Rajasthan politics: मानगढ़ धाम पर सियासत गरमाई; केंद्र के इनकार पर रोत का बीजेपी पर हमला
बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से केंद्र सरकार के इनकार के बाद राजस्थान के वागड़ अंचल में एक नई राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारत आदिवासी पार्टी के सांसद और वागड़ के कद्दावर नेता राजकुमार रोत ने इस मामले में बीजेपी को घेरा है। रोत ने क्या कहा और मुद्दा राजस्थान की राजनीति में कितना असर रखता है, पढ़िए इस रिपोर्ट में
विस्तार
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने से केंद्र सरकार के इनकार के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। लोकसभा में उठे इस मुद्दे पर केंद्र के जवाब ने आदिवासी समाज और विपक्षी दलों को नाराज कर दिया है। डूंगरपुर-बांसवाड़ा सीट से भारत आदिवासी पार्टी के सांसद और वागड़ के कद्दावर नेता राजकुमार रोत ने इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए रोत ने कहा कि मानगढ़ धाम भील आदिवासी समुदाय की सबसे बड़ी शहादत स्थली है। इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा न देने को लेकर केंद्र सरकार का लोकसभा में दिया गया जवाब बेहद निराशाजनक और 1500 से अधिक शहीद आदिवासी वीरों के सम्मान के खिलाफ प्रतीत होता है।
रोत ने कहा कि सरकार के इस रुख से यह सवाल उठता है कि हाल के वर्षों में द्रौपदी मुर्मु, नरेंद्र मोदी और तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा मानगढ़ धाम पर आयोजित कार्यक्रम क्या केवल राजनीतिक और वोट बैंक तक सीमित थे? उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम का इतिहास न केवल राजस्थान, बल्कि गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सहित पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। इसके बावजूद आदिवासी समाज के इस महत्वपूर्ण शहादत स्थल को अब तक वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसका वह हकदार है।
रोत ने कहा कि मेरी केंद्र सरकार से मांग है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय पहचान दी जाए, इसे NCERT सहित विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए और भील समुदाय की ऐतिहासिक पहचान व बलिदान को उचित सम्मान प्रदान किया जाए।
यह भी पढें- उदयपुर सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में LLB के छात्रों को बांट दिया M.Com का पेपर, छात्रों ने जताया पेपर लीक का शक
गौरतलब है कि जबकि राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) ने वर्ष 2022 में इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की सिफारिश कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। लेकिन पिछले दिनों उदयपुर से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत की ओर से 23 मार्च को लोकसभा में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने को लेकर उठाए सवाल पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। जबकि 1 नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समेत तीन राज्यों के मुख्यमंत्री मानगढ़ धाम पहुंचे थे, तब आदिवासी बलिदान को सम्मान देने की बात कही गई थी।
इस जवाब के बाद विपक्ष और आदिवासी संगठनों ने सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया है। मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्व बेहद बड़ा है। 17 नवंबर 1913 को आदिवासी नेता गोविंद गुरु के नेतृत्व में आयोजित सभा पर अंग्रेजों ने गोलीबारी की थी, जिसमें करीब 1500 भील आदिवासी शहीद हुए थे। इसी कारण इसे ‘राजस्थान का जलियांवाला बाग’ भी कहा जाता है।
केंद्र सरकार ने अपने जवाब में यह भी बताया कि जनजातीय नायकों के सम्मान के लिए देशभर में संग्रहालय विकसित किए जा रहे हैं और ‘जनजातीय गौरव’ जैसी पुस्तकों के माध्यम से उनके योगदान को दर्शाया जा रहा है। हालांकि, बिरसा मुंडा या मानगढ़ धाम पर किसी फिल्म या वेब सीरीज का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्ष इसे आदिवासी समाज की अनदेखी बता रहा है, जबकि सरकार अपने प्रयासों को पर्याप्त बता रही है। ऐसे में आने वाले समय में मानगढ़ धाम को लेकर सियासत और तेज होने के संकेत हैं।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.