{"_id":"69b5cb0b146c2c3c3f085c81","slug":"team-kalkis-project-becomes-the-center-of-attraction-mohali-news-c-71-1-spkl1025-140201-2026-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: आकर्षण का केंद्र बना टीम कल्कि का प्रोजेक्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: आकर्षण का केंद्र बना टीम कल्कि का प्रोजेक्ट
विज्ञापन
विज्ञापन
मोहाली। पलाक्षा यूनिवर्सिटी में चल रहे प्रोग्रेसिव पंजाब निवेश सम्मेलन में यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग छात्रों की पहल ‘टीम कल्कि’ का प्रोजेक्ट चर्चा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। रोबोटिक्स और एयरोस्पेस तकनीक पर आधारित इस टीम के प्रोजेक्ट को देखने के लिए बड़ी संख्या में प्रतिभागी और विशेषज्ञ पहुंच रहे हैं। इंजीनियरिंग छात्रों द्वारा संचालित ‘टीम कल्कि’ तकनीकी नवाचार और व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। रोबोटिक्स, एयरोस्पेस सिस्टम और बहु-विषयक इंजीनियरिंग परियोजनाओं पर काम करने वाली यह टीम छात्रों को वास्तविक तकनीकी चुनौतियों से जोड़ने का मंच प्रदान करती है।
टीम में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोसाइंस और मैनेजमेंट जैसे विभिन्न क्षेत्रों के छात्र शामिल हैं। सभी सदस्य मिलकर जटिल तकनीकी परियोजनाओं को डिजाइन, परीक्षण और सुधार की प्रक्रिया से विकसित करते हैं। वर्ष 2025 में कैनसैट 2024–25 प्रतियोगिता में भागीदारी के बाद टीम कल्कि का गठन किया गया था, ताकि छात्रों को सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ वास्तविक इंजीनियरिंग सिस्टम बनाने का अनुभव मिल सके। टीम की प्रमुख परियोजनाओं में यूनिवर्सिटी रोवर चैलेंज भी शामिल है। यह अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक्स प्रतियोगिता मार्स सोसायटी द्वारा अमेरिका के यूटा रेगिस्तान में आयोजित की जाती है, जिसमें विश्वविद्यालयों की टीमें ऐसा रोवर तैयार करती हैं जो मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में काम कर सके। इस प्रतियोगिता में रोवर को कठिन भूभाग पर स्वायत्त नेविगेशन, उपकरणों की सर्विसिंग और वैज्ञानिक नमूनों के विश्लेषण जैसे कार्य करने होते हैं।
रोवर के विकास के लिए कई संस्करण किए विकसित
टीम कल्कि ने रोवर विकास के लिए चरणबद्ध इंजीनियरिंग प्रक्रिया अपनाई है। इसके कई संस्करण विकसित किए हैं। रोवर में सॉफ्टवेयर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और बायोसाइंस से जुड़े कई सबसिस्टम शामिल हैं। एआई आधारित तकनीक नेविगेशन, मैपिंग और बाधाओं की पहचान में मदद करती है, जबकि मजबूत मैकेनिकल डिजाइन इसकी गतिशीलता सुनिश्चित करता है। रोवर में पांच डिग्री-ऑफ-फ्रीडम वाला रोबोटिक आर्म भी लगाया गया है, जिससे सटीक तकनीकी कार्य किए जा सकते हैं। टीम के अनुसार इन परियोजनाओं के माध्यम से छात्रों को स्वायत्त रोबोटिक्स, एंबेडेड सिस्टम और एयरोस्पेस तकनीक का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। शिक्षा, अनुसंधान और प्रतियोगिता को साथ जोड़ते हुए ‘टीम कल्कि’ युवा इंजीनियरों को अंतरिक्ष तकनीक के नए आयामों की ओर प्रेरित कर रही है।
Trending Videos
टीम में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोसाइंस और मैनेजमेंट जैसे विभिन्न क्षेत्रों के छात्र शामिल हैं। सभी सदस्य मिलकर जटिल तकनीकी परियोजनाओं को डिजाइन, परीक्षण और सुधार की प्रक्रिया से विकसित करते हैं। वर्ष 2025 में कैनसैट 2024–25 प्रतियोगिता में भागीदारी के बाद टीम कल्कि का गठन किया गया था, ताकि छात्रों को सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ वास्तविक इंजीनियरिंग सिस्टम बनाने का अनुभव मिल सके। टीम की प्रमुख परियोजनाओं में यूनिवर्सिटी रोवर चैलेंज भी शामिल है। यह अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक्स प्रतियोगिता मार्स सोसायटी द्वारा अमेरिका के यूटा रेगिस्तान में आयोजित की जाती है, जिसमें विश्वविद्यालयों की टीमें ऐसा रोवर तैयार करती हैं जो मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में काम कर सके। इस प्रतियोगिता में रोवर को कठिन भूभाग पर स्वायत्त नेविगेशन, उपकरणों की सर्विसिंग और वैज्ञानिक नमूनों के विश्लेषण जैसे कार्य करने होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
रोवर के विकास के लिए कई संस्करण किए विकसित
टीम कल्कि ने रोवर विकास के लिए चरणबद्ध इंजीनियरिंग प्रक्रिया अपनाई है। इसके कई संस्करण विकसित किए हैं। रोवर में सॉफ्टवेयर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और बायोसाइंस से जुड़े कई सबसिस्टम शामिल हैं। एआई आधारित तकनीक नेविगेशन, मैपिंग और बाधाओं की पहचान में मदद करती है, जबकि मजबूत मैकेनिकल डिजाइन इसकी गतिशीलता सुनिश्चित करता है। रोवर में पांच डिग्री-ऑफ-फ्रीडम वाला रोबोटिक आर्म भी लगाया गया है, जिससे सटीक तकनीकी कार्य किए जा सकते हैं। टीम के अनुसार इन परियोजनाओं के माध्यम से छात्रों को स्वायत्त रोबोटिक्स, एंबेडेड सिस्टम और एयरोस्पेस तकनीक का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। शिक्षा, अनुसंधान और प्रतियोगिता को साथ जोड़ते हुए ‘टीम कल्कि’ युवा इंजीनियरों को अंतरिक्ष तकनीक के नए आयामों की ओर प्रेरित कर रही है।