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Rajasthan: सम के धोरों में भीषण आग का तांडव, मिनटों में राख हुई बस्ती, जिंदा जले मवेशी, नकदी-जेवर सब स्वाहा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: बालोतरा ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2026 09:17 PM IST
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सार
सम क्षेत्र में रेतीले धोरों के बीच बसी कच्ची बस्ती में लगी भीषण आग ने सबकुछ तबाह कर दिया। तेज गर्मी और आंधी के बीच लगी आग ने कुछ ही मिनटों में एक दर्जन से ज्यादा घरों को राख में बदल दिया, जबकि लाखों की नकदी, जेवर और मवेशी भी आग की भेंट चढ़ गए।
सम की कच्ची बस्ती में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जैसलमेर के प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र सम में एक दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे इलाके को दहला दिया। रेतीले धोरों के बीच बसी एक कच्ची बस्ती में अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। तेज गर्मी और आंधी के कारण आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते एक दर्जन से अधिक कच्चे मकान उसकी चपेट में आ गए।
घटना के दौरान बस्ती में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और धुएं के गुबार दूर तक दिखाई देने लगे। ग्रामीण अपने घरों से जान बचाकर बाहर भागते नजर आए। कई परिवारों को अपने छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर खुले मैदानों की ओर भागना पड़ा।
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कुछ ही मिनटों में राख हो गए घर
पीड़ित परिवारों ने बताया कि आग अचानक लगी और देखते ही देखते पूरे इलाके में फैल गई। कच्चे घर होने के कारण आग ने तेजी से सबकुछ अपनी चपेट में ले लिया। घरों में रखा घरेलू सामान, कपड़े, बर्तन, अनाज और जरूरी दस्तावेज जलकर राख हो गए।
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सबसे अधिक नुकसान उन परिवारों को हुआ, जिन्होंने हाल ही में फसल बेचकर नकदी घर में रखी थी। ग्रामीणों के अनुसार लाखों रुपए नकद, सोने-चांदी के आभूषण और वर्षों की जमा पूंजी आग में स्वाहा हो गई। कई महिलाओं ने रोते हुए बताया कि बेटियों की शादी के लिए संभालकर रखे गए जेवर भी आग की भेंट चढ़ गए।
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मवेशियों को बचाने का मौका तक नहीं मिला
अग्निकांड में पशुधन का भी भारी नुकसान हुआ। आग की चपेट में आने से भेड़-बकरियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई पास तक नहीं जा सका। पशुपालक परिवारों के लिए यह नुकसान किसी बड़े आर्थिक संकट से कम नहीं माना जा रहा।
दमकल नहीं पहुंच सकी, ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा
घटना स्थल मुख्य सड़क से करीब 7 किलोमीटर अंदर रेतीले और कच्चे रास्ते पर स्थित होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में ग्रामीणों ने खुद ही बाल्टियों, टैंकरों और मिट्टी की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया।
घंटों की मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने किसी तरह आग पर काबू पाया लेकिन तब तक कई परिवारों का सबकुछ जल चुका था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर दमकल पहुंच जाती तो नुकसान काफी कम हो सकता था।
भीषण गर्मी और आंधी बन रही आगजनी की बड़ी वजह
इन दिनों पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी का दौर जारी है। तापमान लगातार 45 से 48 डिग्री के आसपास बना हुआ है। ऊपर से चल रही तेज गर्म हवाएं और धूलभरी आंधियां आगजनी की घटनाओं को और खतरनाक बना रही हैं। ग्रामीण इलाकों में अधिकांश घर कच्चे और घास-फूस से बने होने के कारण आग तेजी से फैल जाती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे अग्निशमन वाहन और आपातकालीन राहत व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि ऐसे हादसों के दौरान तुरंत सहायता पहुंच सके।
प्रशासन मौके पर पहुंचा
घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पटवारी और तहसीलदार ने प्रभावित परिवारों से जानकारी लेकर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर तेज गर्मी और हवा को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है, हालांकि शॉर्ट सर्किट सहित अन्य पहलुओं की भी जांच होगी।
ग्रामीणों ने मांगी आर्थिक सहायता
अग्निकांड से प्रभावित परिवारों ने सरकार और प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवारों के पास अब खाने-पीने तक का सामान नहीं बचा है। लोगों ने मांग की कि प्रभावित परिवारों को राहत राशि, अस्थायी आवास और पशुधन हानि का मुआवजा जल्द दिया जाए।