डाॅक्टरी से UPSC तक: काैन हैं बंगाल चुनाव में ‘सिंघम’ अंदाज दिखाने वाले IPS अजयपाल शर्मा, पंजाब से है नाता
उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा पंजाब के लुधियाना में पले बढ़े हैं। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। अजयपाल ने बीडीएस करने के बाद यूपीएससी पास की थी।
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अगर किसी ने बदमाशी की तो उसका कायदे से इलाज होगा…” पश्चिम बंगाल में यह सख्त चेतावनी देने वाले उत्तर प्रदेश काडर के आईपीएस अफसर अजय पाल शर्मा इन दिनों चर्चा में हैं।
लुधियाना में पले-बढ़े इस अधिकारी का अंदाज पश्चिमी बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान देखने को मिला, जब वे पुलिस ऑब्जर्वर बनकर मैदान में उतरे।
दक्षिण 24 परगना के फलता क्षेत्र में मतदाताओं को धमकाने और चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने की शिकायतें मिल रही थीं। ऐसे में अजय पाल शर्मा खुद सीआरपीएफ के साथ मौके पर पहुंचे और आरोपों के घेरे में आए उम्मीदवार जहांगीर खान के इलाके में जाकर सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी ने लोगों को डराने या परेशान करने की कोशिश की, तो “खबर भी अच्छी ली जाएगी।
सरकारी स्कूल में टीचर थे पिता
अजय पाल शर्मा की कहानी सिर्फ एक सख्त अफसर की नहीं, बल्कि एक बेटे के जज्बे की भी है। उनके पिता अमरजीत शर्मा सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और चाहते थे कि उनका बेटा सिविल सेवा में जाएं। अजय पाल ने पहले बीडीएस कर डेंटिस्ट की राह चुनी, लेकिन पिता इससे खुश नहीं थे। वे चाहते थे कि बेटा सिविल सर्विस में जाकर अपनी पहचान बनाए और देश का नाम रोशन करे। बेटे ने उनकी नाराजगी को चुनौती में बदला और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। मेहनत रंग लाई और वे आईपीएस बन गए।
छोटा भाई आईएएस
दिलचस्प बात यह है कि उनके छोटे भाई अमितपाल शर्मा ने भी बाद में यूपीएससी पास कर आईएएस का पद हासिल किया। दोनों भाइयों को उत्तर प्रदेश कैडर मिला।
विकास नगर में रहता है परिवार
अजय पाल शर्मा लुधियाना में पले बढ़े हैं। उनका परिवार शहर के विकास नगर इलाके में रहता है। वह पढ़ाई में तेज एवं अनुशासित रहे हैं। यहां के लोग उनको सादगी एवं मेहनत की मिसाल मानते हैं।
शर्मा ने शुरुआती शिक्षा आरएस माॅडल स्कूल से हुई, जो पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबंधित है। उनके छोटे भाई अमित पाल शर्मा भी आईएएस हैं और दोनों ने पहले डाक्टरी की पढ़ाई की है, उसके बाद वे सिविल सर्विसेज में आए। हाल ही में प्रयागराज में दोनों भाईयों की इकट्ठे तैनाती को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।
उनके पिता अमरजीत शर्मा जरूरमंद विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए पहचान रखते हैं। स्थानीय निवासी एवं दुर्गा माता मंदिर के प्रधान प्रदीप ढल्ल का कहना है कि दोनों भाईयों का लक्ष्य केवल बेहतर शिक्षा हासिल करके जीवन में अपना एवं अपने परिवार का नाम रोशन करना रहा। उनकी मां प्रेम शर्मा का भी परिवार को संभालने एवं बच्चों को मजबूत संस्कार देने में अहम रोल रहा।
‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की पहचान
अजय पाल शर्मा को उनकी बेखौफ कार्यशैली के कारण ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ कहा जाता है। बताया जाता है कि उन्होंने अपने करियर में 500 से ज्यादा पुलिस एक्शन (एनकाउंटर और गिरफ्तारियां) का नेतृत्व किया है।
जौनपुर में एसपी रहते हुए उन्होंने 22 महीनों में 136 मुठभेड़ों का नेतृत्व किया। वहीं रामपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने कद्दावर नेता आजम खान के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई कर सुर्खियां बटोरीं।
बंगाल में क्यों दिखानी पड़ी सख्ती
चुनाव आयोग को फलता क्षेत्र से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि मतदाताओं को धमकाया जा रहा है और वोटिंग प्रक्रिया प्रभावित की जा रही है। सूत्रों के अनुसार अजय पाल शर्मा को फ्री और फेयर चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया था। उन्होंने मौके पर जाकर जांच की और स्पष्ट संदेश दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, फिर चाहे वह सत्ताधारी दल से जुड़ा क्यों न हो।
एक तरफ सख्त छवि वाला अफसर, दूसरी तरफ पिता का सपना पूरा करने वाले बेटे अजय पाल शर्मा की कहानी यही संतुलन दिखाती है। डेंटिस्ट से आईपीएस तक का सफर, भाई का आईएएस बनना और फिर देश के अलग-अलग हिस्सों में कानून व्यवस्था संभालना, यह कहानी सिर्फ एक अफसर की नहीं, बल्कि उस जिद की है जो हालात बदल देती है।
