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Balotra: बालोतरा कलेक्टर से हनुमान बेनीवाल के गंभीर सवाल, रिफाइनरी आगजनी से लेकर सरकारी आवास तक उठाए मुद्दे
Tue, 07 Jul 2026 01:36 PM IST
बालोतरा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा
Published by: बालोतरा ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 01:36 PM IST
सार
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार और बालोतरा जिला प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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बालोतरा कलेक्टर पर बेनीवाल के गंभीर आरोप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और बालोतरा जिला प्रशासन पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। सांसद ने विशेष रूप से बालोतरा के जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट आईएएस सुशील कुमार यादव की भूमिका, प्रशासनिक जवाबदेही और कथित निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।
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सांसद का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में पचपदरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर प्रदेशभर में चर्चा रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम की जिला स्तरीय व्यवस्थाओं और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी जिला प्रशासन के पास थी। इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए सांसद ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं।
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माइक बंद होने की घटना और रिफाइनरी आगजनी की तुलना
हनुमान बेनीवाल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट की शुरुआत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित करते हुए की। उन्होंने लिखा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सभा के दौरान तकनीकी कारणों से माइक बंद होने की घटना पर सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक महिला आईएएस अधिकारी को एपीओ कर दिया था, लेकिन पचपदरा रिफाइनरी में प्रधानमंत्री के उद्घाटन कार्यक्रम से एक दिन पहले हुई भीषण आगजनी के बाद बालोतरा के जिला कलेक्टर की कोई जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई। उन्होंने सवाल किया कि जब दोनों घटनाएं प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों से जुड़ी थीं, तो कार्रवाई के मानदंड अलग-अलग क्यों रहे। सांसद ने इसे प्रशासनिक जवाबदेही में दोहरे मापदंड का उदाहरण बताते हुए सरकार से सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग की।
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सरकारी आवास को लेकर भी सरकार से मांगा जवाब
अपने पोस्ट में सांसद बेनीवाल ने जिला कलेक्टर के सरकारी आवास को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि बालोतरा में जिला कलेक्टर के लिए सरकारी आवास उपलब्ध नहीं था, तो नियमानुसार उन्हें निजी किराये के मकान में रहना चाहिए था। इसके बजाय वे रिफाइनरी की वीआईपी टाउनशिप में बने आवास में रह रहे हैं। सांसद ने पूछा कि क्या किसी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट की टाउनशिप में जिला कलेक्टर का निवास करना प्रशासनिक निष्पक्षता, पारदर्शिता और सुशासन के सिद्धांतों के अनुरूप माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर भी स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए।
कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों का किया उल्लेख
सोशल मीडिया पोस्ट में सांसद ने केवल आगजनी और आवास का ही मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि बालोतरा जिला प्रशासन पर विभिन्न मामलों में कथित अनियमितताओं के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सीईटीपी (CETP) प्लांट के सेस टैक्स, रिफाइनरी क्षेत्र और बालोतरा के आसपास सरकारी भूमि से रास्तों के आवंटन तथा भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों में लंबे समय से अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते रहे हैं। सांसद ने सवाल किया कि यदि इस प्रकार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो राज्य सरकार ने अब तक उनकी निष्पक्ष जांच या आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है।
पीएमओ से रिपोर्ट तलब करने की मांग
हनुमान बेनीवाल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राजस्थान सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय को भी टैग किया। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस पूरे मामले में राजस्थान सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब करे। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री की सभा में माइक बंद होने जैसी तकनीकी घटना पर तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है, तो पचपदरा रिफाइनरी में उद्घाटन कार्यक्रम से ठीक पहले हुई गंभीर आगजनी के मामले में जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बालोतरा के जिला कलेक्टर के मामले में सरकार अलग रवैया क्यों अपना रही है।
'क्या जिला कलेक्टर सरकार से भी बड़े हो गए हैं?'
अपने पोस्ट के अंत में सांसद हनुमान बेनीवाल ने तीखा सवाल उठाते हुए लिखा कि क्या बालोतरा के जिला कलेक्टर राजस्थान सरकार से भी बड़े हो गए हैं, जिन पर किसी प्रकार की जवाबदेही लागू नहीं होती। उन्होंने राज्य सरकार से पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही सभी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए और किसी भी मामले में अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए।