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Ludhiana News: कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के उपयोग को मिलेगा बढ़ावा
Mon, 10 Aug 2026 06:51 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Updated Mon, 10 Aug 2026 06:51 PM IST
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पीएयू और एनआईटी रोपड़ की बीच समझौता
संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय संस्थान, रोपड़ ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सटीक खेती, रोबोटिक्स, स्वचालन और संवेदन तकनीकों पर संयुक्त रूप से शोध व क्षमता निर्माण करेंगे। इसका उद्देश्य खेती को अधिक वैज्ञानिक, आधुनिक और टिकाऊ बनाना है।
समझौते पर पीएयू के रजिस्ट्रार ऋषिपाल सिंह और रोपड़ संस्थान के निदेशक दीपक वासन ने हस्ताक्षर किए। समझौता समारोह में दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक मौजूद रहे। पीएयू के कुलपति सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि विश्वविद्यालय अग्रणी वैज्ञानिक संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि कृषि में डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाना समय की जरूरत है। विश्वविद्यालय किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता डिजिटल कृषि में शोध और तकनीकी विकास को नई दिशा देगा। नई पीढ़ी के किसानों को उन्नत तकनीकों की जानकारी देने में विश्वविद्यालय हरसंभव सहयोग करेगा। एआई और स्वचालन जैसी तकनीकों से संसाधनों की बचत के साथ उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कुलपति गोसल ने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। यह समझौता डिजिटल कृषि में शोध और विकास को गति देगा। एआई और स्वचालन से संसाधनों की बचत होगी और उत्पादकता बढ़ेगी। नई पीढ़ी के किसानों को उन्नत तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
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पीएयू के निदेशक अनुसंधान अजमेर सिंह ढट्ट ने विश्वविद्यालय के शोध योगदान पर बात की। पिछले पांच दशकों में पीएयू ने 991 फसल किस्मों का विकास कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में विश्वविद्यालय का शोध पर्यावरण अनुकूल खेती और पोषण सुरक्षा पर केंद्रित है। यह समझौता दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय संस्थान, रोपड़ ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सटीक खेती, रोबोटिक्स, स्वचालन और संवेदन तकनीकों पर संयुक्त रूप से शोध व क्षमता निर्माण करेंगे। इसका उद्देश्य खेती को अधिक वैज्ञानिक, आधुनिक और टिकाऊ बनाना है।
समझौते पर पीएयू के रजिस्ट्रार ऋषिपाल सिंह और रोपड़ संस्थान के निदेशक दीपक वासन ने हस्ताक्षर किए। समझौता समारोह में दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक मौजूद रहे। पीएयू के कुलपति सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि विश्वविद्यालय अग्रणी वैज्ञानिक संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि कृषि में डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाना समय की जरूरत है। विश्वविद्यालय किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता डिजिटल कृषि में शोध और तकनीकी विकास को नई दिशा देगा। नई पीढ़ी के किसानों को उन्नत तकनीकों की जानकारी देने में विश्वविद्यालय हरसंभव सहयोग करेगा। एआई और स्वचालन जैसी तकनीकों से संसाधनों की बचत के साथ उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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कुलपति गोसल ने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। यह समझौता डिजिटल कृषि में शोध और विकास को गति देगा। एआई और स्वचालन से संसाधनों की बचत होगी और उत्पादकता बढ़ेगी। नई पीढ़ी के किसानों को उन्नत तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
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पीएयू के निदेशक अनुसंधान अजमेर सिंह ढट्ट ने विश्वविद्यालय के शोध योगदान पर बात की। पिछले पांच दशकों में पीएयू ने 991 फसल किस्मों का विकास कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में विश्वविद्यालय का शोध पर्यावरण अनुकूल खेती और पोषण सुरक्षा पर केंद्रित है। यह समझौता दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाएगा।