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पंजाब में पंथक मुद्दे पीछे: अमित शाह की एंट्री से गरमाई राजनीति, 2027 की जंग में नशा बनेगा सबसे बड़ा मुद्दा?

Wed, 21 Oct 2026 08:13 AM IST
Nivedita सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Published by: Nivedita Updated Wed, 21 Oct 2026 08:13 AM IST
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Punjab politics issue of drug abuse taken center stage displacing Panthic issues
पंजाब चुनाव - फोटो : अमर उजाला

पंजाब की राजनीति में अब पंथक मुद्दों की जगह नशे का मुद्दा केंद्र में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मैदान में आने से आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नशे को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है, जिससे आम आदमी पार्टी, अकाली दल और कांग्रेस मुश्किल में घिर गई हैं। वहीं अमित शाह के पंजाब दौरे से पंजाब में नशे के मुद्दे पर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है।

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एक समय था जब श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, लापता पावन स्वरूपों और धार्मिक विवादों जैसे पंथक मुद्दे सियासत की दिशा तय करते थे। सरकारों को धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर जवाब देना पड़ता था। अब नशा, गैंगस्टरवाद, हत्याएं और कानून-व्यवस्था के सवाल राजनीतिक बहस के केंद्र में आ रहे हैं। अमित शाह का बीस दिन के भीतर फिर पंजाब आना दर्शाता है कि भाजपा इस मुद्दे को मतदान के दिन तक बनाए रखेगी।
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पंथक मुद्दों की राजनीतिक ताकत धार्मिक भावनाओं और सिख संस्थाओं से जुड़ी रही है। हालांकि, जब आम परिवारों के सामने नशे, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य का सवाल खड़ा होता है, तो राजनीतिक प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या जैसे मामलों ने सुरक्षा और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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प्रमुख दलों के लिए चुनौतियां
भाजपा के लिए नशा एक ऐसा मुद्दा है जिसके सहारे वह पंजाब में अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ा सकती है। पार्टी को कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और नशे के कारोबार पर सरकार को घेरने का अवसर मिल रहा है। अमित शाह की 2029 की समय-सीमा वाली घोषणा पार्टी को एक स्पष्ट चुनावी वादा भी देती है। शिरोमणि अकाली दल के सामने सबसे जटिल चुनौती है। उसे नशे, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी। अकाली दल को अपने शासनकाल से जुड़े नशे के पुराने आरोपों पर भी मतदाताओं का भरोसा बहाल करना होगा।

नशे के खिलाफ पिछली सरकारों के आंकड़े
पंजाब में नशे के खिलाफ विभिन्न सरकारों के दौरान कार्रवाई के आंकड़े सामने आए हैं। 2002 से 2007 तक कांग्रेस सरकार ने 111 किलोग्राम हेरोइन और 83 लाख इंजेक्शन व गोलियां बरामद कीं। 2007 से 2012 तक अकाली-भाजपा सरकार में 1,049 किलोग्राम हेरोइन और 5 करोड़ इंजेक्शन व गोलियां बरामद हुईं। 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने नशा खत्म करने का वादा किया लेकिन मुद्दा बना रहा। 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया और फरवरी 2025 में ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान शुरू किया। सरकार ने अपने शुरुआती चार वर्षों में 5,600 किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद करने और 10,000 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार करने के आंकड़े पेश किए हैं।

राजनीतिक विश्लेषक कुणाल मेहता का कहना है कि 2027 की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई इस बात पर होगी कि पंजाब को नशे से मुक्त करने का भरोसा कौन दिलाता है और कौन अपने दावों को जमीन पर साबित कर पाता है। अंतिम फैसला नशे की उपलब्धता में कमी, बड़े तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई, युवाओं के पुनर्वास और कानून-व्यवस्था में वास्तविक सुधार से तय होगा।

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