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Mohali News: तीन दिन में नौ कुत्तों की नसबंदी, खिला रहे चिकन-चावल
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जीरकपुर। शहर में लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल कर 9 अप्रैल को 9 कुत्तों की सफल नसबंदी की गई। सात अप्रैल से अभियान शुरू किया गया था। दो दिन नौ कुत्तों को पकड़ा गया। इस अभियान के शुरू होते ही स्थानीय लोगों में उम्मीद की किरण जगी है कि आने वाले समय में कुत्तों की समस्या पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा। यह कार्य कावा संस्था करवा रही है। संस्था के प्रतिनिधियों के अनुसार फिलहाल अभियान शुरुआती चरण में है, लेकिन आने वाले एक-दो हफ्तों में यह पूरी गति पकड़ लेगा। इसके बाद प्रतिदिन कुत्तों की नसबंदी का कार्य नियमित रूप से किया जाएगा,
इससे शहर में उनकी संख्या नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। कावा के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप बजाज ने बताया कि नसबंदी के बाद कुत्तों को पूरी तरह स्वस्थ होने तक देखरेख में रखा जाता है। इसके बाद उन्हें उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा था। इसके बाद उनकी जगह नए कुत्तों को पकड़कर इस प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। इस सुनियोजित प्रक्रिया से न केवल कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण होगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य और व्यवहार में भी सुधार आने की उम्मीद है। कुत्तों की नसबंदी करने के लिए बनाए अस्पताल में हर एक काम पर नगर परिषद के अधिकारी तीखी नजर रखते हैं। यहां पर हर कोने पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं। इससे यहां पर होने वाले हर एक कार्य की रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। इस कारण यह भी सुनिश्चित हो रहा है कि सारा काम सही तरीके से हो रहा है या नहीं।
खिलाया जाता है चिकन-चावल
नसबंदी के लिए पकड़े गए कुत्तों को पहले एक दिन विशेष निगरानी में रखा जाता है। इस दौरान उन्हें दिन में तीन बार चिकन-चावल खिलाया जाता है। ऑपरेशन से पहले पूरी रात उन्हें खाली पेट रखा जाता है, इसके बाद सुबह उनका ऑपरेशन किया जाता है। ऑपरेशन के बाद होश में आने पर कुत्तों को हल्दी मिश्रित चिकन-चावल दिया जाता है, जो उनके घाव भरने में सहायक होता है। करीब तीन दिन तक उनकी विशेष देखभाल की जाती है। इस दौरान उन्हें दिन में तीन बार पौष्टिक आहार दिया जाता है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें उनके मूल स्थान पर सुरक्षित छोड़ दिया जाता है।
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इससे शहर में उनकी संख्या नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। कावा के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप बजाज ने बताया कि नसबंदी के बाद कुत्तों को पूरी तरह स्वस्थ होने तक देखरेख में रखा जाता है। इसके बाद उन्हें उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा था। इसके बाद उनकी जगह नए कुत्तों को पकड़कर इस प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। इस सुनियोजित प्रक्रिया से न केवल कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण होगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य और व्यवहार में भी सुधार आने की उम्मीद है। कुत्तों की नसबंदी करने के लिए बनाए अस्पताल में हर एक काम पर नगर परिषद के अधिकारी तीखी नजर रखते हैं। यहां पर हर कोने पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं। इससे यहां पर होने वाले हर एक कार्य की रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। इस कारण यह भी सुनिश्चित हो रहा है कि सारा काम सही तरीके से हो रहा है या नहीं।
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खिलाया जाता है चिकन-चावल
नसबंदी के लिए पकड़े गए कुत्तों को पहले एक दिन विशेष निगरानी में रखा जाता है। इस दौरान उन्हें दिन में तीन बार चिकन-चावल खिलाया जाता है। ऑपरेशन से पहले पूरी रात उन्हें खाली पेट रखा जाता है, इसके बाद सुबह उनका ऑपरेशन किया जाता है। ऑपरेशन के बाद होश में आने पर कुत्तों को हल्दी मिश्रित चिकन-चावल दिया जाता है, जो उनके घाव भरने में सहायक होता है। करीब तीन दिन तक उनकी विशेष देखभाल की जाती है। इस दौरान उन्हें दिन में तीन बार पौष्टिक आहार दिया जाता है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें उनके मूल स्थान पर सुरक्षित छोड़ दिया जाता है।