वीडियो कॉल पर बताया कि रूसी सेना ने 10 दिन की मामूली ट्रेनिंग के बाद उन्हें युद्ध के मैदान में भेज दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें 20 लाख रुपये और रूस की पक्के नागरिकता दी जाएगी। एक कांट्रेक्ट पर जबरदस्ती साइन भी करवा लिया। पहले कहा कि उन्हें बंकर बनाने का काम करना होगा लेकिन मौके पर बंदूकें थमा दी गईं। 18 अगस्त को उसे सेना ने पकड़कर कैंप में बंदी बना लिया और कुछ दिन पहले 15 अन्य भारतीय युवकों के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध में भेज दिया।
युद्ध के दौरान ड्रोन से हुए ग्रेनेड हमले में उसके साथ गए सभी युवक मारे गए जबकि वह घायल अवस्था में 6-7 किलोमीटर पैदल चलकर किसी तरह बच निकला। वह रूसी सेना के अस्पताल में भर्ती है। वीडियो कॉल में बूटा सिंह ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा, हमें जल्द भारत वापस लाया जाए, नहीं तो हमें दोबारा युद्ध के मैदान में भेज दिया जाएगा। यहां न खाने को पर्याप्त भोजन मिल रहा है और न ही सुरक्षा की कोई गारंटी है।
युवक की माता परमजीत कौर ने कहा कि उनका परिवार गरीबी से जूझ रहा है, इसलिए ही उन्होंने अपने बेटे को एक साल पहले विदेश भेजा था। बेटे से बात होने के बाद परिवार बेहद सदमे में है। उन्होंने कहा कि पहले हमारा बेटा हमारे संपर्क में नहीं था, सिर्फ वॉयस मैसेज भेजते थे पर अब वीडियो काॅल पर बात हुई है, अब उसका पता चल गया है कि वह कहां है। उसकी हालत बहुत खराब है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि उसे भारत वापस लाया जाए।
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मोगा। मोगा जिले के गांव चक कनियां कलां का 25 वर्षीय युवक बूटा सिंह पिछले साल स्टूडेंट वीजा पर रूस के माॅस्को गया था। रूसी सेना ने उसे वहां धोखे से युद्ध के मैदान में भेज दिया।
बूटा सिंह के साथ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के 14 अन्य युवक भी थे। सभी युवकों को पैसों का लालच देकर बिना किसी सैन्य प्रशिक्षण के ही सेना में भर्ती कर लिया गया। बूटा सिंह 24 अक्तूबर 2024 को भारत से मास्को गया था। 18 अगस्त को उसे रूसी फौज ने पकड़ कर सेना के कैंप में बंदी बना लिया। कुछ दिन पहले सभी युवकों को रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में भेज दिया गया। इसी दौरान ग्रेनेड हमले में सभी युवक अपनी जान गंवा बैठे, जबकि बूटा सिंह किसी तरह 6 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। फिलहाल बूटा सिंह रूसी सेना के अस्पताल में भर्ती है। उसने शुक्रवार को वीडियो कॉल के जरिये अपने परिवार से बात कर पूरी घटना की जानकारी दी।
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बूटा सिंह ने अपने परिवार के साथ वीडियो कॉल पर बताया कि रूसी सेना ने 10 दिन की मामूली ट्रेनिंग के बाद उन्हें युद्ध के मैदान में भेज दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें 20 लाख रुपये और रूस की पक्के नागरिकता दी जाएगी। एक कांट्रेक्ट पर जबरदस्ती साइन भी करवा लिया। पहले कहा कि उन्हें बंकर बनाने का काम करना होगा लेकिन मौके पर बंदूकें थमा दी गईं। 18 अगस्त को उसे सेना ने पकड़कर कैंप में बंदी बना लिया और कुछ दिन पहले 15 अन्य भारतीय युवकों के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध में भेज दिया।
युद्ध के दौरान ड्रोन से हुए ग्रेनेड हमले में उसके साथ गए सभी युवक मारे गए जबकि वह घायल अवस्था में 6-7 किलोमीटर पैदल चलकर किसी तरह बच निकला। वह रूसी सेना के अस्पताल में भर्ती है। वीडियो कॉल में बूटा सिंह ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा, हमें जल्द भारत वापस लाया जाए, नहीं तो हमें दोबारा युद्ध के मैदान में भेज दिया जाएगा। यहां न खाने को पर्याप्त भोजन मिल रहा है और न ही सुरक्षा की कोई गारंटी है।
युवक की माता परमजीत कौर ने कहा कि उनका परिवार गरीबी से जूझ रहा है, इसलिए ही उन्होंने अपने बेटे को एक साल पहले विदेश भेजा था। बेटे से बात होने के बाद परिवार बेहद सदमे में है। उन्होंने कहा कि पहले हमारा बेटा हमारे संपर्क में नहीं था, सिर्फ वॉयस मैसेज भेजते थे पर अब वीडियो काॅल पर बात हुई है, अब उसका पता चल गया है कि वह कहां है। उसकी हालत बहुत खराब है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि उसे भारत वापस लाया जाए।
