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मोहाली में ईडी रेड जारी: टीडीआई सिटी कार्यालय में 48 घंटे से जांच, कर्मचारियों के लिए मंगवाए गए गद्दे
Wed, 30 Sep 2026 12:25 PM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
Published by: Nivedita
Updated Wed, 30 Sep 2026 12:25 PM IST
सार
ईडी की यह कार्रवाई टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के बीच हो रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में 23 आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू की थीं।
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मोहाली में ईडी की रेड
- फोटो : संवाद
विस्तार
मोहाली सेक्टर-119 स्थित टीडीआई सिटी कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रेड बुधवार को तीसरे दिन भी जारी है। सोमवार सुबह शुरू हुई जांच के बाद से ईडी की टीम लगातार कार्यालय में मौजूद है और विभिन्न दस्तावेजों, रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कागजात की जांच कर रही है। कार्रवाई लंबी खिंचने के कारण मंगलवार देर रात अधिकारियों के लिए भोजन और सोने की व्यवस्था के लिए कार्यालय में गद्दे भी पहुंचाए गए थे। बुधवार को ईडी के और अधिकारी भी जांच में शामिल हुए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ईडी की टीम सोमवार को तीन वाहनों में टीडीआई सिटी कार्यालय पहुंची थी। टीम के अंदर प्रवेश करने के बाद कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए गए थे। शुरुआती घंटों में कार्यालय में मौजूद लोगों को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने कार्यालय के अलग-अलग हिस्सों में रिकॉर्ड खंगाले और कुछ लोगों से पूछताछ भी की।
तीन दिन से चल रही कार्रवाई को लेकर ईडी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में तलाशी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं और जांच का तत्काल दायरा क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
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करीब छह करोड़ के जमीन मुआवजे की अनियमितता की भी जांच
सूत्रों के अनुसार, ईडी की कार्रवाई का एक पहलू पीआर-6 सड़क के लिए अधिग्रहित जमीन के करीब छह करोड़ रुपये के कथित अतिरिक्त मुआवजे से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि मास्टर प्लान में शामिल जमीन का सीएलयू मंजूर होने के बाद जमीन कुछ रिश्तेदारों के नाम पर पंजीकृत करवाई गई, जिससे अधिग्रहण के दौरान अधिक मुआवजा हासिल करने की स्थिति बनी। बाद में इन रजिस्ट्रियों को रद्द कराने के लिए जीएमएडीए के समक्ष आवेदन किए जाने की बात भी सामने आई है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले से भी जुड़ी जांच
ईडी की यह कार्रवाई टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के बीच हो रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में 23 आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू की थीं। इन परियोजनाओं के लिए 14 हजार से अधिक खरीदारों से 4,619 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि एकत्र किए जाने की बात सामने आई है। ईडी के अनुसार, इनमें कई परियोजनाएं अब तक अधूरी हैं और कुछ में 16 से 18 वर्ष तक की देरी हुई है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि खरीदारों से प्राप्त राशि का एक हिस्सा परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय कंपनी की सहायक कंपनियों और जमीन मालिक संस्थाओं को अग्रिम भुगतान के रूप में स्थानांतरित किया गया। ईडी की टीम इसी मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ईडी की टीम सोमवार को तीन वाहनों में टीडीआई सिटी कार्यालय पहुंची थी। टीम के अंदर प्रवेश करने के बाद कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए गए थे। शुरुआती घंटों में कार्यालय में मौजूद लोगों को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने कार्यालय के अलग-अलग हिस्सों में रिकॉर्ड खंगाले और कुछ लोगों से पूछताछ भी की।
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तीन दिन से चल रही कार्रवाई को लेकर ईडी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में तलाशी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं और जांच का तत्काल दायरा क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
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करीब छह करोड़ के जमीन मुआवजे की अनियमितता की भी जांच
सूत्रों के अनुसार, ईडी की कार्रवाई का एक पहलू पीआर-6 सड़क के लिए अधिग्रहित जमीन के करीब छह करोड़ रुपये के कथित अतिरिक्त मुआवजे से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि मास्टर प्लान में शामिल जमीन का सीएलयू मंजूर होने के बाद जमीन कुछ रिश्तेदारों के नाम पर पंजीकृत करवाई गई, जिससे अधिग्रहण के दौरान अधिक मुआवजा हासिल करने की स्थिति बनी। बाद में इन रजिस्ट्रियों को रद्द कराने के लिए जीएमएडीए के समक्ष आवेदन किए जाने की बात भी सामने आई है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले से भी जुड़ी जांच
ईडी की यह कार्रवाई टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के बीच हो रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में 23 आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू की थीं। इन परियोजनाओं के लिए 14 हजार से अधिक खरीदारों से 4,619 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि एकत्र किए जाने की बात सामने आई है। ईडी के अनुसार, इनमें कई परियोजनाएं अब तक अधूरी हैं और कुछ में 16 से 18 वर्ष तक की देरी हुई है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि खरीदारों से प्राप्त राशि का एक हिस्सा परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय कंपनी की सहायक कंपनियों और जमीन मालिक संस्थाओं को अग्रिम भुगतान के रूप में स्थानांतरित किया गया। ईडी की टीम इसी मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रही है।