{"_id":"6a3d95e5012a67c9f40807e1","slug":"drug-use-at-kharar-civil-hospital-lawyers-demand-transfer-of-smo-mohali-news-c-71-1-spkl1025-144013-2026-06-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"खरड़ सिविल अस्पताल में नशे का सेवन : वकीलों ने एसएमओ के तबादले की मांग की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खरड़ सिविल अस्पताल में नशे का सेवन : वकीलों ने एसएमओ के तबादले की मांग की
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खरड़। सरकारी सिविल अस्पताल में एक युवक ने चिट्टा (नशीला पदार्थ) का सेवन किया है। इस घटना के बाद वकीलों ने सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) राजेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उनके तबादले की मांग की है। अस्पताल परिसर में नशे का सेवन करने की दूसरी घटना बताई जा रही है। अभिषेक मल्होत्रा, एपीएस छिब्बर और तेजिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य निदेशक तथा पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजी है। शिकायत के अनुसार, 22 जून 2026 की सुबह करीब सात बजे अस्पताल के शौचालय में एक युवक ने चिट्टा का सेवन किया।
नशे की अधिक मात्रा के कारण वह बेहोश होकर टॉयलेट सीट पर गिर पड़ा। दरवाजा काफी देर तक नहीं खुलने पर अस्पताल स्टाफ को संदेह हुआ। एक कर्मचारी ने युवक को बेसुध हालत में पाया। बाद में दरवाजा खोलकर उसे बाहर निकाला गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहा था। वकीलों ने आरोप लगाया कि मई 2026 के अंतिम सप्ताह में भी ऐसी ही घटना हुई थी। उस समय स्वास्थ्य विभाग ने 1 जून को एसएमओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इसके बावजूद दोबारा घटना होने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, एसएमओ राजेश कुमार ने आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को किसी भी समय अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए आमंत्रित किया।
विज्ञापन
नशे की अधिक मात्रा के कारण वह बेहोश होकर टॉयलेट सीट पर गिर पड़ा। दरवाजा काफी देर तक नहीं खुलने पर अस्पताल स्टाफ को संदेह हुआ। एक कर्मचारी ने युवक को बेसुध हालत में पाया। बाद में दरवाजा खोलकर उसे बाहर निकाला गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहा था। वकीलों ने आरोप लगाया कि मई 2026 के अंतिम सप्ताह में भी ऐसी ही घटना हुई थी। उस समय स्वास्थ्य विभाग ने 1 जून को एसएमओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इसके बावजूद दोबारा घटना होने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, एसएमओ राजेश कुमार ने आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को किसी भी समय अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए आमंत्रित किया।
विज्ञापन