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कैलगरी में पीजीडब्ल्यूपी संकट: पंजाब के इमिग्रेशन नेटवर्क पर उठे गंभीर सवाल, छात्रों पर दोहरी मार
Fri, 14 Aug 2026 01:35 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Nivedita
Updated Fri, 14 Aug 2026 01:35 PM IST
सार
जालंधर स्थित पिरामिड ई-सर्विसेज का नाम सामने आने से पंजाब में भी हलचल बढ़ गई है। आरोप है कि इस नेटवर्क के माध्यम से पंजाब से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कनाडा भेजा गया और उन्हें ऐसे पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाया गया, जिनकी पीजीडब्ल्यूपी पात्रता को लेकर बाद में विवाद खड़ा हो गया।
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कैलगरी में प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कनाडा के कैलगरी में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) खारिज होने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों भारतीय और पंजाबी विद्यार्थियों का संकट अब और गहरा गया है। एक तरफ छात्र अपने भविष्य और कनाडा में रहने के अधिकार को लेकर सड़कों पर हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके दाखिले और पूरे शिक्षा तंत्र से जुड़े जालंधर कनेक्शन ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कैलगरी में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर ऐसे पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया, जिनके बारे में उन्हें पीजीडब्ल्यूपी के लिए पात्र होने की उम्मीद बताई गई थी। लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद आव्रजन विभाग ने कई आवेदनों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि संबंधित पाठ्यक्रम नॉन-क्रेडिट कार्यक्रम था।
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इस मामले में जालंधर स्थित पिरामिड ई-सर्विसेज का नाम सामने आने से पंजाब में भी हलचल बढ़ गई है। आरोप है कि इस नेटवर्क के माध्यम से पंजाब से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कनाडा भेजा गया और उन्हें ऐसे पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाया गया, जिनकी पीजीडब्ल्यूपी पात्रता को लेकर बाद में विवाद खड़ा हो गया।
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सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि संबंधित कार्यक्रम नॉन-क्रेडिट थे, तो पंजाब में छात्रों और उनके परिवारों को उनकी वास्तविक पीजीडब्ल्यूपी स्थिति के बारे में क्या बताया गया था?
20 लाख रुपये तक खर्च, अब भविष्य अधर में
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उन्होंने फीस, यात्रा, रहने और अन्य खर्चों को मिलाकर भारी रकम लगाई। कई परिवारों ने बच्चों को कनाडा भेजने के लिए कर्ज लिया और जमीन-जायदाद तक बेच दी। अब वर्क परमिट नहीं मिलने की स्थिति में उनके सामने रोजगार, आव्रजन स्थिति और आर्थिक भविष्य तीनों पर संकट खड़ा हो गया है। कैलगरी में विद्यार्थी कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं और न्याय की मांग को लेकर भूख हड़ताल भी कर चुके हैं।
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू कथित हितों के टकराव का है। आरोप है कि जालंधर की इमिग्रेशन फर्म से जुड़े व्यक्ति की कनाडा स्थित कनाडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑस्टियोपैथिक थेरेपी से भी कारोबारी हिस्सेदारी या प्रबंधन संबंध रहे हैं। इसी संस्थान से जुड़े कार्यक्रमों और पोर्टेज कॉलेज के बीच साझेदारी के जरिए विद्यार्थियों को दाखिला दिया गया।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह महज इमिग्रेशन सलाह की गलती नहीं, बल्कि छात्रों को पाठ्यक्रम, उसकी मान्यता और वर्क परमिट की पात्रता के बारे में गुमराह किए जाने का गंभीर मामला बन सकता है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद जालंधर स्थित फर्म के संचालक के विदेश चले जाने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति अब दुबई में रियल एस्टेट कारोबार कर रहा है और परेशान विद्यार्थियों तथा उनके परिवारों को जवाब नहीं मिल रहा।
प्रदर्शन के बीच कनाडाई सीमा सेवा एजेंसी (सीबीएसए) के अधिकारियों द्वारा प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर विद्यार्थियों के दस्तावेज और आव्रजन स्थिति की जांच किए जाने से छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।
जिन विद्यार्थियों का वर्क परमिट खारिज हो चुका है और जिनका वैध अस्थायी दर्जा भी समाप्त हो गया है, उनके लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे विद्यार्थियों को कनाडा में अपने भविष्य के कानूनी दर्जे को लेकर तत्काल विशेषज्ञ सलाह की जरूरत पड़ सकती है।
यह पूरा मामला पंजाब में विदेश भेजने के नाम पर चल रहे बड़े इमिग्रेशन कारोबार की जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है। अगर छात्रों को गलत पाठ्यक्रम बेचा गया, पीजीडब्ल्यूपी की पात्रता के बारे में गलत जानकारी दी गई और उनसे लाखों रुपये वसूले गए, तो सिर्फ छात्रों को संकट में छोड़कर एजेंट और संस्थान जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
कैलगरी की सड़कों पर बैठे विद्यार्थी केवल वर्क परमिट नहीं मांग रहे। वे उस व्यवस्था से जवाब मांग रहे हैं, जिसके भरोसे उन्होंने अपना भविष्य और उनके परिवारों ने अपनी जमा-पूंजी दांव पर लगाई।