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Rajasthan: बांसवाड़ा में निकाय चुनाव की आहट से गरमाई सियासत, कांग्रेस फिर बनाएगी बोर्ड या BJP करेगी वापसी?
Sun, 16 Aug 2026 09:18 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Sun, 16 Aug 2026 09:18 PM IST
सार
Rajasthan News: बांसवाड़ा नगर परिषद में चुनाव की तारीखों का एलान भले नहीं हुआ है, लेकिन सभापति पद के आरक्षण के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 2019 में कांग्रेस ने 60 में से 36 वार्ड जीतकर बोर्ड बनाया था। अब भाजपा वापसी की कोशिश में है, जबकि भारत आदिवासी पार्टी की संभावित एंट्री मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।
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नगर परिषद बांसवाड़ा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नगर निकाय चुनावों की तारीखों का एलान नहीं हुआ है, किंतु सभापति का पद आरक्षित होने के बाद बांसवाड़ा शहर में चुनावी चर्चाएं परवान चढ़ रही हैं। इसमें भी बड़ा सवाल यही सामने आ रहा है कि क्या बांसवाड़ा नगर परिषद में कांग्रेस लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल करेगी या भाजपा फिर अपना बोर्ड बनाने में कामयाब होगी? इस बार कुछ वार्डों में भारत आदिवासी पार्टी के भी चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा है।
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60 वार्डों में पिछली बार कांग्रेस का रहा दबदबा
बांसवाड़ा नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। पिछली बार 2019 में हुए निकाय चुनाव में कांग्रेस ने अपना बोर्ड बनाया था। 60 में से कांग्रेस के 36 पार्षदों ने जीत हासिल की थी। वहीं, भाजपा को 21 वार्डों में जीत मिली थी, जबकि तीन सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे थे। वर्ष 2024 में कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव नहीं हुए और राज्य सरकार ने निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति कर दी थी।
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छह में से चार चुनाव में भाजपा ने बनाया बोर्ड
वर्ष 1986 के बाद बांसवाड़ा में 1994 में चुनाव हुए। इसके बाद अब तक हुए छह चुनावों में से चार बार भाजपा ने अपना बोर्ड बनाया है। 1994 से 2010-11 तक बांसवाड़ा में नगर पालिका रही। इसके बाद राज्य सरकार ने पालिका को क्रमोन्नत कर नगर परिषद का दर्जा दिया।
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1994 में भाजपा ने बहुमत के साथ जीत हासिल की, जिसमें मणिलाल बोहरा नगरपालिका अध्यक्ष बने। इसके बाद 1999 में उमेश पटियात और 2004 में कृष्णा कटारा ने नगरपालिका अध्यक्ष का दायित्व संभाला। इसके बाद 2014 में मंजूबाला पुरोहित सभापति बनीं।
कांग्रेस को दो बार मिला बोर्ड बनाने का मौका
2009 में बांसवाड़ा नगरपालिका में जनता ने पहली बार अध्यक्ष और पार्षद के लिए वोट डाले। अध्यक्ष के लिए हुए सीधे चुनाव में कांग्रेस के राजेश टेलर विजयी रहे। बोर्ड भी कांग्रेस का बना। इसके बाद पिछले निकाय चुनाव में कांग्रेस ने दूसरी बार बोर्ड पर कब्जा जमाया।
अब फिर चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। राजनीतिक दलों की ओर से बैठकों और रणनीति बनाने का दौर भी शुरू हो गया है। भाजपा और कांग्रेस के जिला प्रभारी और मंत्री स्तर के नेता कार्यकर्ताओं की बैठक कर चुके हैं।
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तीसरे मोर्चे की आहट, BAP बिगाड़ सकती है समीकरण
इस बार निकाय चुनाव में तीसरे मोर्चे की आहट भी सुनाई देने लगी है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक बहुल वार्डों से भारत आदिवासी पार्टी की ओर से प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। इससे इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है और भाजपा-कांग्रेस इसी अनुरूप रणनीति बनाने में जुटी हैं।
हालांकि, अल्पसंख्यक बहुल वार्डों में कांग्रेस को पहले सफलता मिली थी। ऐसे में संभावित त्रिकोणीय मुकाबले को देखते हुए कांग्रेस अधिक सजग नजर आ रही है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि बांसवाड़ा में मुकाबला किन मुद्दों और समीकरणों के साथ आगे बढ़ता है।