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Mohali News: 9 मई को मोहाली में लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत
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मोहाली। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के कार्यक्रम के अनुसार वर्ष 2026 की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 9 मई को जिला मोहाली में किया जाएगा। लोक अदालत के सफल आयोजन को लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मोहाली अतुल कसाना लगातार केंद्रीय व पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। बैठकों में बीएसएनएल, बैंक, बीमा कंपनियां, बिजली विभाग और जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि अधिक से अधिक लंबित मामलों की पहचान कर उन्हें आपसी सहमति से निपटारे के लिए लोक अदालत में प्रस्तुत किया जाए। अतुल कसाना ने बताया कि लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की जाएगी।
इनमें आपराधिक सुलह योग्य मामले, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 से संबंधित मामले, बैंक रिकवरी केस, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले, बिजली और पानी के बिल संबंधी विवाद (गैर-सुलह योग्य चोरी मामलों को छोडक़र), वेतन, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े सेवा मामले, राजस्व मामले तथा किराया, रास्ता अधिकार, निषेधाज्ञा और विशिष्ट निष्पादन जैसे सिविल विवाद शामिल हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अमनदीप कौर ने बताया कि प्री-लिटिगेशन मामलों को भी बिना किसी औपचारिक केस दाखिल किए और बिना कोर्ट फीस के लोक अदालत में लाया जा सकता है। वहीं, अदालत में लंबित मामलों में समझौता होने पर जमा की गई कोर्ट फीस नियमों के अनुसार वापस कर दी जाती है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाकर अपने विवादों का त्वरित, सस्ता और आपसी सहमति से समाधान करवाएं। संवाद
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इनमें आपराधिक सुलह योग्य मामले, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 से संबंधित मामले, बैंक रिकवरी केस, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले, बिजली और पानी के बिल संबंधी विवाद (गैर-सुलह योग्य चोरी मामलों को छोडक़र), वेतन, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े सेवा मामले, राजस्व मामले तथा किराया, रास्ता अधिकार, निषेधाज्ञा और विशिष्ट निष्पादन जैसे सिविल विवाद शामिल हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अमनदीप कौर ने बताया कि प्री-लिटिगेशन मामलों को भी बिना किसी औपचारिक केस दाखिल किए और बिना कोर्ट फीस के लोक अदालत में लाया जा सकता है। वहीं, अदालत में लंबित मामलों में समझौता होने पर जमा की गई कोर्ट फीस नियमों के अनुसार वापस कर दी जाती है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाकर अपने विवादों का त्वरित, सस्ता और आपसी सहमति से समाधान करवाएं। संवाद
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