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कांग्रेस का यूटर्न: पार्टी से निकाले गए चार नेता फिर कांग्रेस में लौटे, वड़िंग ने कहा- ये हमारे सच्चे सिपाही
संवाद न्यूज एजेंसी, जगरांव (पंजाब)
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Mon, 16 Feb 2026 08:59 PM IST
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सार
पंजाब कांग्रेस ने पार्टी से निकाले चार नेताओं को दोबारा पार्टी में बुला लिया है। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष राजा वड़िंग ने यहां तक कह दिया कि ये सभी कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग के साथ चारों नेता।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
नगर काउंसिल जगरांव के सीनियर मीत प्रधान चुनाव को लेकर कांग्रेस में शुरू हुआ विवाद अब बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम बन गया है। 19 जनवरी को आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कंवरपाल सिंह को वोट डालने के आरोपों के चलते पार्टी से बाहर किए गए चार नेताओं के मामले में सोमवार को कांग्रेस नेतृत्व ने नरम रुख अपना लिया।
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कांग्रेस हाईकमान द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में जब संबंधित नेताओं ने अपना पक्ष रखा तो पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नजर आए। राजा वड़िंग ने कहा कि पार्टी में अनुशासन जरूरी है लेकिन कांग्रेस की परंपरा रही है कि वह अपने कार्यकर्ताओं की बात भी सुनती है। उन्होंने सभी नेताओं से अपील की कि वे पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत करें।
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जिन चार नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर किया गया था, उनमें रविंद्र सभरवाल (फीना), राज भारद्वाज, काला कल्याण सहित अन्य प्रमुख नेता शामिल थे। इन पर आरोप था कि काउंसिल चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के बजाय आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला। इस मामले में हलका इंचार्ज जगतार सिंह जग्गा हिस्सोवाल ने सख्त कदम उठाते हुए नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था। अब कांग्रेस ने अपने ही फैसले पर यूटर्न ले लिया है। सोमवार को हुई बैठक में नेताओं ने अपने जवाब पेश किए और सफाई दी, जिसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें फिर से पार्टी में शामिल करने का संकेत दे दिया। राजा वड़िंग ने यहां तक कह दिया कि आप सभी कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं।
पहले भी यही कांग्रेसी अपनी ही पार्टी के काउंसिल प्रधान रहे जतिंदरपाल राना की आप नेताओं के इशारे पर विरोधता करते रहे हैं क्योंकि यह पूर्व विधायक जगतार सिंह जग्गा के खाते में गिने जाते हैं जबकि राना भारत भूषण आशू गुट के थे। अब चर्चा यह है कि कांग्रेस इस फैसले से संगठनात्मक एकजुटता मजबूत करेगी या पहले से चल रही गुटबाजी को और हवा मिलेगी यह आने वाला समय ही बताएगा।