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Rajasthan: अस्पतालों में मौत का 'इन्फेक्शन'! कोटा-बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा-बांसवाड़ा में 7 प्रसूताओं की मौत
Sat, 11 Jul 2026 11:23 AM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा/ बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा/ बांसवाड़ा
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sat, 11 Jul 2026 11:23 AM IST
सार
सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद लगातार हो रही महिलाओं की मौतें राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। बीते 6 दिनों के भीतर भीलवाड़ा में 5 और बांसवाड़ा में 2 प्रसूताओं की मौत के बाद मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।
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ओटी का संक्रमण ले रहा प्रसूताओं की जान?
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था इस समय गंभीर सवालों के घेरे में है। प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोटा, बीकानेर और जोधपुर के बाद अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों से दिल दहला देने वाले मामले सामने आए हैं। लगातार हो रही इन मौतों ने पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है और इस पर सियासत भी गरमा गई है।
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भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल स्थित मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (MCH) में पिछले छह दिनों के भीतर 5 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। मृतकों में शिमला गुर्जर (5 जुलाई), फोरी देवी (7 जुलाई), ईशा पांडे (8 जुलाई), दिव्या (9 जुलाई) और संगीता जीनगर (10 जुलाई) शामिल हैं। इन सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी, जिसके बाद तबीयत बिगड़ने पर इन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया था।
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इसी बीच अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) की कल्चर जांच रिपोर्ट में संक्रमण मिलने की पुष्टि के बाद मामला और गंभीर हो गया है। हालांकि अभी तक यह स्थापित नहीं हुआ है कि संक्रमण का इन मौतों से सीधा संबंध है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञ स्तर पर पूरे मामले की जांच की जा रही है। महात्मा गांधी अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं। अस्पताल में नियमित उपयोग के लिए सीमित सर्जिकल सेट उपलब्ध हैं, जिन्हें दोबारा उपयोग से पहले स्टरलाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि एमसीएच में अलग आईसीयू और पोस्ट-ऑपरेटिव सुविधाओं की कमी गंभीर मरीजों के उपचार को प्रभावित कर सकती है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
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बांसवाड़ा में 2 घंटे के भीतर 2 माताओं ने तोड़ा दम
भीलवाड़ा के साथ ही बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में भी शुक्रवार को दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। खास बात यह है कि दोनों महिलाओं (लक्ष्मी, उम्र 21 वर्ष और लीला, उम्र 32 वर्ष) ने पहली बार संतान को जन्म दिया था, लेकिन प्रसव के 24 घंटे के भीतर ही उनकी मौत हो गई।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार लक्ष्मी गंभीर एनीमिया से पीड़ित थी, जबकि लीला की मौत का संभावित कारण उच्च रक्तचाप माना जा रहा है। हालांकि दोनों नवजात सुरक्षित हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. योगेश काचा ने मामले की विस्तृत जांच के लिए पांच सदस्यीय चिकित्सकीय समिति का गठन किया है।
कोटा, बीकानेर और जोधपुर में भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
राजस्थान में प्रसूताओं की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों के दौरान कोटा, बीकानेर और जोधपुर के संभाग स्तरीय बड़े सरकारी अस्पतालों में भी इसी तरह प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार सामने आए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि पूरे प्रदेश की मातृ स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं। अकेले भीलवाड़ा में मार्च से जुलाई के बीच अब तक 9 प्रसूताओं की जान जा चुकी है।
प्रसूताओं की मौत पर गरमाई सियासत
अस्पतालों में लगातार हो रही मौतों को लेकर प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि "क्या राजस्थान को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है?" उन्होंने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार और मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "राजस्थान की बदहाल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार माताओं की जान ले रही है।"
दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अधिकांश मरीज पहले से ही गंभीर अवस्था में रेफर होकर आते हैं। चिकित्सकों के अनुसार पल्मोनरी एंबोलिज्म, गंभीर एनीमिया, प्रेग्नेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन (PIH), एस्पिरेशन तथा अन्य प्रसूति संबंधी जटिलताएं कई मामलों में मौत का कारण बनती हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले की चिकित्सकीय जांच की जा रही है और जहां भी किसी प्रकार की लापरवाही सामने आएगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एक बार फिर मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, अस्पतालों के संसाधनों, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और आपातकालीन प्रसूति देखभाल की समीक्षा की आवश्यकता को केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें विभिन्न जांच समितियों की रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदमों पर टिकी हैं।