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Balotra News: थार के रेगिस्तान में दुर्लभ कैराकल की वापसी के संकेत, लेकिन एक दर्दनाक घटना ने बढ़ाई चिंता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा Published by: बालोतरा ब्यूरो Updated Wed, 06 May 2026 09:29 PM IST
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सार

Balotra News: जैसलमेर के रेगिस्तानी क्षेत्र में दुर्लभ कैराकल की मौजूदगी के नए सबूत मिले हैं। कैमरा ट्रैप में नर-मादा दिखे, संख्या बढ़ने के संकेत हैं। हालांकि 16 मार्च को जला शव मिलने से चिंता बढ़ी, लेकिन वन विभाग की निगरानी और संरक्षण प्रयास जारी हैं।

Signs of the rare caracal returning to the Thar Desert, but a tragic incident has raised concerns.
रेगिस्तान में फिर दिखा कैराकल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती रेगिस्तानी इलाकों, विशेष रूप से जैसलमेर के शाहगढ़ और घोटारू क्षेत्र से एक बेहद अहम और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जहां एक ओर लंबे समय बाद दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल की सक्रिय मौजूदगी के ठोस प्रमाण मिल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर इस प्रजाति के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं।

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रेगिस्तान में फिर दिखी उम्मीद की किरण
पिछले एक वर्ष के दौरान वन विभाग और वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में कैराकल के पगमार्क, मूवमेंट और कैमरा ट्रैप के जरिए कई अहम सबूत मिले हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए जा रहे अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि थार का यह इलाका अब भी इस दुर्लभ प्रजाति के लिए उपयुक्त आवास बना हुआ है।
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उप वन संरक्षक कुमार शुभम के अनुसार, सीमित संख्या में लगाए गए मोशन-सेंसिंग कैमरों में दो नए कैराकल एक नर और एक मादा की स्पष्ट तस्वीरें सामने आई हैं। इससे शाहगढ़ क्षेत्र में इनकी कुल संख्या बढ़कर तीन हो गई है। यह आंकड़ा भले छोटा लगे, लेकिन भारत जैसे देश में जहां कैराकल लगभग विलुप्ति के कगार पर है, यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

वैज्ञानिक तकनीक से हो रही निगरानी
वन विभाग ने एक कैराकल को रेडियो-कॉलर भी पहनाया है, जिससे उसकी गतिविधियों, शिकार के पैटर्न और विचरण क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। इसके अलावा घोटारू और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं ताकि पूरे आवास क्षेत्र का सही आकलन किया जा सके। कैराकल का स्वभाव बेहद सतर्क और एकाकी होता है, जिससे इसे देख पाना बेहद मुश्किल होता है। यही कारण है कि आधुनिक तकनीकें जैसे कैमरा ट्रैप और रेडियो ट्रैकिंग इसके संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही हैं।

संरक्षण प्रयासों को जमीन पर सफल बनाने के लिए वाइल्डलाइफ़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया ने एक अनूठा ‘गोट बैंक’ मॉडल शुरू किया है। इस योजना के तहत यदि किसी ग्रामीण की बकरी कैराकल का शिकार बनती है, तो सत्यापन के बाद उसे तुरंत दूसरी बकरी उपलब्ध कराई जाती है। बाद में लाभार्थी परिवार उस बकरी के बच्चे को वापस बैंक में जमा करता है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों के आर्थिक नुकसान को कम करना और उनके भीतर वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है, क्योंकि पशुधन पर हमलों के कारण कई बार स्थानीय लोगों में नाराजगी और प्रतिशोध की भावना पैदा हो जाती है।

16 मार्च की घटना ने सबको हिला दिया
इन सकारात्मक संकेतों के बीच 16 मार्च 2026 की एक घटना ने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया। शाहगढ़ क्षेत्र के बाछियाछोड़ इलाके में एक कैराकल का आधा जला हुआ शव मिला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश पैदा हुआ था।

प्राथमिक जांच में सामने आया कि यह मामला साक्ष्य मिटाने की कोशिश से जुड़ा था। वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्धों को गिरफ्तार भी किया। लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि संरक्षण के प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर चुनौतियां अब भी गंभीर हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कैराकल की संख्या पहले से ही बेहद सीमित है और जैसलमेर का यह क्षेत्र इसके अंतिम सुरक्षित आवासों में से एक हो सकता है। ऐसे में यदि शिकार या मानवजनित घटनाएं जारी रहीं, तो यह प्रजाति देश से पूरी तरह गायब भी हो सकती है।

पढ़ें- Jaisalmer News: सीमावर्ती इलाके में दुर्लभ कैराकल का शव मिलने से सनसनी, वन्यजीव संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल

कैराकल की पहचान उसके कानों पर मौजूद लंबे काले बालों के गुच्छों से होती है, जो इसे अन्य जंगली बिल्लियों से अलग बनाते हैं। यह मुख्य रूप से रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाई जाती है और अकेले रहना पसंद करती है। वन विभाग और वैज्ञानिक एजेंसियां अब इस दिशा में एक व्यापक संरक्षण योजना तैयार करने में जुटी हैं। निरंतर मॉनिटरिंग, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को इस योजना का केंद्र बनाया जा रहा है।

अधिकारियों को उम्मीद है कि अगर यही प्रयास लगातार जारी रहे, तो न सिर्फ कैराकल की संख्या में वृद्धि हो सकती है, बल्कि यह दुर्लभ प्रजाति थार के रेगिस्तान में फिर से मजबूती से स्थापित हो सकेगी। थार के रेगिस्तान में कैराकल की मौजूदगी जहां एक नई उम्मीद जगा रही है, वहीं हालिया घटना यह भी याद दिलाती है कि संरक्षण केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी और जनसहभागिता से ही संभव है।

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