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Jalandhar News: निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग
Wed, 12 Aug 2026 07:09 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
Updated Wed, 12 Aug 2026 07:09 PM IST
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संत सीचेवाल ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा
संवाद न्यूज एजेंसी
कपूरथला। राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकारी अस्पतालों द्वारा मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों में रेफर करने की प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने की मांग की।
सीचेवाल ने संसद के मानसून सत्र में यह विषय उठाया। उन्होंने अस्पतालों के बिलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने को कहा। सीचेवाल ने कहा कि आम व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से इलाज करवाता है। ऐसे में अस्पतालों की फीस, जांचों और अन्य चिकित्सा सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता जरूरी है। सरकारी अस्पतालों में रेफरल व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए। प्रत्येक रेफरल के लिए संबंधित अस्पताल और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। अनावश्यक रेफरल से मरीज और परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। निजी अस्पतालों की बिलिंग में पारदर्शिता और अधिक वसूली पर रोक राज्यों की जिम्मेदारी है। क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत अस्पतालों को दरें प्रदर्शित करना अनिवार्य है। यह कानून 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है, जहां उल्लंघन पर जुर्माना या पंजीकरण रद्द हो सकता है। अनावश्यक रेफरल रोकने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत रेफरल इकाइयों को मजबूत किया जा रहा है और 631 क्रिटिकल केयर ब्लॉक को मंजूरी मिली है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कपूरथला। राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकारी अस्पतालों द्वारा मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों में रेफर करने की प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने की मांग की।
सीचेवाल ने संसद के मानसून सत्र में यह विषय उठाया। उन्होंने अस्पतालों के बिलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने को कहा। सीचेवाल ने कहा कि आम व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से इलाज करवाता है। ऐसे में अस्पतालों की फीस, जांचों और अन्य चिकित्सा सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता जरूरी है। सरकारी अस्पतालों में रेफरल व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए। प्रत्येक रेफरल के लिए संबंधित अस्पताल और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। अनावश्यक रेफरल से मरीज और परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। निजी अस्पतालों की बिलिंग में पारदर्शिता और अधिक वसूली पर रोक राज्यों की जिम्मेदारी है। क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत अस्पतालों को दरें प्रदर्शित करना अनिवार्य है। यह कानून 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है, जहां उल्लंघन पर जुर्माना या पंजीकरण रद्द हो सकता है। अनावश्यक रेफरल रोकने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत रेफरल इकाइयों को मजबूत किया जा रहा है और 631 क्रिटिकल केयर ब्लॉक को मंजूरी मिली है।
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