इफ्तारी-सहरी पर विवाद: आरोप-खाना मांगने पर तो वीसी ने दी गालियां, यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने पद से हटाया
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने वीडियो को री-पोस्ट करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को टैग किया और कार्रवाई की मांग की।
विस्तार
जगरांव की सीटी यूनिवर्सिटी में कश्मीरी छात्रों द्वारा सोमवार देर रात किया गया प्रदर्शन बड़ा विवाद बन गया। छात्रों का आरोप है कि रमजान के महीने में उन्हें सहरी और इफ्तारी के समय उचित भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था। कई बार मेस प्रबंधन से मांग करने के बावजूद उनकी बात को अनदेखा किया गया।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब वे अपनी समस्या लेकर वाइस चांसलर के पास पहुंचे तो समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें कथित रूप से अपशब्द कहे गए और एडमिशन रद्द करने की धमकी दी गई।
छात्रों का आरोप है कि वीसी ने कहा कि सबको बाहर निकालो, एडमिशन कैंसिल करो। इसके बाद छात्र गेट पर धरने पर बैठ गए और रातभर भूखे-प्यासे प्रदर्शन करते रहे।
प्रशासन और पुलिस की एंट्री
मामला बढ़ने पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। मौके पर एसडीएम उपिंदरजीत कौर बराड़ और एसएसपी अंकुर गुप्ता पहुंचे। बाद में शाही इमाम मोहम्मद उस्मान ने भी छात्रों से मुलाकात कर उनकी बात सुनी और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के साथ तीन दौर की बैठक की।
यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने बड़ा फैसला लेते हुए वाइस चांसलर डॉ. नितिन टंडन को पद से हटा दिया। यूनिवर्सिटी के चांसलर चरणजीत सिंह चन्नी ने पुष्टि की कि एसडीएम जगरांव की अगुवाई में एक जांच कमेटी गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच करेगी।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने वीडियो को री-पोस्ट करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को टैग किया और कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लिखा कि क्या रमजान के दौरान इफ्तारी और सहरी के भोजन की मांग करने पर कश्मीरी मुस्लिम छात्रों के साथ दुर्व्यवहार का समर्थन किया जाएगा। उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
छात्रों की एक ही मांग
छात्रों ने साफ कर दिया था कि जब तक वीसी को पूरी तरह हटाया नहीं जाएगा, वे धरना जारी रखेंगे। प्रबंधन की ओर से पहले तबादले की चर्चा हुई लेकिन छात्र इस बात पर अड़े रहे कि उन्हें किसी अन्य ब्रांच में भी पद न दिया जाए।